प्रिय उपभोक्ता, आपकी समस्या से संबंधित शिकायत (PV30072608865) पूर्व में दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित अधिकारियों को प्रेषित की जा चुकी हैं। जल्द ही आपकी समस्या का समाधान किया जाएगा। #PVVNLHQ300726
@myogiadityanath@aksharmaBharat@UPPCLLKO "हमारा संघर्ष विभाग के विकास के लिए है, लेकिन दमनकारी और अव्यावहारिक व्यवस्था के खिलाफ है।"
@ChairmanUppcl@mduppcl जी संवाद का रास्ता चुनें और फील्ड की वास्तविकताओं को समझें। संघ अपनी जायज माँगों के लिए हर वैधानिक और लोकतांत्रिक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। @EMofficeUP
@myogiadityanath@aksharmaBharat@UPPCLLKO 📢 24×7 आकस्मिक और शिफ्ट ड्यूटी करने वाले फील्ड कर्मचारियों (लाइनमैन, टेक्नीशियन, SSO, TG-2, JE) को फेशियल अटेंडेंस की बाध्यता से मुक्त किया जाए। @UPGovt
प्रशासनिक दबाव के बजाय कर्मचारियों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति और जनसुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने दिया जाए। @CMOfficeUP
मा. @myogiadityanath जी, क्या लाइनमैन, टेक्नीशियन, SSO, TG-2 या JE पहले ऑफिस जाकर हाजिरी लगाए या सीधे दुर्घटना स्थल पर दौड़े?
मा. @aksharmaBharat जी, क्या उपभोक्ता अंधेरे में इंतजार करेगा क्योंकि कर्मचारी ऐप पर उलझा है?
@UPPCLLKO क्या जनसुरक्षा से बड़ा कोई "ऐप" हो सकता है?
निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में वाराणसी में बिजली कर्मियों की जनजागरण रैली:बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर निर्बाध विद्युत आपूर्ति की कार्ययोजना बनाने की मांग:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के विभिन्न जनपदों से आए सैकड़ों बिजली कर्मियों ने वाराणसी के भिखारीपुर स्थित पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय पर विशाल विरोध सभा एवं जनजागरण रैली आयोजित की।
सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि प्रबंधन की मनमानी नीतियों, निजीकरण की जल्दबाजी तथा लगातार बढ़ते उत्पीड़न के कारण प्रदेश की बिजली व्यवस्था गंभीर संकट की ओर बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उपभोक्ताओं के हितों की वास्तविक चिंता है, तो बिजली कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लेकर कर्मचारियों को विश्वास में लेते हुए भीषण गर्मी में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की ठोस कार्ययोजना तत्काल बनाई जाए।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण, ओबरा एवं अनपरा तापीय परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने, तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग (TBCB) के जरिए किए जा रहे निजीकरण के प्रयास न तो बिजली व्यवस्था के हित में हैं और न ही उपभोक्ताओं के।
उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा एवं आगरा में निजी कंपनियों के कार्यों को लेकर उपभोक्ताओं की लगातार मिल रही शिकायतें यह साबित करती हैं कि निजीकरण से उपभोक्ताओं की समस्याएं कम होने के बजाय बढ़ी हैं। संघर्ष समिति ने संबंधित निजी कंपनियों की जवाबदेही तय करने तथा करार उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
सभा में यह भी कहा गया कि 03 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री एवं शासन स्तर पर हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाहियां , उन पर दर्ज एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानों पर किए गए स्थानांतरण तथा अन्य दमनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए। संघर्ष समिति ने 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त करने की मांग दोहराई।
संघर्ष समिति ने कहा कि डाउनसाइजिंग एवं वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को कार्यमुक्त किया गया है, जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है। संघर्ष समिति ने सभी संविदा कर्मियों की पुनर्बहाली, दूरस्थ स्थानांतरणों की वापसी तथा बहाली के बाद भी जारी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को समाप्त करने की मांग की। साथ ही आंदोलन से जुड़े सभी एफआईआर वापस लेने, स्टेट विजिलेंस जांच समाप्त करने तथा पदाधिकारियों को लक्षित कर की जा रही कार्रवाई रोकने की भी मांग उठाई गई।
संघर्ष समिति ने मई 2025 में किए गए सेवा नियमों के संशोधन को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए कहा कि बिना जांच, बिना सुनवाई और बिना सफाई का अवसर दिए सेवा से बर्खास्त करने का प्रावधान पूरी तरह अलोकतांत्रिक एवं कर्मचारी विरोधी है। संघर्ष समिति ने फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर बड़े पैमाने पर स्थानांतरण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा बिजली कर्मियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसी कार्रवाइयों को तत्काल बंद करने की मांग की। इसके अतिरिक्त ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने पर अभियंताओं एवं जूनियर इंजीनियरों से वसूली के अवैधानिक आदेश को भी तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
