नेताओं के बच्चे विदेशों की यूनिवर्सिटियों में पढ़ते हैं, लेकिन जनता के बच्चों को भारत की शिक्षा व्यवस्था का गुणगान सुनाया जाता है।
अगर भारत का Education System इतना ही शानदार है, तो देश चलाने वाले अपने बच्चों को यहीं क्यों नहीं पढ़ाते?
क्या उन्हें भारतीय स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों पर भरोसा नहीं?
क्या आम जनता के लिए एक सिस्टम और नेताओं के लिए दूसरा?
जिस शिक्षा व्यवस्था क��� सुधारने की ज़िम्मेदारी थी, उसी पर सबसे कम भरोसा सत्ता के गलियारों में क्यों दिखता है?
यह सिर्फ़ सवाल नहीं, करोड़ों छात्रों और अभिभावकों की आवाज़ है।
"मेरी माँ को बहुत डर था की मुझे ये सरकार जेल में डाल देगी। इस देश में उस हर माँ को ये डर होता है जब उनका बच्चा इस सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है।
कब तक हम इस सरकार से डर कर जियेंगे?"
@Cockroachisback