दो बच्चों की माँ बनने के बावजूद उसने अपनी मर्ज़ी से पति-बच्चों को छोड़ दिया
इंस्टाग्राम पर मिले “सच्चे प्यार” के पीछे भाग गई।
दो साल बाद सीन एकदम उल्टा!
अब वही औरत आँसू बहा-बहाकर वीडियो बना रही है
ये आदमी नशे में घर आता है, गालियाँ देता है, और कहता है कि जा अपने पति-बच्चों के पास!
अब उसे लग रहा है कि ये तो धोखा दे रहा है।
डर भी है कि “अगर मेरे साथ कुछ हो गया तो इसकी ज़िम्मेदारी इसी की होगी।
बच्चों और पति की याद आ रही है, वापस जाना भी चाहती है
लेकिन शर्म इतनी कि कैसे मुँह दिखाऊँ
खुद ही मान रही है
ससुराल वाले अच्छे थे मेरी सारी मुसीबतें तब शुरू हुईं जब मैंने ये रिश्ता चुना।
दोस्तों
कई बार गलत फैसला और अवैध रिश्ता सिर्फ खुद को नहीं, पूरे परिवार को जलाकर रख देता है।
और समय आकर सबका हिसाब चुकाता है… अक्सर बहुत बुरी तरह।
एक आदमी ₹80 लाख का फ्लैट खरीदने की तैयारी कर रहा था।
बिल्डर बार-बार कह रहा था, "सर, आज ही बुकिंग कर दीजिए।"
लेकिन खरीदार ने कहा, "पहले एक बारिश होने दीजिए, फिर फैसला करूंगा।"
बिल्डर ने पूछा, "बारिश का प्रॉपर्टी से क्या लेना-देना?"
खरीदार मुस्कुराकर बोला, "यही तो सबसे बड़ा टेस्ट होता है।"
बारिश शुरू हुई, तो वह सीधे प्रोजेक्ट साइट पर पहुंच गया। कुछ ही मिनटों में उसे पता चल गया कि कहां सड़क पर पानी भरता है कहां ड्रेनेज जाम है और कहां ट्रैफिक रेंगने लगता है। उसने बेसमेंट भी देखा।
अगर वहां पानी भर जाए, तो बाद में वॉटरप्रूफिंग और रिपेयर पर ₹50,000 से ₹2 लाख तक खर्च आ सकता है।अगर सोसायटी का ड्रेनेज सही न हो तो हर साल मेंटिनेंस के नाम पर हजारों रुपये अतिरिक्त देने पड़ सकते हैं।
और अगर रोज़ 20-30 मिनट ट्रैफिक में फंसना पड़े, तो सालभर में करीब 150-180 घंटे सिर्फ सड़क पर ही निकल सकते हैं।
खरीदार बोला "₹80 लाख या ₹1 करोड़ लगाने से पहले एक बारिश का इंतजार करना कोई महंगा सौदा नहीं है।"
उसे लगा कि एक दिन की जांच, भविष्य के लाखों रुपये और कई साल की परेशानी बचा सकती है।
खरीदार की समझदारी से मैं तो सहमत हूं पर क्या आप भी सहमत हैं??
कल एक युवक अपने बच्चों के लिए नमकीन खरीदने एक दुकान पर गया था।
नमकीन लेने के बाद उसने पैकेट पर लिखी एक्सपायरी डेट देखी जो 23 दिन पहले ही खत्म हो चुकी थी।
वह तुरंत दुकानदार के पास पहुंचा और इसकी शिकायत की दुकानदार बोला नमकीन की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती है इसे खा...Open news
वाह रे इंदौर की नकली प्लास्टर वाली पुलिस...
इंदौर में दो अपराधियों को किसी संगीन जुर्म में पकड़ा गया. जनता की मांग थी कि इनकी पिटाई की जाए और पब्लिक जुलूस निकाला जाए.
पुलिस और अपराधियों के बीच 20,000 रुपए में सौदा तय हुआ. दोनों अपराधियों के हाथ में नकली प्लास्टर लगा कर लंगड़ाते हुए सड़क पर घुमाया गया. जेल के अंदर ले जाने समय, जेल के गेट पर दोनों अपराधियों ने अपने हाथों में लगी फर्जी पट्टी उतार फेंकी.
किसी ने वीडियो बना लिया इसका. अब इंदौर पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है.
खान साहब ने भारतीय मीडिया की जमकर आलोचना की
"अगर होर्मुज जलडमरूमध्य 10 दिनों के लिए बंद हो जाए, तो भारतीय मीडिया आपको लकड़ी पर खाना पकाने के फायदे गिनाने पर मजबूर कर देगा।"
दरअसल, सुधीर चौधरी सबसे पहले आपको लकड़ी पर खाना पकाने के फायदे बताएंगे।
UPS की अंतिम तिथि हुई अब 30नवम्बर
यह तो पहले से ही तय था कि UPS के विकल्प का चयन करने की तिथि बढ़ेगी ही बढ़ेगी। अंतिम तिथि बढ़ने से यूनिफाइड पेंशन स्कीम के प्रति लोगों की दिलचस्पी नहीं बढ़ेगी।
आप लोग साथ दीजिए OPS जरूर लागू होगी।
#OPS_लागू_करो#OPSFORCAPF
#No_Nps_No_Ups_Only_Ops
#NoNPS_NoUPS_OnlyOPS
#ups #upsdatetxtended
तैयार हो जाओ साथियों
संगठन का कार्यक्रम जारी हो गया है अपनी तैयारी सभी कार्यक्रमों के लिए शुरू कर दें
अपनी जोरदार उपस्थिति से सोशल मीडिया हो और चाहे मैदान हो सभी जगह दिखाएं
नौकरी की सुरक्षा के लिए, पुरानी पेंशन बहाली के लिए व निजीकरण की समाप्ति के लिए मिलकर के एक ऐतिहासिक कार्यक्रम के साक्षी बने.।
#vijaykumarbandhu
#अटेवाNmops
"कर्मचारियों की मांग सिर्फ़ और सिर्फ़ पुरानी पेंशन योजना (OPS) की है। सरकार जबरदस्ती यूपीएस और एनपीएस थोप रही है, जो कर्मचारियों के हित में नहीं।" - भूपेंद्र सिंह हुड्डा
आखिर कब तक सरकार नजरअंदाज करके चलेगी?
