व्यावसायिक शिक्षकों की नई भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की रोक, e-BID और वर्क ऑर्डर पर भी लगा स्टे
जयपुर। राजस्थान में व्यावसायिक प्रशिक्षकों (VTs) की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में व्यावसायिक शिक्षकों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। पवन गर्ग एवं अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने 17 अगस्त 2026 को महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए VTPs के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित नई प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
माननीय न्यायमूर्ति अनूप कुमार सिंघी की अदालत में पेश मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि पहले से योग्य एवं कार्यरत व्यावसायिक ��िक्षकों को दरकिनार कर VTPs के माध्यम से नए व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति करना मनमाना है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय के पूर्व आदेश S.B. Civil Writ Petition No.12054/2025, गोविंद राम यादव एवं अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य का भी हवाला दिया, जिसमें व्यावसायिक शिक्षकों को सीधे संविदा आधार पर नियुक्त करने तथा VTPs के माध्यम से नियुक्ति नहीं करने संबंधी निर्देशों का उल्लेख किया गया।
याचिका में 19 ज���न 2026 को जारी e-BID (NIB:06/2026-27) तथा 1 जुलाई 2026 के Corrigendum को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान यह भी न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि उक्त प्रक्रिया के आधार पर 14 अगस्त 2026 को Work Order जारी किया जा चुका है।
e-BID और Work Order की कार्यवाही पर रोक
मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही अंतरिम आदेश में 19.06.2026 के e-BID, 01.07.2026 के Corrigendum तथा 14.08.2026 के Work Order के प्रभाव एवं संचालन पर रोक लगाई गई है।
न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि e-BID के तहत VTPs के माध्यम से व्यावसायिक शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित आगे की कार्यवाही फिलहाल स्थगित रहेगी।
हजारों व्यावसायिक शिक्षकों में उम्मीद
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षकों में नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से कार्यरत व्यावसायिक शिक्षक नई भर्ती प्रक्रिया के बजाय योग्य एव��� अनुभवी VTs को रोजगार में प्राथमिकता देने, सीधे संविदा आधार पर नियुक्ति तथा रोजगार सुरक्षा की मांग उठा रहे हैं।
व्यावसायिक शिक्षकों का कहना है कि न्यायालय के इस अंतरिम आदेश से वर्तमान विवाद में महत्वपूर्ण कानूनी पहलू सामने आया है। अब मामले की आगामी सुनवाई में सरकार एवं संबंधित विभाग को अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार VTPs के माध्यम से व्यावसायिक शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित नई प्रक्रिया पर रोक प्रभावी है।
जागो राजस्थान सरकार
#हरियाणा_मॉडल_लागू_करो
@rajeduofficial @RajCMO @RajGovOfficial @BhajanlalBjp @madandilawar
@BJP4Rajasthan व्यावसायिक शिक्षा -एक युवा को आप कितना डराओगे , एक शिक्षक को आप कितना डराओगे । जायज मांग को भी नहीं सुन रहे हो, अनुशासन में बैठ करके मांग की तो भी पुलिस से डरा करके शिक्षकों का अपमान करना यानी मोदी की कौशल शिक्षा का अपमान हैं .. लौट करके आएंगे
व्यावसायिक शिक्षा में 12वर्षों से व्याप्त कंपनियों के दीमक को रोकने के लिए आज राजस्थान हाई कोर्ट ने नई बिड पर रोक लगाई
पिछले 5 से 14माह से शिक्षकों को वेतन नहीं
21 से ज्यादा कंपनियां
कोई स्थाई पॉलिसी नहीं
