झूठ विष से ज्यादा घातक है,विष के द्वारा बचने की संभावनाएं संभव हो सकती है परंतु झूठ शरीर एवं आत्मा दोनों का नाश करता है,जो लोग सदैव आप में निष्ठा रखते हैं,उनसे झूठ बोलने का पाप कदापि ना करें,किसी को विष के समान विश्वास देना इस संसार का महा झूठ है,सत्य का अनुसरण आत्मा का मोक्ष है!
ज्ञान अति विशिष्ट होता है,ज्ञान की अपनी महत्ता है,परंतु ज्ञान के द्वारा संसार रूपी भवसागर कोई भी पार नहीं कर सका,ना ही कर सकता है, इस संसार रूपी भवसागर को पार करने के लिए प्रेम की नाव तथा विवेक की पतवार ही एकमात्र साधन है,इसीलिए प्रेम ईश्वर का प्रतिरूप, तथा हमारा मूल स्वरूप है !
जमीनी बातें हमें जमीन से जोड़ती हैं, हर रोज सड़क पर झाड़ू मारने वाली बहन सरकार की तरफ से आती हैं, हर दिन एक कूड़े का ढेर हम लोग उसके लिए लगाकर रखते हैं यदि हम जागरूकता हो तो यह ढेर कम होते-होते एक दिन समाप्त हो सकता है परंतु कूड़े का ढेर दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है #जागरूक
जब विचार शुन्य हो,चेतना अनंत, सर्वत्र प्रेम प्रवाहित हो रहा हो तथा अस्तित्व सूक्ष्म से अनंत एवं अनंत से सूक्ष्म की ओर निरंतर प्रवाह में अभिव्यक्त हो,तब निश्चित रूप से आप अस्तित्व की समीक्षा के केंद्र बिंदु में ईश्वर के परिमाण को जी रहे होते हैं,यही आपके होने की अनुभूति #अस्तित्व
हम जो भी हैं अपने खून की वजह से, हमारे खून में वफा और दगा इसी में बहती है,यदि आपका खून खानदानी है तो आप एक पल के एहसान को चुकाने के लिए एक जीवन तक लगा सकते हैं,यदि खून खानदानी नहीं है तो किसी का पूरा जीवन आपके लिए लग गया हो आप उसे एक पल भी नहीं दे सकते,यही है हमारे खून के संस्कार
इस धरती पर हमारा जन्म हमारे लिए इस अखिल ब्रह्मांड का सबसे बड़ा उत्सव है तथा जन्म के साथ मृत्यु सुनिश्चित है परंतु मृत्यु भी अलग-अलग अर्थों में अलग-अलग महत्व रखती है,मृत्यु भी जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि हो सकती है यदि यह राष्ट्र हित में हो,दूसरों के कल्याण हेतु,सभी कष्टों से मुक्त
जन्म देखने में शरीर का होता है परंतु अतृप्त इच्छाएं बार-बार जन्म लेती हैं,मृत्यु,शरीर के साथ-साथ कुछ लोगों में इच्छाओं की भी हो जाती है, ऐसी स्थिति ही मुक्ति का कारक है परंतु इच्छाएं जो स्थाई रूप से संस्कार के रूप में चेतन में विद्यमान है,उनके लिए बार-बार जन्म होगा,यही जीवन चक्र
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने कई कहानियां लिखीं, लेकिन गुस्कारा इलाके की कलिता मांझी की सफलता सबसे प्रेरणादायक है।
एक साधारण घरेलू नौकरानी से भाजपा की विधायक बनने वाली कलिता ने गरीबी, संघर्ष और सामाजिक रुकावटों को पार करते हुए न केवल चुनाव जीता बल्कि लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बन गईं।2006 में एक प्लंबर से शादी के बाद कलिता मांझी गुस्कारा में दो घरों में काम करती रहीं। महीने के 4500 रुपये कमाकर परिवार चलाती थीं। घर-गृहस्थी, बच्चों की देखभाल और पार्टी के काम के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था। फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों से प्रेरित होकर वे भाजपा की हर रैलियों में शामिल होती रहीं।