संघर्ष समिति ने प्रदेश की जनता, किसानों एवं उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि सस्ती, सुलभ और विश्वसनीय बिजली व्यवस्था को बचाने का आंदोलन है। निजीकरण से जहां उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, वहीं सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही भी प्रभावित होगी। इसलिए सभी नागरिकों से इस जन-जागरण अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की गई।
संघर्ष समिति ने संकल्प व्यक्त किया कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंदोलन के दौरान भी उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रतिबद्ध है तथा निजीकरण और उत्पीड़न के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक संघर्ष निरंतर जारी रखेंगे।
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India
वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त — जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, बिजली कर्मी सड़कों पर उतरने को मजबूर:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन में लागू की गई तथाकथित वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था एवं अनुभवी संविदा कर्मियों की छटनी ने राजधानी लखनऊ सहित पूरे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। बिजली व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता के नाम पर लागू की गई यह व्यवस्था आज उपभोक्ताओं, बिजली कर्मियों और स्वयं विभागीय कार्यप्रणाली के लिए गंभीर संकट का कारण बन चुकी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहले किसी क्षेत्र की बिजली समस्या के लिए संबंधित जेई अथवा एसडीओ सीधे जिम्मेदार होते थे, जिससे उपभोक्ताओं को त्वरित समाधान मिलता था। लेकिन अब कार्यों को अलग-अलग विंगों में बाँट देने से जवाबदेही समाप्त हो गई है। उपभोक्ता यह तक नहीं समझ पा रहा कि उसकी समस्या का वास्तविक जिम्मेदार अधिकारी कौन है।
नई व्यवस्था में शिकायत निस्तारण को पूरी तरह 1912 एवं ऑनलाइन पोर्टल पर निर्भर बना दिया गया है। शिकायतें दर्ज तो हो रही हैं, लेकिन उनका समाधान समय पर नहीं हो रहा। आम जनता घंटों बिजली कटौती, गलत बिलिंग और तकनीकी समस्याओं से परेशान है जबकि जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी फाइलों और पोर्टलों के पीछे छिपे हुए हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि ग्राउंड लेवल पर समन्वय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। बिलिंग टीम अलग, मीटर टीम अलग और लाइन स्टाफ अलग होने के कारण एक छोटे से कार्य के लिए उपभोक्ताओं को कई-कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। “Faceless System” के नाम पर ऐसी व्यवस्था बना दी गई है जिसमें जनता को पता ही नहीं चल रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी कौन है।इससे उपभोक्ताओं और विभाग के बीच संवादहीनता तेजी से बढ़ी है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में नए विद्युत संयोजन समय से नहीं मिल रहे हैं, मीटर रीडिंग में भारी देरी हो रही है तथा हजारों उपभोक्ताओं के बिल समय से जनरेट नहीं हो पा रहे हैं। स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में तकनीकी खामियों, पूरी विफलता, बैलेन्स मिसमैच तथा गलत बिलिंग जैसी समस्याओं ने स्थिति को और भयावह बना दिया है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि शीर्ष प्रबंधन पूरी तरह जमीनी सच्चाइयों से कटा हुआ है और तुगलकी निर्णय थोपकर बिजली व्यवस्था को बर्बादी की ओर धकेल रहा है। प्रदेश की जनता बिजली संकट से त्राहि-त्राहि कर रही है, वहीं बिजली कर्मचारी अत्यधिक कार्यभार, संसाधनों की कमी और उत्पीड़नात्मक नीतियों के कारण मानसिक दबाव में कार्य करने को विवश हैं।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की विफल व्यवस्था को तत्काल वापस नहीं लिया गया तथा बिजली कर्मियों और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कर अभियंताओं को विश्वास में लेकर व्यावहारिक व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो प्रदेश भर के बिजली कर्मचारी व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बिजली कर्मी अब सड़कों पर उतरकर प्रबंधन की मनमानी नीतियों का लोकतांत्रिक विरोध करेंगे।
संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि बिजली व्यवस्था को बचाने, उपभोक्ताओं को राहत देने तथा ऊर्जा निगमों में जवाबदेही और समन्वय बहाल करने हेतु तत्काल हस्तक्षेप किया जाए, अन्यथा स्थिति और विस्फोटक होगी जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।
उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जन जागरण अभियान के अंतर्गत आज विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर और प्रयागराज में सभा हुई। सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम,जवाहर लाल विश्वकर्मा, प्रेम नाथ राय ने संबोधित किया।
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो रही है।
पावर कारपोरेशन के प्रबंधन के मनमानी तरीके से राजधानी लखनऊ सहित कई महानगरों में पूंजीपतियों के इशारे पर वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है जबकि सभी कर्मचारी संगठनों ने पूर्व में ही कहा था कि वर्टिकल व्यवस्था से राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर सकती है, लेकिन ऊर्जा प्रबंधन ने किसी की नहीं सुनी और इस व्यवस्था को जबरदस्ती तानाशाही पूर्वक लागू किया गया, इस व्यवस्था के लागू होते ही राजधानी लखनऊ में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया, सैकड़ो की संख्या में टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक सहित योग्य एवं प्रशिक्षित कार्मिकों को लखनऊ से बाहर फेंका गया, कई अभियंताओं को अकारण ही निलंबित किया गया, साथ ही बिजली कर्मियों पर मनमाने आदेश थोपे गए।
पहले जहां प्रत्येक फीडर पर एक गैंग हुआ करती थी राउंड द क्लॉक तीन गैंग हुआ करती थी लेकिन आज सभी फील्डरों को मिलाकर एक उपकेंद्र पर मात्र एक गैंग है पूरे प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
एक वर्ष से वार्ता नहीं, उत्पीड़न जारी — प्रबंधन की उदासीनता से बिगड़ रही बिजली व्यवस्था : संघर्ष समिति के सुझावों पर अमल होता तो उपभोक्ताओं को न झेलनी पड़ती आज की परेशानियां:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले एक वर्ष से संघर्ष समिति के साथ कोई वार्ता नहीं की गई है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों का सिलसिला लगातार जारी है। इससे कार्यस्थल का वातावरण खराब हो रहा है और बिजली व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा निरंतर कर्मचारी संगठनों से संवाद पर बल दिया जाता रहा है तथा मुख्य सचिव स्तर से भी नियमित वार्ता के निर्देश हैं। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन का यह रवैया अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और विरोधाभासी है।
संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि ठीक एक वर्ष पूर्व, 05 मई 2025 को क्रमिक अनशन के दौरान संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे की हालत अत्यंत गंभीर हो गई थी। इसके बाद प्रबंधन को वार्ता के लिए बाध्य होना पड़ा और 12 मई 2025 को विस्तृत बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में संघर्ष समिति ने बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु एक व्यापक और ठोस प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया था। उस समय अध्यक्ष द्वारा इस पर अध्ययन कर आगे वार्ता करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक उस पर कोई प्रगति नहीं हुई।
संघर्ष समिति का कहना है कि यदि उस समय प्रस्तुत सुझावों पर गंभीरता से विचार कर ठोस निर्णय लिए गए होते, तो आज उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति से संबंधित जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, वे काफी हद तक टाली जा सकती थीं।
संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि संवाद के बजाय दमनात्मक नीति अपनाकर भय का वातावरण बनाकर बिजली व्यवस्था चलाने का प्रयास किया जा रहा है, जो न तो व्यावहारिक है और न ही टिकाऊ।
संघर्ष समिति ने मांग की है कि भीषण गर्मी को देखते हुए उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्रबंधन तत्काल सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस ले तथा संघर्ष समिति के साथ सम्मानजनक और सार्थक वार्ता शुरू करे। साथ ही, पूर्व में दिए गए सुझावों के आधार पर बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।
उत्पीड़न के विरोध में 16 अप्रैल से चल रहे जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज चित्रकूट एवं बांदा में सभाएं आयोजित की गईं। इन सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों श्री जितेन्द्र सिंह गुर्जर एवं श्री महेन्द्र राय ने संबोधित किया और कर्मचारियों से एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
पनकी एवं जवाहरपुर ताप विद्युत गृहों के परिचालन एवं अनुरक्षण के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों में आक्रोश, 13 मई को काली पट्टी बांधकर विरोध का ऐलान : टेंडर हुआ तो सीधी कार्रवाई की चेतावानी:
