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राजस्थान में कमजोर मानसून की स्थिति अब चिंताजनक बन गई है। प्रदेश के 693 में से 246 बांध पूरी तरह सूखे पड़े हैं, सिर्फ 15 बांध ही भर पाए हैं। जयपुर-अजमेर सहित 4 जिलों की करीब 1.16 करोड़ आबादी की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध में इस बार एक इंच भी पानी नहीं आया है।
31 जुलाई तक प्रदेश में सामान्य से 11 प्रतिशत कम बारिश हुई, 23 जिलों में सूखे जैसे हालात बन चुके हैं, और मौसम विभाग ने अगस्त-सितंबर में भी राहत के कोई संकेत नहीं दिए। ऐसे संकट में सरकार को अभी से वैकल्पिक जल प्रबंधन, चारे, रोजगार और आपातकालीन इंतजामों की ठोस तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
अगर आने वाले दिनों में हालात नहीं सुधरे तो पीने के पानी और सिंचाई दोनों का संकट विकराल रूप ले सकता है। इससे फसलों की उपज पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जिसके इंतजाम अभी से करने आवश्यक हैं।
इंसान पर सबसे ज्यादा दबाव तब बढ़ता है जब एक जगह बैठने वाले खिलाफ हो जाए.....
इस इस्तीफे में चंद्रशेखर आज़ाद, हनुमान बेनीवाल जी और राजकुमार रोत जी का भी काफी योगदान है.....
@hanumanbeniwal@BhimArmyChief@roat_mla
जिस ओर भारत का भविष्य युवा करवट लेता है, उस ओर जीत इतिहास लिखती है।
ये भारत के #छात्रों_की_गूंज, उनके संघर्ष, न्याय और सत्य की जीत है! जंतर-मंतर पर पिछले 1 महीने से ज्यादा संघर्ष, लाठियां खाने, बर्बरता सहने और सड़कों पर डटे रहने वाले भारत के भविष्य युवाओं की हुंकार के आगे आखिरकार देश की बहरी मोदी सरकार को झुकना ही पड़ा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का सबूत है कि जनशक्ति के आगे तानाशाही नहीं टिक सकती। युवाओं के न्याय की इस लड़ाई में नेता विपक्ष @RahulGandhi जी ने #छात्रों_की_गूंज को सड़क से लेकर संसद तक युवाओं की आवाज बनकर जो डटकर संघर्ष किया, आज उस न्याय की भी जीत हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष @kharge जी एवं नेता विपक्ष राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी द्वारा लगातार युवा विरोधी सरकार को घेरने और सत्य के साथ खड़े करने का ही परिणाम है कि आज ये जवाबदेही तय हो पाई है।
ये जीत उन होनहार बच्चों की कीमत पर आई है, जिन्हें इस भ्रष्ट और निकम्मी व्यवस्था ने आत्महत्या करने पर मजबूर किया। पेपर लीक और टूटते सपनों के कारण जान गंवाने वाले तमाम छात्र-छात्राओं को भी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
छात्रों पर बर्बरता कराने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी देश से माफी मांगनी चाहिए। साथ ही NTA जैसी संस्थाओं में आमूल-चूल सुधार, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली एवं युवाओं पर दर्ज झूठी FIR वापस होनी चाहिए।
लेकिन ये सिर्फ शुरुआत है। देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। जिस प्रकार पहले राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ देश का सबसे कड़ा कानून बनाकर एक नजीर पेश की थी, ठीक उसी तर्ज पर पूरे देश में एक सख्त राष्ट्रीय कानून बनना बेहद जरूरी है।
युवाओं की एकता जिंदाबाद, न्याय की जीत जिंदाबाद।