An agreement must be honoured. A reward system must be fair.
#5DayWeekandFairPLI
The 5 Day Work Week for bank employees was agreed in the Bipartite Settlement of March 2024. Its implementation cannot remain pending indefinitely.
At the same time, a unilateral and discriminatory PLI framework that divides the workforce must give way to a fair, transparent and inclusive system for all employees.
Every achievement of our banks is the outcome of collective effort.
Recognition too must reflect that collective contribution.
We seek no privilege, only implementation of an agreed commitment, equality in reward and dignity at work.
@PMOIndia
Working Days in Week 👇
▶️RBI- 5days
▶️DFS - 5 days
▶️LIC - 5 days
▶️CVC - 5 days
▶️SEBI - 5 days
▶️BSE- 5 days
▶️NSE- 5 days
▶️NPCI - 5 days
▶️IRDAI- 5 days
▶️Ministry - 5 days
▶️State Govt - 5 days
▶️NABARD-5 days
15 Lac Bankers still waiting!
#5DayWeekandFairPLI
India’s Bank employees seek two things rooted in fairness and dignity at work.
#5DayWeekandFairPLI
The demand for a 5 Day Work Week in banks is not new. It already stands agreed upon in the Bipartite Settlement of March 2024. What remains is its long-pending implementation.
At the same time, the unilateral and discriminatory PLI system must be abolished and replaced with a fair, transparent and inclusive framework for all employees, recognising the collective effort behind every institution’s performance.
Hardworking bank employees are not asking for privilege. They are asking for implementation of an agreement and equality in reward.
A motivated banking workforce strengthens Indian banking and the nation.
@PMOIndia
वो सफ़ेद कपड़ा लेकर गये जंतर-मंतर
हम काला कपड़ा लेकर पहुँचे ‘संसद’!
देश के बच्चों, उनके माता-पिता और उनके शुभचिंतकों के साथ-साथ विपक्ष के सांसदों के साथ जो दुर्व्यवहार हुआ है, वो अति निंदनीय है। भाजपा का अमृतकाल, उनके दु-शासन के ‘काले’ काल में बदल जाएगा। भाजपा और उनके संगी-साथियों का इतिहास कोयले तक से भी नहीं लिखा जाएगा। भाजपा के शासनकाल को इतिहास जगह ही नहीं देगा, जिससे कि कोई कभी भी पढ़कर उसका दोहराव न करे।
समझ��ता नहीं; संघर्ष होगा!
मैं अब से सिर्फ उन्हीं सवालों का जवाब दूंगी, जो जरूरी हैं। आप सब (मीडिया) वही सवाल पूछते हैं, जो सरकार आप से पुछवाना चाहती है।
• क्या आपने सरकार के मंत्रियों से सवाल पूछा?
• क्या आपने धर्मेंद्र प्रधान से पूछा कि वो इस्तीफा कब देंगे?
• छात्र आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन PM मोदी सदन में नहीं आए, क्या आपने सवाल पूछा?
• क्या आपने अमित शाह से पूछा कि छात्रों प�� लाठियां क्यों चलवाईं, बच्चे हॉस्पिटल में क्यों हैं? किसलिए... क्या ये छात्र आतंकवादी हैं?
जब आप सरकार से ये सवाल करेंगे, तब मैं आपके सवालों का जवाब दूंगी।
: कांग्रेस महासचिव एवं सांसद श्रीमती @priyankagandhi जी
मैंने भी डिम्पल यादल को इतने गुस्से में नहीं देखा। डिम्पल जो बात कह रही हैं किसी का भी सब्र जवाब दे सकता है मगर वे आपे से बाहर नहीं हैं। अपनी बात मज़बूती से रख रही हैं। एक युवा लड़की जिस भरोसे के साथ महिला सांसद से शिकायत करती है, महिला सांसद उस भरोसे को बनाए रखती हैं।
NEET है या CHEAT है?
NEET REEXAM में घपलों की ख़बरें बढ़ती जा रही हैं लेकिन भाजपा सरकार में न किसी की ज़िम्मेदारी तय की जाती है, न किसी की जवाबदेही। इस्तीफ़ा देना या दिलवाना तो असंभव बात है।
अभ्यर्थी कह रहे हैं कि कड़वा सच ये है कि भाजपा के संगठन में भी सबसे ऊपर बैठे तथाकथित नैतिक लोग अपने किसी संगी-साथी मंत्री पर दबाव बनाकर इस्तीफ़ा लेने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अपने को फँसता देख, वो मंत्री जी कहीं बाक़ी सारे भाजपाई हिस्सेदारों के घपलों का दबा-छुपा राज़ न खोल दें। यही हाल भाजपा सरकार के हर मंत्रालय का है, इसीलिए भाजपा में इस्तीफ़े नहीं होते हैं।
जनता पूछ रही है कि ‘मुख़बि��ी और लीक में कोई ऐतिहासिक संबंध होता है क्या?’
