आर्य बाहरी हैं, इस झूठ को प्रचारित करने वाले और उनके अनुयायी कितने धूर्त ठहरे, जो न तिलक की सुने, न गाँधी की और न ही अम्बेडकर की ? आज भी यह झूंठ चल रहा है, यह झूंठ किस नींव पर खड़ा है? सुनिए 👇
https://t.co/BUvBVrcWkp
अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद चित्रकूट की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई ।
प्रदेश उपाध्यक्ष पंडित अनिल अनिवार्य और समस्त जिला कार्यसमिति की मौजूदगी में विप्र हित चिंतन हुआ।
शामिल उनको कीजिए,निज जीवन में आप।
जिनके घर में सभ्यता, नैतिकता की छाप।।
आपके संगी साथियों के व्यवहार का असर बहुत मात्रा में आपके साथ साथ आपके बच्चों पर भी पड़ता है अतः आप अपने जीवन में ऐसे लोगों को शामिल करें जो अपनी अगली पीढ़ी में संस्कार भरने में लगे हों या इसके पक्षधर हों।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धु:
आत्मैव रिपुरात्मनः।
आत्मैव ह्यात्मन: साक्षी
कृतस्याप्यकृतस्य च।।
(महाभारत, अनुशासन पर्व - ६/२७)
प्रत्येक मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र और स्वयं ही अपना शत्रु होता है, तथा स्वयं ही अपने कर्म-अकर्म (पुण्य-पाप) का साक्षी होता है।
शामिल उनको कीजिए,निज जीवन में आप।
जिनके घर में सभ्यता, नैतिकता की छाप।।
आपके संगी साथियों के व्यवहार का असर बहुत मात्रा में आपके साथ साथ आपके बच्चों पर भी पड़ता है अतः आप अपने जीवन में ऐसे लोगों को शामिल करें जो अपनी अगली पीढ़ी में संस्कार भरने में लगे हों या इसके पक्षधर हों।