यदि धर्म और राजनीति की मुख्य धारा से ��लग चलने का शौक है तो सबसे पहले तो निजी जीवन की बनावट और बुनावट एक होनी चाहिए और दूसरा मुख्य धारा की प्रतिनिधि भीड़ से अस्वीकृत और तिरष्कृत होने के बाद तो और भी अधिक स्वयं के भीतर साहस सहनशीलता और धैर्य पैदा करने की कुव्वत होनी चाहिए ।
प्रेमचंद लिखते हैं- साहित्य राजनीति के आगे चलने वाली मशाल है.
सच है. साहित्यकार, विचारक, कवि की संगत करता राजनेता कितना गरिमापूर्ण लगता है. ऐसा नेतृत्व ही देश को एक प्रगतिशील समाज की ओर ले जा सकता है.
ईरान की महिलाओं का सड़कों पर हिजाब लहराना याद आ गया. लाठियाँ खाती और जेल जाती तमाम महिला सत्याग्रही याद आ गयीं. तालिबा�� हो या फ़ासीवाद, लड़कर अपना हक़ लेना है. ज़िंदाबाद अफ़ग़ानी बहनों ✊🏾
इस विज्ञापन में शहर के जेंडर-फ़्रेंड्ली होने के बारे में कुछ नहीं लिखा है. क्या फ़ायदा ऐसे स्मार्ट नम्बर-1 शहर का जहाँ नौ साल की एक बच्ची को सुरक्षित, खुशहाल बचपन तक नहीं मिल सकता.
सपनों की दिल्ली बनाने में बलात्कार-मुक्त होना कोई लक्ष्य नहीं तो यह मेरा सपना नहीं.
यह महिलाओं का ऑब्जेक्टि��िकेशन है. उनकी निजता का हनन है. यह स्त्री-अस्मिता पर हमला है. हम इसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्यवाही की माँग करते हैं. #SpeakUpAgainst_SULLIDEALS
साथियों,
22 मार्च को हमारा ये प्रयास, हमारे आत्म-संयम,
देशहित में कर्तव्य पालन के संकल्प का एक प्रतीक होगा।
22 मार्च को जनता-कर्फ्यू की सफलता, इसके अनुभव, हमें आने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयार करेंगे: PM @narendramodi#IndiaFightsCorona
संभव हो तो हर व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम
10 लोगों को फोन करके कोरोना वायरस से बचाव के उपायों के साथ ही जनता-कर्फ्यू के बारे में भी बताए।
साथियों,
ये जनता कर्फ्यू एक प्रकार से हमारे लिए,
भारत के लिए एक कसौटी की तरह होगा: PM @narendramodi#IndiaFightsCorona