शिक्षा मंत्री व विभाग शिक्षकों को अपना कर्मचारी तक नहीं मान रही @sharatjpr
राजस्थान की व्यावसायिक शिक्षा की सच्चाई- ठेका प्रथा का शासन
11 वर्षों से स्थाई जॉब पॉलिसी नहीं
5 से 14 माह हुए वेतन नहीं
पुनः बिड लाना अर्थात 2029 तक शोषण करना
21 से ज्यादा कंपनियां इनके ऊपर किसी का नियन्त्रण नहीं #हरियाणा_मॉडल_लागू_करो@pantlp@hemantkumarnews@manojpehul
व्यावसायिक शिक्षा- हरियाणा में स्थाई, राजस्थान में ठेका प्रथा के नाम पर शोषण, जिन कंपनियों ने 14 माह से वेतन नहीं दिया उन्हीं कंपनियों के लिए 33 माह के लिए बिड पुनः खोली,यह सारा खेल सुनियोजित तरीके से हो रहा हैं क्योंकि करोड़ों का खेल हैं समय रहते संज्ञान ले @BhajanlalBjp@pantlp
व्यावसायिक शिक्षा में सुधार की कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को व्यावसायिक शिक्षकों के लिए
हरियाणा मॉड��� की तर्ज पर समान वेतन एवं सुविधाएं देने तथा राजकीय सेवा में समायोजित करने की मांग की है। वैभव गहलोत
#हरियाणा_मॉडल_लागू_करो @ashokgehlot51
बाड़मेर के व्यावसायिक (वोकेशनल) शिक्षकों ने चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल को ज्ञापन सौंपकर स्थायी सेवा नीति लागू करने, लंबित वेतन का भुगतान करने तथा हरियाणा मॉडल की तर्ज पर सरकारी सेवा में समायोजन की मांग की।
शिक्षकों का कहना है कि हरियाणा और दिल्ली में समान कार्य के लिए 35 से 38 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है, जबकि राजस्थान में मात्र 19,800 रुपये मानदेय मिलता है। कई शिक्षकों का 5 से 13 माह तक का वेतन भी बकाया है। प्रदेश में 5,155 व्यावसायिक शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से अधिकांश 30 जून के बाद रोजगार संकट की आशंका जता रहे हैं।
शिक्षकों ने ठेका प्रथा समाप्त कर स्थायी नौकरी नीति लागू करने की मांग की है। इस मांग को प्रदेश के 82 से अधिक जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन प्राप्त है।
व्यावसायिक शिक्षा में 11 वर्षों से व्याप्त ठेका प्रथा को समाप्त कर स्थाई जॉब पॉलिसी के तहत आज आदरणीय आदूराम जी मेघवाल विधायक चौहटन को ज्ञापन दिया गया उन्होंने हमारी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी को लिखा पत्र धन्यवाद @AduramMeghwal01 जी
Part -4 व्यावसायिक शिक्षा
हीरालाल नागर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
ऊर्जा विभाग राजस्थान सरकार
मुख्यमंत्री जी को लिखा पत्र
व्यावसायिक प्रशिक्षकों को सीधे राज्य सरकार द्वारा नियोजित किये जाने की अनुशंषा प्रेषित है।
@hlnagar@pantlp
आज दैनिक भास्कर के मुख्य सम्पादक महोदय L P पंत सर से मुलाकात हुई, उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षको की पीड़ा सुनाई, जहां उन्होंने हमें पूर्णतया आश्वस्त किय�� कि प्रशिक्षकों की पीड़ा दैनिक भास्कर के जरिये उठाने का पूरा प्रयास करूंगा
आपका बहुत आभार @pantlp @vinodmittal9
पढ़ते है कि कंपनी शासन 15 अगस्त 1947 को खत्म हो गया था लेकिन राजस्थान में व्यावसायिक शिक्षा में आज भी व्यावसायिक शिक्षकों का शोषण करने के लिए 21 से ज्यादा कंपनियां लगा रखी हैं.बड़ी बात यह कि ये सुनते कि���ी की भी नहीं हैं अनुभव इतना की करोड़ों रुपये को मिनटों में.. @KumariDiya
निरंतर व्यावसायिक शिक्षकों की आवाज को सरकार के समक्ष रखना, बेरोजगार लोगों की आवाज उठाना दैनिक भास्कर के @pantlp सर का बहुत बहुत आभार धन्यावाद
🙏व्यावसायिक शिक्षा को ठेका मुक्त कर #हरियाणा_मॉडल_लागू_करे
👶 कौशल की ���दर करें, हुनर को महत्व दे
ये शिक्षक कौन-से राज्य में लगे हैं??
जिनका 11 वर्षों से शोषण हो रहा हैं
5 से 14 माह तक वेतन नहीं
बच्चों को रोजगार लायक बना रहे खुद संकट में हैं
@BJP4Rajasthan@hirendrakaushik