बड़ी खबर-
जो गुजरात में हुआ, वो यूपी में नहीं हुआ!
यूपी की गवर्नर आनंदी बेन पटेल का आज का बयान।
आज लखनऊ में घुमंतू समाज के विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि,
यूपी में 5 साल पहले घुमंतू समाज के लोग हमारे पास आए और बताया कि उन्हें पट्टे नहीं मिले हैं।
ख़ासकर सोनभद्र में बड़ी संख्या में पट्टा नहीं मिला था।
जबकि हमने गुजरात में घुमंतू समाज को 100% पट्टे दिए थे।
उन्होंने यह भी बताया कि वे कैसे गुजरात में ख़ुद घुमंतू समाज को पट्टे देने के कार्यक्रम की मॉनिटरिंग करती थीं,
और ये सुनिश्चित करती थीं कि सबको पट्टे मिलें और वहाँ सबको मिले भी।
गोरखपुर से लेकर लखनऊ तक गवर्नर अँधेरों में टॉर्च जला रही हैं,
भटके हुओं को रास्ता दिखा रही हैं?
आज #FCRA संशोधन बिल पर खूब चर्चा है। परंतु क्या आप जानते हैं कि 1976 में FCRA कानून क्यों बना था और बाद में इसे कमजोर किसने बनाया?
1967 में संघ की पार्टी जनसंघ और राजा जी की पार्टी स्वतंत्र पार्टी के फंड में अमेरिका खुफिया एजेंसी सीआईए ने 1 करोड़ रुपए डाले थे।
इसके बाद 1970 के दशक में जे.पी.का आंदोलन आरंभ हुआ तो इस आंदोलन में संघ के सबसे बड़े नेता नानाजी देशमुख की बड़ी भूमिका थी। उनके तीन एनजीओ में अमेरिका फंड डाल रहा था जे.पी. आंदोलन को हवा देने के लिए।
नानाजी देशमुख के इन एनजीओ पर खुफिया रिपोर्ट के सामने आने पर इंदिरा गांधी ने तत्काल यह FCRA कानून बनाया। इसकी जांच आरंभ हुई, लेकिन आपातकाल के बाद चुनाव हुआ और 90 सांसदों के साथ जनसंघ मोरारी देसाई सरकार में पार्टर बनी। फिर मोरारजी देसाई ने इन सभी जांचों को रोक दिया।
अब मोदी सरकार का दौर आया और 2016 उसके बाद 2018 में इस सरकार ने पहली बार कानून बनाकर 1976 से आए सभी विदेशी फंडिंग को जांच के दायरे से बाहर कर दिया। इससे नानाजी देशमुख के एनजीओ में आए फंडिंग की भविष्य में भी होने वाली जांच की सारी संभावनाएं ही समाप्त हो गई। यही नहीं , पहली बार कानून बनाकर पोलिटिकल पार्टियों में विदेशी फंडिंग को वैध बना दिया गया। इसके बाद 2022 आया...FCRA पर पूरा इतिहास जानने के लिए पढ़ें मेरा लेख। लिंक 👇#SandeepDeo
https://t.co/b4y0kMmFNC
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी।
याचिका कथित नकदी बरामदगी से जुड़े मामले में आपराधिक कार्रवाई की मांग को लेकर दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
गुलगुले संपादक से जुड़ी एक और ख़बर-
एथेनॉल के खिलाफ वीडियो बनाने के 'जुर्म' में करीब एक दर्ज़न एंकर्स को ऑफ एयर करने वाले,
और एक की नौकरी खा जाने वाले संपादक जी,
इस्तीफा देने के बाद से ही बेहद परेशान हैं।
अमेज़ॉन का 'No return' वाला का सामान हैं!
चैनल ने तय कर लिया है कि उन्हें नहीं रोकना है।
पूर्णाहुति की इस आग में, और घी झोंकना है।
ख़बर है कि उन्होंने चैनल के जिस इंटर्नल सिस्टम में इस्तीफा डाला था, उसे आगे प्रॉसेज कर दिया गया है।
इस बीच संपादक जी की आत्मा कह रही है कि थोड़ी तो मर्यादा रखो, मुझसे एक बार तो रूकने को कहो,
मगर चैनल इतनी जल्दबाज़ी में है कि उनकी वापसी की तमाम संभावनाओं का लवणेन भोज्यं (यानि नमक रहित भोजन) करने पर आमादा है।
रिश्तों की थाली में मिर्च बहुत ज़्यादा है!!
