आदिवासी कलम हूँ
जो अन्याय के विरूद्ध
और
अपने हको के लिये अपनी आवाज़ को बुलंद करता रहूंगा
( #जय_जोहार_#जय_आदिवासी)
#THE_REAL_OWNER_OF_INDIA#जल#जंगल#जमीन
आज यह खबर देखकर और सुनकर एक विचार आया जो आपके सामने रखना चाहूंगा।
एक समय था जब दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी समाज को राष्ट्रीय दलों के बड़े नेताओं को माला पहनाने तक का अवसर भी नही मिलता था। उन्हें केवल रैलियों की भीड़ और तालियां बजाने तक सीमित समझा जाता था।
आज वही साधारण आदिवासी भाई राजधानी जयपुर में आमंत्रित किए जा रहे हैं और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी द्वारा उनका माल्यार्पण किया जा रहा है।
यह परिवर्तन अपने आप नही आया है। यह उस राजनीतिक जागरूकता और आत्मसम्मान का परिणाम है, जिसे बाप पार्टी की विचारधारा ने मजबूत किया है। बाप पार्टी ने केवल दक्षिणी राजस्थान की पहचान को ही नही, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के आत्मविश्वास और राजनीतिक महत्व को भी नई पहचान दिलाने का कार्य किया है।
उसी क्रम में कमल-कांग्रेस के नेता भी बाप पार्टी का नाम लेकर अपने शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी राजनीतिक उपस्थिति के साथ नम्बर बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। यह अपने आप में एक बड़ा संकेत है कि बाप पार्टी ने प्रदेश की राजनीति में अपनी एक प्रभावशाली पहचान बनाई है।
@zeerajasthan_@ashokgehlot51@News18Rajasthan@NDTV_Rajasthan@1stIndiaNews@rpbreak
आनंदपुरी से टामटिया तक निजी स्कूल शिफ्ट करने के मामले में यदि समाचार में बताए गए तथ्य सही हैं, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
@RajCMO@MadanDilawar@DmBanswara
बांसवाड़ा सेंट पॉल स्कूल बाल वाहिनी हादसे में एक मासूम बच्चे की मृत्यु एवं आधा दर्जन बच्चों का घायल होना काफी दुःखद है।
प्रकृति दिवंगत आत्मा को शांति दें एवं घायल बच्चे जल्द स्वस्थ हो। मृतक बच्चे के परिवार साथ हर परिस्थिति में खड़े है। साथ ही प्रशासन जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्यवाही करें।
@Dmbanswara@BanswaraPolice
दाहोद जिले के आदिवासी क्षेत्रों में विकास के नाम पर लोगों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए।
छायण कचलधरा गांव के लोगों की मांगों को सुना जाए।
ग्रामसभा की सहमति के बिना कोई भी फैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा।
#दाहोद_आदिवासी_को_न्याय_दो
डूंगरपुर में भील राजा माला कटारा चौराहे का पूर्व स्थापित बोर्ड हटाना आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कार्य है।
प्रशासन तत्काल निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करे तथा मूल बोर्ड को पुनः स्थापित करवाए।।।
@DmDungarpur @DungarpurPolice @PoliceRajasthan@RajCMO
9 अगस्त 2024 को स्थापित भील राजा माला कटारा चौराहे का बोर्ड हटाना बेहद निंदनीय है। यह आदिवासी समाज की ऐतिहासिक पहचान और भावनाओं से जुड़ा विषय है।
प्रशासन तत्काल दोषियों पर कार्रवाई कर मूल बोर्ड पुनः स्थापित करवाए।
@DmDungarpur @DungarpurPolice @PoliceRajasthan@RajCMO
🌷 #भीलप्रदेश_ज्ञापन_2026 🌷
📯 17 जुलाई 1913 से मांगो को लेकर अभी तक कही बार समय समय पर ज्ञापन दिए जाह रहे हैं अब आंदोलन तेज गीत ओर बढ़ रहा है
🌾 भील समाज अलावा समाज भी समर्थन तेज तर्रार बढ़ रहा है, किसान नेता, युवानेता, हरियाणा, पंजाब, किसान भी समर्थन देने तैयार हो चुके हैं गोंडवाना प्रदेश के आदिवासी परिवार समर्थन उतरने देरी नहीं है
👉 700 से जायदा सामाजिक संगठनों ने समर्थन दिया है
आज का दिन भील आदिवासी समाज के लोकतांत्रिक संघर्ष और संवैधानिक अधिकारों की आवाज़ को नई मजबूती देने वाला ऐतिहासिक दिन है। भारत के विभिन्न राज्यों में फैले भील समाज ने एकजुट होकर महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग भीलप्रदेश के गठन को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से पुनः प्रमुखता से रखा।