चुनाव जीतने के बाद सोमवार देर रात जब वे घर पहुंचीं तो कोई भव्य स्वागत या दावत नहीं थी। थकी-भूखी कलिता ने सास के हाथों बना आलू-पटोलर और झोल खाया। मंगलवार को वे सामान्य दिन की तरह कपड़े धोने और घरेलू कामों में लगी रहीं।
विधायक बनने के बावजूद वे अपनी जड़ों को नहीं भूली हैं। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 'मैं गरीबों, खासकर मेरी तरह की महिलाओं के लिए काम करना चाहती हूं।भाजपा महिलाओं और गरीबों का उत्थान करती है।' अभय कांड के विरोध में भी उन्होंने आवाज उठाई थी। नगर निगम या स्थानीय स्तर पर काम करते हुए कलिता ने लोगों के बीच अपनी अलग छवि बनाई।
कालिता आगे कहती हैं कि वह अपने पति और बेटे को कोलकाता में शपथ ग्रहण समारोह में ले जाने का प्लान कर रहीं हैं, लेकिन उनके पास इस मौके के लिए कोई सुंदर साड़ी नहीं है. मांझी की इस सादगी को देखते हुए उनके मालिक कृष्णा पात्रा ने उन्हें साड़ी उपहार में देने का फैसला किया है।
कालिता मांझी ने श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराकर शानदार जीत दर्ज की। मांझी को 1,07,692 वोट मिले। उनकी यह जीत भाजपा के लिए व्यापक जनादेश के साथ आई है, जिसने राज्य में सत्ता पर कब्जा कर लिया है।
इस जीत ने राज्य में हो रहे बड़े राजनीतिक परिवर्तन के बीच भाजपा की जमीनी स्तर के उम्मीदवारों को प्रोत्साहन देने की रणनीति को मजबूती से रेखांकित किया है।
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इस दुनिया को समझने के लिए होश में रहकर मदहोश को समझना बहुत जरूरी है,होश और मदहोश के बीच की कड़ी में बहुत सूक्ष्म अंतर है,होश में रहने के लिए सदैव जागृत रहना होगा तथा जिस भी क्षण जागृत अवस्था का क्षय हुआ,तत्क्षण यह संसार मदहोश है,कोई काम में,कोई क्रोध में ,कोई लोभ में,कोई मोह में!
विचार भी भारी एवं हल्के होते हैं, कभी-कभी विचार पृथ्वी से भी भारी हो सकता है तथा कभी-कभी विचार आकाश से भी हल्का,जिन विचारों में चैतन्यता,विस्तार,जागृति,समन्वय एवं प्रेम की भावना होगी,वह विचार आपको शीर्ष पर लेकर जाएंग,परंतु जिन विचारों में अहंकार का पोषण एवं अडिगता,वह धरती सेभारी
आपको जब भी समय मिले अपना तुलनात्मक अध्ययन अवश्य किया करें,तुलना सिर्फ मनुष्य से नहीं अपितु चराचर जगत के सभी जीवो के साथ ही की जा सकती है,अनेक पशु योनियों की चेतना को जीने के बाद कहीं जाकर मनुष्य योनि का शरीर मिला,यह अनंत संभावनाओं का शरीर है,सत्य एवं असत्य दोनों ही बीज की चेतना!
Gen Z क्रांति के बाद नेपाल में हिंदुत्व का 'सूर्यतिलक'
नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह का शपथ ग्रहण समारोह रामनवमी के दिन हिंदू वैदिक परंपराओं के साथ आयोजित हुआ, जो नेपाल-भारत के सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करता है.
पूरी खबर : https://t.co/RepxI68hNr
#Nepal #BalendraShah | @vikas_man7
जन्म आधे भरे हुए गिलास से शुरू होता है,कुछ का शेष जीवन अधूरे गिलास को पूरा भरने में लग जाता है तथा कुछ ईश्वर के द्वारा दिया गया भरे आधा गिलास को उत्सव के रूप में मनाने में,जीवन का समय निर्धारित है,भरा गिलास तथा अधूरा गिलास दोनों की गति एक ही है,फर्क सिर्फ और सिर्फ दृष्टिकोण का !
