@UPSRTCHQ संबंधित अधिकारियों से अनुरोध है कि बस की तत्काल गहन तकनीकी एवं प्रदूषण जाँच कराई जाए तथा यदि यह वाहन निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो इसे सड़क से हटाकर नियमानुसार स्क्रैप किया जाए।
क्या यह UPSRTC की बस है या सड़क पर चलती हुई फॉगिंग मशीन? 😟
प्रयागराज क्षेत्र के लीडर रोड डिपो की यह बस सड़क पर लगातार काला धुआँ छोड़ते हुए चल रही है। संलग्न वीडियो में स्थिति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
यह केवल वायु प्रदूषण का विषय नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले यात्रियों
अन्य वाहन चालकों एवं आम जनता के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा है।
@UPSRTC_PRAYAGRAJ @UPSRTC लीडर रोड डिपो की इस बस की तत्काल जाँच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
@UPSRTCHQ क्यों झूठ बोल रहे है आप , आधी से ज़्यादा बसों में ये कार्य नहीं करता है ।
आप अपने पुराने वाहनो को नीलाम या अपने बेड़े से हटा क्यों नहीं रहे है ?
जनरथ सेवा की समीक्षा की जाए , अवध डिपो जैसे अन्य डिपो से पुरानी बसों को हटाया जाए
क्या UPSRTC के लखनऊ रीजन की जनरथ और Pink Line बसें अब “सार्वजनिक परिवहन” कम और “चलते हुए खतरे” ज्यादा बन चुकी हैं?
जर्जर बॉडी, धुआँ उड़ाते इंजन, टूटे फ्लोर, लगातार ब्रेकडाउन और लाखों किलोमीटर चल चुकी बसें आज भी हजारों यात्रियों को ढो रही हैं। आखिर इस हालत के लिए जिम्मेदार कौन है?
यह सिर्फ पुरानी बसों का मुद्दा नहीं है। यह यात्रियों की सुरक्षा, पर्यावरण, प्रशासनिक जवाबदेही और करदाताओं के पैसे का सवाल है।
उत्तर प्रदेश की जनता सुरक्षित और सम्मानजनक सार्वजनिक परिवहन की हकदार है — न कि ऐसे थके हुए बेड़े की जो किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा हो।
@myogioffice
UPSRTC की बूढ़ी, धुआं उड़ाती बसें कब तक लोगों की जान और हवा (पर्यावरण) से खिलवाड़ करेंगी?**
1/ 🚌 बस नंबर **UP33AT2533** — 10 साल से पुरानी, 8 लाख किमी से ज़्यादा चली हुई, BS-3 डीज़ल बस — आज भी अवध डिपो से सड़कों पर दौड़ रही है। अकेली नहीं है, सैकड़ों ऐसी बसें हैं जो 10-12 साल पुरानी होकर भी सड़कों पर मौत बनकर घूम रही हैं।
2/ ⚠️ ये बसें न सिर्फ *प्रदूषण नियंत्रण मानकों* (Pollution Norms) की धज्जियाँ उड़ाती हैं, बल्कि *सड़क हादसों* का सीधा कारण भी बनती हैं। ब्रेक फेल, टायर फटना, इंजन फेल—यही कारण हैं आए दिन होने वाले हादसों के, जिनमें निर्दोष जानें जाती हैं।
3/ ❌ **BS-3** मानक की डीज़ल बसें अब पुराने हो चुके हैं। *भारत सरकार की व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी* (2021) के अनुसार, 15 साल पुरानी कमर्शियल गाड़ियाँ जो फिटनेस टेस्ट में फेल हों, उन्हें हटाना अनिवार्य है।BS-3 स्टैंडर्ड अब पूरी तरह निष्क्रिय माना जाता है। यह राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों और सड़क सुरक्षा अधिनियमों की सीधी अनदेखी है।
4/ 🚫 दिल्ली-NCR में तो 10 साल से पुरानी डीज़ल गाड़ियों पर प्रतिबंध है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से। फिर उत्तर प्रदेश में ये जानलेवा बसें क्यों सड़कों पर दौड़ रही हैं? क्या प्रदूषण और मौतें सिर्फ दिल्ली की चिंता हैं?
5/ 🛑 UPSRTC ने नए बसें खरीदी हैं, फिर ये बूढ़ी बसें क्यों नहीं हटाई जा रही? क्या *मरम्मत* से ये चलती रहेंगी? नहीं! 10 लाख किमी से ज़्यादा चल चुकी बसें अब *कब्रगाह* हैं, सवारी का साधन नहीं।
6/ 🌫️ हर दिन ये बसें टनों काला धुआं छोड़ती हैं, जिससे वायु गुणवत्ता (AQI) खराब होती है। छोटे बच्चे, बुज़ुर्ग और सांस के मरीज सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं। ये *चलती हुई जहरीली फैक्ट्रियां* हैं। बसों के अंदरूनी हालात और भी डरावने हैं — फर्श टूटे हुए, सीटें हिलती हुई, छत से पानी टपकता है। इन खतरनाक ढांचों में रोज़ हज़ारों यात्री बैठते हैं — क्या ये बसें यात्रा के लायक हैं या मौत के ट्रैप?
7/ ⚖️ **हम सरकार, UPSRTC और केंद्रीय परिवहन मंत्रालय से मांग करते हैं**:
👉 सभी 10 साल से पुरानी बसों को तत्काल स्क्रैप किया जाए
👉 नई इलेक्ट्रिक या BS6 बसें लायी जाएं
👉 सड़क पर मौजूद ऐसी बसों पर पाबंदी लगे
👉 हादसों में जिम्मेदारी तय हो ।
@UPSRTCHQ@myogiadityanath@MORTHIndia@uptransportdept@ZeeNews@aajtak@TimesNow@News18UP @ChiefSecy_UP @NavbharatTimes@DainikBhaskar@JagranNews@AHindinews@Live_Hindustan
@Benarasiyaa many of the houses in pantnagar are encroachments in kukrail and they also have big MS structures for hoardings / ads which is a big threat for many.This locality has thousands on illegal migrants from bangladesh.