इस ऐतिहासिक अभियान के अंतर्गत—
📍 गुजरात – 10 जिले, 29 तालुका ब्लॉक
📍 महाराष्ट्र – 4 जिले, 21 तालुका ब्लॉक
📍 मध्यप्रदेश – 14 जिले, 54 ब्लॉक
📍 राजस्थान – 12 जिले, 90 ब्लॉक
कुल मिलाकर 40 जिलों के 194 ब्लॉक में एक साथ ज्ञापन सौंपे गए। यह भील आदिवासी समाज की एकता, जागरूकता और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का अभूतपूर्व उदाहरण है।
भील आदिवासी समाज भारत की प्राचीन जनजातीय सभ्यताओं में से एक है। वर्षों से समाज अपने क्षेत्र के समग्र विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था की मांग उठाता रहा है। ज्ञापन अभियान इसी संवैधानिक संवाद का हिस्सा है।
हम सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं से आग्रह करते हैं कि इस व्यापक जनभावना को गंभीरता से सुना जाए और संविधान की भावना के अनुरूप इस विषय पर सकारात्मक एवं न्यायपूर्ण विचार किया जाए। लोकतंत्र में संवाद, प्रतिनिधित्व और जनसुनवाई ही सबसे बड़ी शक्ति है।
राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश सहित केंद्र सरकार से अपेक्षा है कि भील आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक चर्चा कर इस विषय पर उचित पहल की जाए। देश के आदिवासी क्षेत्रों के संतुलित विकास, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुशासन के लिए जनभावनाओं का सम्मान आवश्यक है।
भीलप्रदेश की मांग किसी टकराव की नहीं, बल्कि संविधान के दायरे में रहकर अधिकार, सम्मान, पहचान और क्षेत्रीय विकास की मांग है। यह अभियान लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले लाखों लोगों की शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति है।
हम सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और युवाओं से अपील करते हैं कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ उठाते रहें तथा संविधान और कानून के प्रति सम्मान बनाए रखें।
माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय तथा संबंधित राज्य सरकारों से विनम्र निवेदन है कि इस ज्ञापन पर सकारात्मक संज्ञान लेते हुए भील समाज के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित करें।
@PMOIndia@AmitShah@HMOIndia@MLJ_GoI@BhajanlalBjp@CMOGuj@mieknathshinde@DrMohanYadav51@BhajanlalBjp@RajCMO
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
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मानगढ़ की मिट्टी शहीदों के बलिदान की गवाह है। अब समय आ गया है अपने हक और अस्मिता की रक्षा का।। अपनी जमीन, अपना अधिकार—हमारा भील प्रदेश!
#भीलप्रदेस_संदेश_यात्रा
क्योंकि हमारी अपनी संस्कृति है।☘️
क्योंकि हमारी अपनी भाषा है।
क्योंकि हमारा अपना गौरवशाली इतिहास है।
क्योंकि हमारी समस्याएं और हमारी आवश्यकताएं अलग हैं।
क्योंकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपनी पहचान और अधिकार चाहिए।🌸☘️
#भीलप्रदेश_संदेश_यात्रा#WeDemandBhilPradesh
मानगढ़ की हवाओं में आज भी उन 1500 शहीदों की सिसकियाँ गूँजती हैं। हमारी माटी, हमारा स्वाभिमान, हमारा भील प्रदेश! चलो मानगढ़, अपनों को जगाने।
johar
#भीलप्रदेश_संदेश_यात्रा#WeDemandBhilPradesh
बीज को जितना दबाओगे, वह उतना ही बड़ा वटवृक्ष बनेगा।
भील समुदाय भी वैसा ही अटूट बीज है।
अपनी शक्ति को पहचानो, किसी साजिश के आगे मत झुको। चलो मानगढ़! ।
#भीलप्रदेस_संदेश_यात्रा
मानगढ़ की हवाओं में आज भी उन 1500 शहीदों की सिसकियाँ गूँजती हैं। हमारी माटी, हमारा स्वाभिमान, हमारा भील प्रदेश! चलो मानगढ़, अपनों को जगाने।
#भीलप्रदेश_संदेश_यात्रा#WeDemandBhilPradesh