मगर संपादक जी फिर भी अड़े हुए हैं।
चैनल के चेहरे पर मुहासे से जड़े हुए हैं।
उनकी ख़ातिर दिल्ली से लगातार फोन घनघना रहे हैं।
कुछ कॉल तो उम्मीदों के अटलांटिक महासागर के
'एंटीलिया' तक जा रहे हैं।
संपादक जी की विदाई की ख़बर हर तरफ छप चुकी है,
करियर के माइलेज में एथेनॉल जम चुकी है!!
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी नए प्रेस नोट और आईटी नियमों में किए गए हालिया संशोधनों ने भारत के डिजिटल स्पेस में एक बड़ी हलचल पैदा कर दी है...पूरी खबर का लिंक 👇
https://t.co/1b4DMOvDnp
केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा: SC/ST में 'क्रीमी लेयर' का विरोध और आरक्षण व्यवस्था पर यक्ष प्रश्न!
केंद्र के इस हलफनामे की पृष्ठभूमि में पढ़िए कि देश की राजनीति और राजनेताओं ने आरक्षण को कैसे अपना 'पोलिटिकल धंधा' बना रखा है! लिंक 👇
https://t.co/xbP1TOdxI7
अमेरिका के दबाव में तो नहीं लगने जा रहा है UPI ट्रांजेक्शन पर शुल्क? पढ़िए वो फैक्ट जो आपसे 'दरबारी मीडिया' ने छिपाया है! लिंक 👇
https://t.co/5Lcl17QN4u
पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग के विरोध के बीच अब सरकार सीएनजी और पीएनजी में बायोगैस मिलाएगी. गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में 23,731 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना (GOBARdhan) को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य अगले 10 वर्षों में देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के उत्पादन को लगभग 10 गुना बढ़ाना है
#PMModi #Cabinetmeeting #PNG #CNG #Biogas
UPI was free by law.
Modi govt just removed that statutory guarantee.
Door now open for MDR charges.😡
Timing? Right after 🇺🇸USTR’s 2026 report slammed free UPI & RuPay for “driving out” Visa-Mastercard.
Is digital public infrastructure being diluted to please American card giants under Trump pressure?
RBI transferred ₹2.86 lakh crore surplus. A fraction could have funded UPI forever.
Dalit voice इसलिए खुश हो रहा है कि उसने गरीब दलित-आदिवासी भाइयों को आरक्षण का लाभ लेने नहीं दिया!
और कमाल देखिए इनके दिमाग का-
अपने ही गरीब दलित भाइयों का हक़ मारकर खुश हो रहा है और मुंह चिढ़ा रहा है GC को, जिनको इससे कोई फायदा ही नहीं??
गजबे है!!😂😂
#PoorSCSTvsRichSCST
मध्यप्रदेश : झूठ छुपाने के लिए बीमारी ‘फैला’ रहे... 9 आदिवासी जिलों में 74% के पास सिकल सेल कार्ड नहीं
#MadhyaPradesh#Health#Tribes
अधिक खबरें और ई-पेपर पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर एप इंस्टॉल करें - https://t.co/uXrhGptKBM
वाह मोदी जी, यह कैसा भेद भाव ?
दो लाख रुपये इनाम यदि कोई SC समाज का व्यक्ति कोई ब्राह्मण या राजपूत कन्या से विवाह करले!
यह इनाम बेचारे मुस्लिम पुरुषों को क्यूँ नहीं जो इतनी मेहनत से हिंदू लड़कियों को पटाते हैं? और अगर आराम से मानती नहीं तो बहादुरी से अगवा ही कर लेते हैं?
बहुत बड़ी ख़बर-
गोरखपुर आकर सीएम सिटी में बदहाली का ऐसा सच बता गईं गर्वनर आनंदी बेन पटेल!!
गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आईं गर्वनर आनंदी बेन पटेल ने कुछ इस अंदाज़ में बोलना शुरू किया-
"जो हमारी कमियां है, वो तो मुझे बताना ही पड़ेगा।
ये तो गोरखपुर है, जहां स्वयं हमारे मुख्यमंत्री वहां विराजमान हैं, वहां ऐसी कमियां रहेंगी तो क्या होगा?"
इसके बाद तो गर्वनर साहिबा ने जैसे पिटारा ही खोल दिया।
"बिजली, पानी, पंखे और गंदगी की समस्या से लेकर ड्रग्स व दारू तक....."
अपने भाषण में कोई भी सिरा नहीं छोड़ा।
बंजर पड़ी ज़मीन में कुछ भी हरा नहीं छोड़ा!
सोचिए, ये सीएम सिटी का हाल है,
ज़मीन पर सिस्टम पूरा ध्वस्त है,
बस भाषणों में कमाल ही कमाल है।