जयपाल सिंह मुंडा जी की जयंती पर उस दूरदर्शी आदिवासी नेता को नमन, जिन्होंने आदिवासी अस्मिता, अधिकार और स्वशासन की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया। वे केवल एक महान खिलाड़ी नहीं, बल्कि संविधान सभा में आदिवासियों की गरिमा और हक़ के सबसे मुखर प्रहरी थे।
‘आदिवासी कोई पिछड़ा नहीं, बल्कि सबसे पहले इस देश के नागरिक हैं’—यह चेतना उनके विचार और संघर्ष की धुरी थी।
जल, जंगल और ज़मीन पर आदिवासी समाज का अधिकार सुनिश्चित करना उनका सपना था।
उनका जीवन आज भी हमें न्याय, आत्मसम्मान और आदिवासी स्वशासन के लिए संघर्ष का साहस देता है।
भगवान बिरसा मुंडा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत् शत् नमन। जनजातीय समाज के हितों की रक्षा के लिए उनका समर्पण और ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध उनका संघर्ष एवं बलिदान देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
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क्रांतिवीर जननायक धरती आबा शहीद बिरसा मुंडा जी के शहादत दिवस पर शत शत नमन। आज भी आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन पर लुटेरी ताकतों का कब्जा जारी है। हम सबको धरती आबा से प्रेरणा लेकर इसे रोकना है। हम सब मिलकर अपने हक अधिकार बचाएंगे। जय भीम,जय मंडल, जय जोहार।
आदिवासी अधिकारों, जल, जंगल, भूमि के लिए लड़ने वाले महान व्यक्ति, क्रांतिकारी, योद्धा, आदिवासी धरतीआबा_बिरसामुंडा जी के शहादत दिवस पर उन्हें सादर नमन
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क्रांतिवीर, जननायक धरती आबा शहीद बिरसा मुंडा जी के शहादत दिवस पर उन्हें शत शत नमन। हम सब मिलकर जल जंगल जमीन की लड़ाई को जीत तक ले जाएंगे और इन लुटेरी ताकतों को हराएंगे।