आदतन मैं इंसानों से भी
ऐसे ही रू-ब-रू होता हूँ
जैसे किताबों से होता हूँ
जैसे पेड़ पौधों से होता हूँ
पर सिर्फ इंसानों को ऐसा लगता है कि मैं उन्हें
आकर्षित या प्रभावित करने की
कोशिश कर रहा हूँ..
"उस पार की उदासी"
"फर्क महसूस करो
वह जो बोल रहा है
और जो बताना चाहता है उसमें
वह कहने और लिखने के बीच की चुप्पी को
नहीं सुने जाने के दुःख से ग्रसित है"
- नरेश गुर्जर के 'उस पार की उदासी' से
@Nareshneel
आदतन मैं इंसानों से भी
ऐसे ही रू-ब-रू होता हूँ
जैसे किताबों से होता हूँ
जैसे पेड़ पौधों से होता हूँ
पर सिर्फ इंसानों को ऐसा लगता है कि मैं उन्हें
आकर्षित या प्रभावित करने की
कोशिश कर रहा हूँ..
"उस पार की उदासी"
इश्क़ - 352
इन सर्दियों में...
मेरे लिए बुनना तुम
एक सफेद रंग का स्वेटर
चटख लाल रंग के धागों से
बुनना उस पर
लरजते हुए
सुर्ख अधर
मेंहदी के रंग में
गूंथ देना
थोड़े से
नरम हथेलियों के स्पर्श
सुरमई रंग से बना देना
इंतज़ार में डूबी हुई
सजल आंखें
समर्पण के रंग से
रच देना तुम
अतृप्त अवस्थाओं के लिए
अटूट अलिंगन
और अंतिम बंध में
बुनना तुम
प्रीत के रंग से रंगी हुई
सतरंगी सी आत्मा
मैं बुनूंगा,
तुम्हारे लिए
एक मासूम रंग की कविता।
नरेश गुर्जर
#येइश्क़नहींआसां #संजीवपालीवाल #इश्क़ @Nareshneel@sahitya_tak
इश्क़ - 319
वहाँ...
अलग-अलग रंगों की
सजावटी फूल पत्तियों वाली
प्लास्टिक की अनगिनत झालरें लगी थी
जो दिखने में सजीव थी
और सुंदर भी
लेकिन मुझे लगा
मुझे वो अकेला खाली कोना बुला रहा है
जिस पर छितराया था कोई अनाम पर असली पेड़
अपने इक्के-दुक्के बचाए हुए हुए फूलों के साथ
और जैसे ही मैं गया उसके आकाश में
ठीक तभी उसका एक फूल टूट कर गिरा
मेरी बगल वाली खाली कुर्सी पर
मैंने उस पेड़ को देखा
फिर उस फूल को
तुम्हें याद किया
और मुस्कुराया
तुम्हारे अलावा
ऐसे टूट कर..
और कौन गिरता है भला
मुझ अकेले के लिए?
नरेश गुर्जर
#येइश्क़नहींआसां #संजीवपालीवाल #इश्क़
@sahitya_tak