पिछली बार बस से नहीं उतरे थे भाई साहब.. इस बार जानबूझकर प्लेन में ही डीटेन हो गए...
जब बेंगलुरु में दो दिन पहले प्रोटेस्ट खत्म हो चुका था तो आज की फ्लाइट से दिल्ली क्यों आना था...
ताकि पुलिस को पता रहे कि कब आ रहे हैं और कहां मिलेंगे...
ताकि जंतर-मंतर जाना ही ना पड़े।
झूठ फैलाओ.. पब्लिक को उकसाओ.. खुद ऐन वक्त पर कट लो.. यही इनका हिसाब है।
Hi @nilesh_pawar15 sir,
As much I understand you are the second largest unit of @aiboc_in.
What happened that day and why that decision was taken is still not clear to almost every banker.
I request u to join any banker's space & give these answers.
Bankers deserve to know.
प्रशासन स्वयं ही रैंडम बातों पर ‘ले चलो इसको SC वाला लगाओ’ कह कर कार्य करे तो समझ जाइए कि न्याय कितना हो रहा है। मोदी एक्ट पुलिस, प्रशासन और दलित के लिए धनोपार्जन का माध्यम बन गया है।
All majority unions are behind the toxic work culture in banks.
How?
If they can’t protect their members, then what is the purpose of their constitution?
अगर सरकार काम न करे,
तो क्या करोगे!
NOTA दबाओगे,
दूसरे देश चले जाओगे,
या फिर सरकार बदलोगे!
नेता मांगे पूरी नहीं करवा रहे,
तो क्या करोगे!
तो Resign करोगे,
यूनियन बदलोगे या,
फिर नेताओं को बदलोगे!
आप सब समझदार हो।
पहले जवाबदेही मांगों।
फिर अगला निर्णय लो।
बदलाव अंदर से आता है।
Stand hi to nahi liya AIBOA ne jiske bajah se hame AIBOA se Monday morning ko dis affiliate hona pada with heavy hearts .
Lok Adalat me stand nahi liya Sunday working per stand nahi liya and bina 5 days banking ke strike withdraw nahi karne ke stand per stand nahi liya .
Best of luck to my dear AIBOA in future .
We will remain AIBOA well wishers ..
But now my future journey in banking trade union will be with a new Apex body which will be by the common members for the common members and of the common members.
No rancour no I'll will for anybody least of all for dear AIBOA
If even 50,000 out of 8 lakh bankers regularly start posting on X and making videos exposing the toxic culture in banks,
and start exposing the double standards of unions,
then definitely the government, management, and toxic unions can be pushed on the backfoot.
Hello, bankers,
Let’s start an online movement to hold this man accountable. He, along with all the other leaders, must resign from their positions.
If you agree, please repost. If you disagree, please leave a heart. ❤️
Agree = Repost
Disagree = Heart
जज साहब कह रहे कि कोई ट्रैफिक चालान नहीं भर रहा तो उसके बिजली बिल में जोड़ दो..बिजली बिल तो भरबे ना करेगा..हो जाएगी वसूली..
सरकारी गाड़ी में चलने और सरकारी बंगले में रहनेवालों को ऐसे ही 'क्रांतिकारी' विचार आते हैं..