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पनकी (660 मेगावाट) एवं जवाहरपुर (2×660 मेगावाट) ताप विद्युत गृहों के परिचालन एवं अनुरक्षण (O&M) कार्य को यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से निजी कंपनियों को सौंपे जाने के प्रस्ताव पर गहरी चिंता एवं कड़ा विरोध व्यक्त किया है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के परिचालन एवं अनुरक्षण कार्य को आउटसोर्स करने का कोई एकतरफा टेंडर किया गया तो बिजली कर्मी उसी समय कार्य स्थल से बाहर आकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे और प्रदेशव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा।
संघर्ष समिति की कोर कमेटी की 26 अप्रैल 2026 को आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि इस जनविरोधी एवं कर्मचारी-विरोधी निर्णय का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि पनकी एवं जवाहरपुर की सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित अत्याधुनिक इकाइयाँ प्रदेश की महत्वपूर्ण विद्युत परियोजनाएँ हैं, जिनके निर्माण में जनता की गाढ़ी कमाई के हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। जवाहरपुर परियोजना पर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप विद्युत गृह पर लगभग 8,000 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। ऐसे में इन परियोजनाओं के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य निजी कंपनियों को सौंपना न केवल अनुचित है, बल्कि जनहित के भी प्रतिकूल है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि इस प्रकार के निर्णय से सार्वजनिक क्षेत्र कमजोर होगा तथा निजी कंपनियों को अनुचित लाभ मिलेगा। निजीकरण से बिजली उत्पादन की लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा बोझ प्रदेश के आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
संघर्ष समिति ने प्रबंधन से मांग की है कि पनकी एवं जवाहरपुर ताप विद्युत गृहों के परिचालन एवं अनुरक्षण कार्य को आउटसोर्स करने की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए तथा इस संबंध में लिया गया निर्णय निरस्त किया जाए।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेश के सभी बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर एवं अभियंता कार्य स्थल से बाहर आकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
प्रबंधन एवं सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आगामी 13 मई 2026 को प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करेंगे। इसके उपरांत भी यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो संघर्ष समिति द्वारा प्रदेशव्यापी व्यापक आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि वह प्रदेश की बिजली व्यवस्था, कर्मचारियों के हित एवं आम जनता के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
मेरठ मुख्यालय पर बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं का जोरदार जमावड़ा : उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस न होने पर प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन की चेतावनी : पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन पर गर्मियों में बिजली व्यवस्था बिगाड़ने की नियत का आरोप:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर चल रहे प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय, मेरठ पर सैकड़ों बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं एवं संविदा कर्मियों का विशाल जमावड़ा हुआ। इस दौरान प्रदेश के अन्य जनपदों में भी निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया तथा प्रभावी विरोध सभाएं आयोजित कर कर्मचारियों ने अपना आक्रोश प्रकट किया।
सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन की “डर और दमन” की नीति की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस नहीं ली गईं, तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। उन्होंने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर गर्मियों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था बिगाड़ने की नियत का आरोप लगाते हुए कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने हाल ही में पनकी ताप बिजली घर और जवाहरपुर ताप बिजली घर के संचालन और अनुरक्षण का 25 साल के लिए निजी कंपनी को टेंडर जारी करने का फरमान निकाला है । यह सब कर्मचारियों के बीच में आंदोलन भड़काने वाला कदम है।
