#आदिवासी_विरोधी_BJP_सरकार
👉 @narendramodi मोदी सरकार ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने से साफ़ इनकार कर दिया है।
ये आदिवासी अस्मिता का घोर अपमान है, ये उन वीर आदिवासियों के बलिदान का अपमान है, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
चुनाव के वक्त मोदी जी ने मानगढ़ धाम को लेकर बड़े-बड़े वादे किए, आदिवासी समाज के बलिदान के सम्मान की बातें कीं। लेकिन अब मोदी सरकार में राजस्थान से चुने गए केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने संसद में स्पष्ट जवाब दे दिया कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक नहीं बनाया जा सकता है। क्या BJP के लिए चुनावी मंचों पर आदिवासियों का सम्मान सिर्फ वोट लेने के लिए था?
मानगढ़ धाम कोई इमारत का नाम नहीं, ये आदिवासी स्वाभिमान, शौर्य और बलिदान का प्रतीक है। इतिहास को सम्मान देने के बजाय उसे नकारना देश के अमर शहीदों का अपमान है। आदिवासी समाज इस अपमान और उपेक्षा को कभी नहीं भूलेगा।
समय :- सुबह 7:00 बजे✍️👇
#मानगढ़_शहीदों_का_अपमान
👉मानगढ़ धाम 1500 से ज्यादा हमारे पुरखों के बलिदान की पवित्र भूमि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक नहीं घोषित करके बीजेपी सरकार ने सम्पूर्ण आदिवासी समाज का अपमान किया है!!
सभी भाई बहन बीजेपी सरकार की आदिवासी विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज़ बुलंद करें और लिखें ✍️
#मानगढ़_शहीदों_का_अपमान
जिन्होंने अंग्रेजों के साथ मिलकर आदिवासियों का हमेशा शोषण अत्याचार किया था!!
आज उन्ही का राज आ गया है इसलिए मानगढ़ को "राष्ट्रीय स्मारक" का दर्जा नहीं देंगे!'
#मानगढ़_शहीदों_का_अपमान
भीलप्रदेश राज्य गठन की मांग 𝟭𝟳.𝟭𝟭.𝟭𝟵𝟭𝟯 के मानगढ़ आंदोलन से शुरू हुई है!!
आज तक 𝟭𝟭3साल हो चुके हैं!"
इस पीढ़ी को यह लड़ाई जीतनी ही होंगी !#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत के आदिवासी (Indigenous Peoples) समुदाय की ओर से अपनी बात रखने का अवसर मिला।
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में भारत सरकार द्वारा लंबे समय से किये जा रहे उस दावे का तथ्यात्मक खंडन किया कि भारत में कोई विशेष आदिवासी (Indigenous) समुदाय नहीं हैं। मैंने स्पष्ट कहा कि मैं इस दावे को स्वीकार नहीं करता।
मैंने बताया कि भारत में प्रोटो-ऑस्ट्रालॉइड, नीग्रिटो, द्रविड़ और मंगोलॉयड नस्लीय समूहों से संबंधित आदिवासी निवास करते हैं, जो कुल 705 आदिवासी समूह के रूप में अपनी पहचान बनाये हुए हैं।
वर्तमान भारत के संविधान में इन आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्रदान की गई है, जिनकी वर्तमान जनसंख्या लगभग 14 करोड़ के करीब है।
अतः यह स्पष्ट है कि भारत की अनुसूचित जनजातियां ही भारत के इंडिजिन्स पीपुल्स हैं।
मैंने अपने वक्तव्य में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू के Kailas v. State of Maharashtra (2011) निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "अनुसूचित जनजातियां भारत के मूल निवासियों की वंशज हैं।"
संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे वैश्विक मंच पर भारत के भील आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए गर्व और सम्मान की बात है। यह आवाज केवल मेरी नही, बल्कि देश के करोड़ों आदिवासी भाई-बहनों की आवाज है। जोहार
@UN@rashtrapatibhvn@narendramodi@RahulGandhi@kharge@PMOIndia@MEAIndia@JPN_PMO@timesofindia@thewire_in@HindustanTimes@BBC@BBCWorld@PTI_News@ANI@IndianExpress@ndtv
"पूर्वजों के बलिदान की राख पर आज साजिशों की इमारतें खड़ी हैं। भील होकर भी अपनों की जमीन पर बेगाने हो गए। अब और नहीं! हमें हमारा वजूद चाहिए, हमें 'भील प्रदेश' चाहिए।
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश"
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 2और 3आधार पर #भीलप्रदेश राज्य गठन किया जा सकता है,फिर किस बात के लिए केंद्र सरकार भीलप्रदेश राज्य पर अमल नहीं कर रही है झारखण्ड,छत्तीसगढ़,उत्तराखंड और तेलंगाना की तर्ज पर भीलप्रदेश राज्य का गठन किया जाना चाहिए क्यूंकि भीलप्रदेश राज्य के डिमांड क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है जहाँ विकास नाम की चीज नहीं है!!
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की धरती पर बसे भील आदिवासी एक आत्मा, एक संस्कृति और एक विरासत के धनी हैं। हमारे पुरखों ने अपने खून से इस भूमि को सींचा है।
आज वक्त आ गया है कि इस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी सहित मानवतावादी सोच के साथ रहने वाले सभी वर्ग के हित में नये भील राज्य बनाने की दिशा में केंद्र सरकार को फैसला करने की आवश्यकता है।
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
धरियावद के आदिवासी परिवारों को उजाड़ना बेहद चिंताजनक है राजस्थान सरकार संविधान के अनुसार कार्य करे और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करे। यदि अन्याय नहीं रुका, तो राजस्थान का आदिवासी समाज एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपने हकों की लड़ाई लड़ेगा
@ForestRajasthan@FortRajasthan
धरियावाद के आदिवासी परिवारों के साथ यदि अन्याय हुआ है, तो दोषियों पर कार्रवाई हो और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है!!
@ForestRajasthan@RajGovOfficial
प्रतापगढ़ जिले के जूना बोरिया (धरियावद) में वन विभाग द्वारा वर्षों से निवासरत नाथ समाज एवं आदिवासी समाज के घरों को ध्वस्त करने की कार्यवाही निंदनीय है।
जो घर गिराए गए हैं, उनमें पीएम आवास योजना के तहत बना हुआ मकान भी सम्मिलित है।
उन पीड़ित परिवारों के न्याय की लड़ाई के लिए बाप पार्टी विधायक @MlaThawarchand एवं स्थानीय कार्यकर्ता दो दिन से धरने पर बैठे हुए हैं।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp व @PratapgarhDm से अनुरोध है कि मामले में उचित कार्यवाही कर पीड़ितों को न्याय दें।
@zeerajasthan_@News18Rajasthan@1stIndiaNews@rpbreakingnews