आम आदमी ऑलरेडी क्या क्या भर रहा है तुम क्या जानो रमेश बाबू
बैंक यूनियन्स को बैंकर्स का काटना ही था तो कम से कम सैटरडे को ही ये सब कर लेते।
संडे भी काम करा लिया और स्ट्राइक भी कैंसिल कर दी।
बेचारे सैटरडे की छुट्टी माँग रहे थे, यहाँ एक संडे एक्स्ट्रा काम करवा दिया यूनियन ने।
गजबे है
इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने से लेकर सरकारी योजनाएं ग्राहक को टिकाने तक,
आज की डेट में बैंक कर्मचारियों पर इतना काम लादा हुआ है कि उनपर हुए सर्वे में ज्यादातर “हाई स्ट्रेस” में होने की बात बता रहे हैं।
जिन्हें काम देने में दो मिनट नहीं लगता उन्हें दो छुट्टी देने में धरती फट जा रही है
बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कारण पूछने पर यही लगा कि जिस बैंक की नौकरी को अच्छी नौकरी में गिना जाता था, उसकी हालत बदतर हो गई है। टारगेट के नाम पर कर्मचारी देर शाम तक रोके जाते हैं, छुट्टी नहीं दी जाती है,
तनाव रोज़ का हिस्सा है। काम करने की जगह भी अच्छी नहीं है। ऐसा लगता है कि बैंकर को सज़ा दी जा रही है कि उन्होंने बैंक की नौकरी क्यों की। लोगों ने बताया कि अत्यधिक तनाव के कारण बीमारियाँ होने लगी हैं।
एक बैंकर ने यह भी बताया-
सुबह 8:00 बजे घर से निकलने वाला बैंकर रात को 8:00 या 9:00 बजे के बाद ही घर लौट पाता है, क्योंकि एनपीए (NPA - गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) को रोकने का भारी दबाव होता है। हर खाते की मंथली ईएमआई (EMI) होती है, और यदि वह 90 दिनों तक जमा न हो, तो खाता एनपीए हो जाता है। ऐसे में रीजनल ऑफिस से ब्रांच हेड पर दबाव आता है कि यह खाता आज किसी भी हाल में एनपीए नहीं होना चाहिए। पहले केवल महीने की आखिरी तारीख को एनपीए रोकने का दबाव होता था, लेकिन अब हर सिंगल डे (प्रतिदिन) यह प्रेशर रहता है।
रात के 9:00 बज रहे होते हैं और रीजनल ऑफिस से फोन आता है कि "किसी भी तरह इस खाते को बचाइए।" थक-हारकर जब ब्रांच हेड को लगता है कि उसे अब घर जाना चाहिए, तो वह अपनी जेब से 2,000, 4,000 या 10,000 रुपये तक की ईएमआई खुद भर देता है। बाद में ग्राहक वह पैसा लौटाता नहीं है, जिससे बैंक मैनेजर के अपने पैसे डूब जाते हैं।
बैंक में दिनभर कई तरह के मानसिक तनाव झेलने पड़ते हैं। आपको रिकवरी के लिए फील्ड में निकलना होता है। वहाँ कोई ग्राहक आपको ब्लैकमेल करता है कि "मेरे घर मत आओ, नहीं तो मैं पैसा जमा नहीं करूँगा, सिर्फ़ फोन पर बात करो।" फोन पर बात करने के दौरान ग्राहक कभी-कभी अभद्र और गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग करते हैं। उस तनाव में यदि मैनेजर के मुँह से गलती से भी कोई गलत बात निकल गई, तो ग्राहक उसकी कॉल रिकॉर्डिंग करके ब्लैकमेल करने लगता है।
कृपया बैंकर की बात सुनें । कोई रास्ता निकालें।
बैंक मुनाफे में चल रहे हैं लेकिन बैंक कर्मचारियों को 2दिन की छुट्टी देने में इनको मौत आने लगती है।
जबकि आप ख़ुद देखिए बैंक कर्मचारियों पर काम का कितना प्रेशर है।
अब वो हड़ताल नहीं करें तो क्या करें
@LMC_Lucknow@Sushma_Kharkwal
I have been complaining since 04.09.2026 to sewarage department regarding overflowing of sewerage waste on street, but each time complaint gets closed by uploading fake pictures.
Address - D-2/201 Vastu Khand Gomti Nagar
Contact No -9795491275
If every employee is expected to deliver on targets, why should PLI benefit only a select few?
Banking is a collective effort. Rewards should reflect collective contribution.
5-Day Banking + Fair PLI = Fairness.
#5DayWeekandFairPLI
So a lady slapped @TheOfficialSBI branch manager now.
Even flights me aise customer ko ban kar dete hai par banks me itni dum nahi hai.
No words from RBI & DFS as usual.
#KuchToBoloDFS#KuchToBoloRBI