'होर्मुज पर कोई कब्जा नहीं कर सकता', नरेंद्र मोदी-डोनाल्ट्रंड ट्रंप के बीच क्या हुई बात, अमेरिकी राजदूत ने बताया
अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फोन कॉल को लेकर इंडिया टुडे से एक्सक्लूसिव बातचीत की. सर्जियो गोर ने बताया कि मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर बात हुई. इस बातचीत में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई.
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संसार में यदि आप सुगंध फैलाना चाहते हैं तो आपको फूलों के बाग लगाने होंगे,संसार की गंदगी को साफ करने में पूरा जीवन निकल जाएगा परंतु आप सुगंध से अछूते रहेंगे, संसार में गंदगी फैलाने वालों की कोई कमी नहीं,इसीलिए आप सुगंध का चयन कर अपने आसपास फूलों के बाग लगाए,ताकि परिवेश सुगंधित हो!
ईरान के धर्मगुरु की मौत से यह सिद्ध हो गयाकी आप मात्र व्यक्तित्व नहीं अपितु एक घनित विचार हैं,शरीर की मृत्यु संभव है परंतु विचार की मृत्यु हर व्यक्तित्व के अस्तित्व में एक गहन विचार है,इसीलिए दुनिया की सर्वशक्तिशाली प्रणाली स्वयं को असुरक्षित महसूस करने लगी,क्योंकि विचार परमबल है
आपकी वफादारी ही आपके व्यक्तित्व का मूल्यांकन है,जो लोग खरीद लिए जाते हैं या जिनका व्यक्तित्व बिकाऊ है,ऐसे लोग बिकाऊ माने जाते है,जिन्हें पूरी दुनिया की संपदा खरीद ना सके,जिनका कोई मोल ना हो,वह हमेशा अनमोल है,इसीलिए वफादारी महंगे लोगों का शौक है,इसे हमेशा जिंदा रखिए,वफ़ा ख़ुदा है
आपको स्वयं को स्वयं के अनुरूप होने के लिए कई बाहर बहुत मेहनत करनी पड़ती है,कई बार आप मेहनत के उपरांत भी स्वयं के अनुरूप नहीं हो पाए,इसलिए दूसरों से स्वयं के अनुरूप अपेक्षा पूर्णता निरर्थक है क्योंकि अपेक्षा की अनुपस्थित गहरे विषाद को जन्म देती है,यही जीवन की ऋणात्मक का कारक है !
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार अपनी बात रखी. शुक्रवार को विधानसभा में बोलते हुए उन्होंने परंपरा, मर्यादा और कानून व्यवस्था को लेकर साफ संदेश दिया. उन्होंने कहा कि आदि जगद्गुरु शंकराचार्य ने अनिवार्य किया है. जिस पीठ के लिए जो योग्य पात्र होगा, उसका मंत्र, उसका भाष्य, आज की भाषा में आप कह सकते हैं थीसिस, विद्वत परिषद द्वारा अनुमोदित होता है. उसके बाद अभिषेक और फिर उस परंपरा द्वारा उसे मान्यता दी जाती है. हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं बन सकता. हर व्यक्ति हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर यहां-वहां वातावरण खराब नहीं कर सकता. उन मर्यादाओं का पालन सबको करना होगा.
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सार्थक एवं सकारात्मक विचार पुष्प की सुगंध की तरह है वही निरर्थक एवं नकारात्मक विचार कूड़े का ढेर है, जिसकी दुर्गंध आपको तथा दूसरों को व्यतीत करती है अपने विचारों में सदैव सकारात्मक का पोषण दें तभी आपके व्यक्तित्व की सुगंध पूरे परिवेश को गुलिस्ता बना देगी सदैव अच्छा सोचें! #चिंतन