छुपे बैठे भ्रष्टाचार की काली कोठरी में
भाजपाई साझेदार हैं लूट की पोटली में
#NTA
#NEET
#NEET_REEXAM
श्री सोनम वांगचुक जी को ‘बल-प्रयोग’ करके, ज़बरदस्ती उनके आमरण अनशन स्थल से उठाकर ले जाना अत्यंत निंदनीय समाचार है। आज सुबह घटी ये घटना थोड़ी ही देर में पूरे देश और संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है। सारी दुनिया और देशभर में श्री सोनम वांगचुक जी को लेकर गहरी चिंता है और भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ आक्रोश भी। जो लोग सादी वर्दी में इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए धोखे से अच��नक घुसे थे, उनकी पहचान सार्वजनिक की जाए।
ये हमारी पुरज़ोर माँग है कि श्री सोनम वांगचुक जी की चिकित्सा ‘न्यायिक निगरानी’ में हो क्योंकि श्री सोनम वांगचुक जी का जीवन मानवता, पर्यावरण-संरक्षण, लोकतांत्रिक मूल्यों, युवा ऊर्जा की प्रेरणा, साइंस और इनोवेशन के लिए अनमोल है।
हमारे देश की जनता व समस्त विश्व इस समय भाजपा सरकार को संदेह और सवाल भरी संदिग्ध नज़र से देख रहा है। दमनकारी राजनीति करनेवाली भाजपा सरकार की इस अवांछनीय कार्रवाई ने इंटरनेशनल लेवल पर हमारे देश की मानवीय और डेमोक्रेटिक इमेज को बेहद धूमिल और खंडित करने का काम किया है।
भाजपा ने न कभी गांधी जी में विश्वास किया, न कभी उनके गांधीवादी तौर-तरीक़ों में।
भाजपा की नकारात्मक विचारधारा ही ‘विवाद’ की है; संवाद की नहीं।
भाजपा निराशा का पर्याय बन चुकी है।
भाजपा सरकार नहीं, अहंकार है!
भाजपा ���ी सोच दरारवादी है, इसीलिए जहाँ भी एकता, सौहार्द और एकजुटता होती है, भाजपा डरकर प्रतिक्रियावादी बनकर आंदोलनों को तितर-बितर कर देती है लेकिन भाजपा भूल गयी है कि आज की नई पीढ़ी ‘डिजिटल यूनिटी’ के माध्यम से वैचारिक क्रांति लाने में सक्षम है. ऐसा हुआ है, हो रहा है और होगा भी…
@Wangchuk66
बनारस की भी चर्चा कर लीजिए..
मोदी जी 7 राउंड मुझसे चुनाव हारे.. मैने उन्हें डंक��� की चोट पर हराया..!
लेकिन 1 बजे के बाद चुनाव आयोग ने वेबसाइट बंद कर दी और 3 घंटे बाद 4 बजे चुनाव आयोग कहता है मोदी जी 1 लाख 52 हज़ार से चुनाव जीत गए लेकिन भैया बीच का आंकड़ा कहां गया अजय रॉय आगे था कि मोदी जी आगे थे कुछ तो बताओ...बनारस की जनता ने उनके अश्वमेघ घोड़े को बनारस में रोक दिया था.!
अयोध्या में पहले चन्दा चोरी करते थे अब चढ़ावा चोरी करते हैं छोटे छोटे लोगों को जेल भेज दिया लेकिन चंपत राय बंसल जेल कब जाएंगे,अनिल मिश्रा कब जायेंगे,निपेंद्र मिश्रा के खिलाफ कब कार्यवाही करेंगे जो प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव थे,गोविंद गिरी, गोपाल रॉय पर कब कार्यवाही होगी।
अशोक सिंघल के समय चंदा चोरी हुआ और अब चढ़ावा चोरी हो रहा है...माताओं बहनों के आँचल का पैसा इन लोगों ने छीन लिया.!
अजय राय पीसीसी चीफ उत्तरप्रदेश
हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई. ये गलत बात है.
जो लोग नमाज पढ़ने की बात करते हैं, उन्हें मालूम होना चाहिए कि हनुमानगढ़ी का निर्माण मुस्लिम समाज ने कराया था.
-बृजभूषण शरण सिंह
बीजेपी वाले देश के लिए सफेद ��ादर का कफ़न लेकर आए हैं।
जब शांतिपूर्ण आवाज़ों को दबाया जाता है, तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं।
सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज़ दबाना, देश की आत्मा को दबाना है।