सभा को ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के सेक्रेटरी मुख्यालय दिल्ली के यशपाल शर्मा ने संबोधित किया। केन्द्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम, योगेन्द्र लाखा, आर सी पाल, सी पी सिंह ,एवं निखिल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण, ओबरा एवं अनपरा विद्युत परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया, गंगा कैनाल स्थित जल विद्युत परियोजनाओं को लीज पर देने तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए निजीकरण के प्रयास बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं—दोनों के हित में नहीं हैं।
वक्ताओं ने ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनियों के कार्यों तथा आगरा में टोरेंट पावर की फ्रेंचाइजी के खिलाफ उपभोक्ताओं से मिल रही लगातार शिकायतों और करार उल्लंघनों का उल्लेख करते हुए संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि 03 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री एवं शासन के साथ हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। मार्च 2023 के आंदोलन एवं सांकेतिक हड़ताल के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई दमनात्मक कार्रवाइयों—जैसे एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानांतरण एवं अनुशासनात्मक कार्यवाहियां—को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
इसके साथ ही डाउनसाइजिंग एवं वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर हटाए गए संविदा कर्मियों की पुनर्बहाली, आउटसोर्स कर्मियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित करने, निलंबित कर्मचारियों की सम्मानजनक बहाली तथा लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाहियों को समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
संघर्ष समिति ने मई 2025 में सेवा नियमों में किए गए संशोधनों को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए उनका विरोध किया और कहा कि बिना जांच, बिना सुनवाई और बिना स्पष्टीकरण का अवसर दिए सेवा समाप्ति जैसे प्रावधान पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। साथ ही फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर स्थानांतरण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर कार्रवाई तथा कर्मचारियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसी कार्यवाहियों को तत्काल बंद करने की मांग की गई।
संघर्ष समिति ने प्रदेश की जनता, किसानों एवं उपभोक्ताओं से अपील की कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि सस्ती, सुलभ और विश्वसनीय बिजली व्यवस्था को बचाने का साझा संघर्ष है। निजीकरण से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
सभा में संघर्ष समिति ने संकल्प दोहराया कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंदोलन के दौरान भी निर्बाध एवं बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे और निजीकरण एवं उत्पीड़न के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
#stop_victimization_of_uppcl_employees
@narendramodi@myogiadityanath@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews
लखनऊ में अभियंता संघ की हुई केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में निर्दोष अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में निर्णायक संघर्ष का लिया संकल्प:उत्पीड़न की कार्रवाइयों को निरस्त कराने के लिए मा मुख्यमंत्री जी से की प्रभावी हस्तक्षेप की मांग।
@ChairmanUppcl@UPPCLLKO
उत्पीड़न की कार्यवाहियां वापस न होने पर गर्मियों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की जिम्मेदारी शीर्ष प्रबंधन की:15 अप्रैल से 21 मई तक प्रदेशव्यापी “जन-जागरण अभियान” का ऐलान : सभी डिस्कॉम मुख्यालय पर प्रदर्शन:उत्पीड़न होने पर सीधी कार्रवाई की चेतावानी
@ChairmanUppcl@UPPCLLKO
आज के ही दिन 09 अप्रैल 2025 को लखनऊ की धरती ने इतिहास रचा।
बिजली के निजीकरण के खिलाफ उत्तर प्रदेश के हजारों बिजली कर्मियों की वह विशाल रैली केवल एक प्रदर्शन नहीं थी,बल्कि यह संघर्ष,एकता और आत्मसम्मान की गूंज थी।
@narendramodi@myogiadityanath@aksharmaBharat@mlkhattar@UPPCLLKO
वीसी मीटिंग में TG-2 को “दलाली करने वाला” कहना पूरे तकनीकी वर्ग का अपमान है।
जो दिन-रात विद्युत व्यवस्था संभालते हैं, उन्हें अपमानित करना स्वीकार नहीं।
सम्मान हमारा अधिकार है।
अध्यक्ष आशीष गोयल जी अपने बयान पर माफी मांगे।
#TechnicianUnity#RespectTG2@UPPCLLKO@aksharmaBharat
@rvppks_puvvnl_@UPPCLLKO@myogioffice@aksharmaBharat@ANI@RVPPKSUP अत्यंत ही निंदनीय शब्द है एक संवर्ग के लिए जो इस विभाग की रीड की हड्डी है उसे इस प्रकार अपमानित करना ठीक नहीं है उच्च स्तर पर बैठे लोग जिसको जो भी मन करेगा वही मुंह उठा कर बोल देगा यह क्या तरीका है एक बात कान खोल कर सुन लो tg2 से ही पूरा विभाग चलता है