ज्ञानवापी मंदिर तोड़ने का फरमान औरंगज़ेब ने जारी किया था
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पर आप जानते हैं - क्यों?
कच्छ की महारानी के साथ मंदिर के महन्त ने बलात्कार की कोशिश की थी
मंदिर के तहखाने में अनेक औरतें और लाशें बंद पाई गई थीं
मंदिर तोड़ने से पहले औरंगज़ेब ने महारानी से पूछा था कि क्या करना है
महारानी ने जब तोड़ने की अनुमति दी तब फरमान जारी हुआ था
देखिए
इतिहासकार बी द्वारा एन पांडेय के अनुसार: कच्छ की 8 रानियां बनारस शहर में काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए गईं, जिनमें से सुंदर रानी का ब्राह्मण महंतों द्वारा अपहरण कर लिया गया।
कच्छ के राजा द्वारा औरंगजेब को इसकी सूचना दी गई, जिन्होंने कहा कि यह उनका धार्मिक व व्यक्तिगत मामला है।वह उनके आपसी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते, लेकिन जब कच्छ के राजा ने शिकायत की, तो औरंगजेब ने सच्चाई का पता लगाने के लिए कुछ हिंदू सैनिकों को भेजा, लेकिन महंत के लोगों ने औरंगजेब के सैनिकों को मार डाला, डांटा और भगा दिया।
जब औरंगजेब को इस बात का पता चला तो उसने स्थिति का जायजा लेने के लिए कुछ विशेषज्ञ सैनिकों को भेजा, लेकिन मंदिर के पुजारियों ने उनका विरोध किया। मुगल सेना भी लड़ाई में आ गई, मुगल सैनिक और महंत मंदिर के अंदर फंस गए और युद्ध में मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया।तीसरे दिन सैनिकों को सुरंग में प्रवेश करने में सफलता मिली और वहां हड्डियों की कई संरचनाएं मिलीं। जो केवल महिलाओं के थे।
सैनिकों ने मंदिर में प्रवेश किया और लापता रानी की तलाश शुरू कर दी।
इस संबंध में, मुख्य मूर्ति (देवता) के पीछे एक गुप्त सुरंग की खोज की गई थी जो बहुत जहरीली गंध छोड़ रही थी। दो दिन तक दवा छिड़ककर बदबू दूर करने की कोशिश करते रहे और सैनिक देखते रहे।
कच्छ की लापता रानी का शव भी उसी स्थान पर पड़ा हुआ था, उसके शरीर पर एक कपड़ा भी नहीं था। मंदिर के मुख्य महंत को गिरफ्तार कर लिया गया और कड़ी सजा दी गई।
ज्ञानवापी मस्जिद कच्छ के राजा रायधनजी के कहने पर महारानी ज्ञानव्याप्तिदेवी नाम पर मंदिर गिराकर बगल में औरंगजेब ने बनवाई।
(बी. एन. पाण्डेय, खुदाबख्श मेमोरियल एनविल लेक्चर्स, पटना, 1986 द्वारा उद्धृत। ओम प्रकाश प्रसाद: औरंगज़ेब एक नई दृष्टि, पृष्ठ 20, 21
कच्छ राज्य के दस्तावेज, कच्छ संग्रहालय, गुजरात)
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औरंगजेब खलनायक था. औरंगजेब नालायक था. औरंगजेब इतना नालायक था की उसने अपने बेटे आज़म शाह को स्थानीय भाषा और हिन्दी सीखने के लिए प्रेरित किया.
1600वीं सदी में हिन्दी आज की तरह विकसित नही थी. हिन्दी थी ही नही, ना लिखने वाला ना बोलने वाला.
मुगल दरबार से लेकर पेशवाओं के दरबार तक कि प्रशासनिक भाषा फारसी थी. खलनायक औरंगजेब चाहता था फारसी जानने वाले हिन्दी सीखें ताकि कामकाज आसान हो.
कबीर अवधी और ब्रिज भाषा में लिख रहे हैं. तुलसीदास भी अवधी और अन्य बोलियों के शब्दों में लिख रहे हैं.
नालायक औरंगजेब के कहने पर हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए मिर्ज़ा फखरुद्दीन मोहम्मद ने "तोहफतुल हिन्द" नाम की डिक्शनरी बनाई.
खलनायक औरंगजेब ने हिन्दू को बढ़ावा देने की नींव रखी. बड़ा नालायक आदमी था अच्छा काम करके चला गया और श्रेय भी नही लिया.
इतना नालायक आदमी था कि अपने दरबार में सबसे अधिक अगड़ी जातियों के अधिकारियों को रखा था.
खलनायक औरंगजेब नालायक औरंगजेब कहने वालों के पूर्वज मुग़ल दरबार में बादशाह जिंदाबाद के नारे लगाते थे.
As the blessed month of Ramadan begins, may this holy month bring peace, joy, and countless blessings to you and your family. Wishing you and your family a blessed Ramadan.
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ముస్లిం సోదరులకు రంజాన్ నెల ప్రారంభం సందర్భంగా శుభాకాంక్షలు. నెల రోజుల పాటు కఠోర ఉపవాస దీక్షలతో మీరు చేసే ప్రార్థనలు ఫలించాలని.. ఆ అల్లా దయతో అందరికీ మంచి జరగాలని కోరుకుంటున్నాను.
#Ramadan2025
Allah Ta'la ne ek or Mauka diya he apne Gunaho ki Makshish ka or Nekiyo ka Badhane ka.
Sabko #RamadanKareem ki bahot bahot kher Mubarak.
Allah hamare Nek aamal Qabul kare or Gunaho se Hifazat kare.
Sab Hame apni Duao main Yaad rakhiyega.
#Ramadan
As Ramazan begins, may we embrace this sacred month of blessings with prayer, forgiveness, and a renewed commitment to serving others.
Let us strive to spread compassion, peace, and amity throughout our communities.
Ramazan Mubarak!