#OPS#OPS_पुरानी_पेंशन#OpsIsOurRight#OPSForCAPF
बिना हेलमेट पर बर्बरता! शर्मसार
साहब... लाठी तो ऐसे भांज रहे हैं मानो बिना हेलमेट का चालक नहीं, कोई बहुत बड़ा हिस्ट्रीशीटर पकड़ लिया हो
बिना हेलमेट होने पर: चालान हो सकता है, गाड़ी सीज़ हो सकती है लेकिन लाठी चलाना कहाँ का कानून है ?
ये साहब रिटायर्ड आर्मी अधिकारी हैं, और इनके राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान देखते ही बनता है, राष्ट्रीय ध्वज में दारू और चखना लपेट कर ले जा रहे हैं, आइए इन्हें फेमस करते हैं
ये हैं शिलांग के SP सिटी. एबीपी न्यूज से बातचीत में केस सॉल्व करने की पूरी कहानी बता रहे हैं.
मेघालय छोटा राज्य है. 29,00,000 आबादी है वाले इस राज्य में पुलिस संख्याबल 11,000 के करीब है.
सोनम के पिता और भाई ने मेघालय को बदनाम कर दिया. पुलिस और सरकार पर ठीक से जांच नही करने के आरोप लगाए.
लेकिन मेघालय पुलिस साइलेंट तरीके से मेहनत कर रही थी. 50 किलोमीटर एरिया के सभी सीसीटीवी फुटेज को खंगाला.
जिस भी सीसीटीवी फुटेज में राजा और सोनम दिख रहे थे उनके आसपास तीन लड़के नजर आ रहे थे. पुलिस ने एरिया के सभी एक्टिव नंबरों की जांच की.
तीन नंम्बर इंदौर में एक्टिव निकले. इंदौर में सुपारी किलर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मुख्य आरोपी राज कुशवाहा तक पहुंची. फिर सोनम को लगा अब छुपकर काम नही चलेगा. इसलिए सामने आकर नया ड्रामा उसने क्रिएट किया.
हमारे संविधान निर्माता और संविधान सभा के सदस्य उसी समय चाहते थे की पंचायती राज व्यस्त लागू हो और गांधी किंगडम स्वराज की अवधारणा है उससे गाव सत्ता के महत्वपूर्ण केंद्र हो जाएँगे और विकास तेजी से होगा ।
लेकिन यह प्रस्ताव रखने वाले शंकर राव देव जी से अंबेडकर संविधान सभा में भीड़ गए और उस बैठक का बहिष्कार करके बाहर निकल गए , अंबेडकर कहते थे “गाव को किसी भी कीमत पर स्वतंत्र सत्ता नहीं करना चाहिए नहीं तो दलितों का शोषण और बढ़ जाएगा वैसे ही आज गांव शोषण और सामाजिक बुराई के केंद्र हैं ।”
अंबेडकर पर अंग्रेजियत इतनी हावी थी की जब पुरुषोत्तम दास टंडन ने भारतीय राष्ट्र भाषा के रूप में “हिंदी” का प्रस्ताव रखा तो अंबेडकर ने उसका घोर विरोध किया और कहा की भारत में संविधान और विधि की भाषा अंग्रेजी ही होनी चाहिए ।
अंबेडकर आदिवासियों जो आज शेड्यूलर ट्राइव हैं को अलग आरक्षण देने के खिलाफ थे वो कहते थे की आदिवासियों में से कुछ ट्राइव जो अछूत हैं उन्हें महारों, चमारों और जाटवों में सम्मिलित कर के आरक्षण देना चाहिए ।
लेकिन जयपाल सिंह मुंडा जी आदिवासी प्रतिनिधि थे वो दलितों के साथ नहीं जाना चाहते थे वो आदिवासियों को उनकी अलग सांस्कृतिक पहचान चाहते थे और अंत में जयपाल मुंडा के प्रयास से आदिवासियों को शेड्यूल ट्राइव (एसटी) के रूप अलग अनुक्षेद 332 में अनुसूचित जन जातियों को अलग आरक्षण प्राप्त हुआ ।
आपको बता दे कि जब जयपाल सिंह मुंडा ने इस बात का प्रस्ताव रखा तो अंबेडकर ने कहा आदिवासी अछूत नहीं बल्कि हिंदू धर्म में पवित्र हैं इस लिए उनको अलग आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए और इसका उन्होंने बहिष्कार किया फिर यह प्रस्ताव संविधान सभा ने पारित किया और आदिवासियों को अलग सांस्कृतिक पहचान मिली ।
कल के लेख में हमने आपको प्रमाण सहित बताया था कि अंबेडकर ने धोबी , नाई ,खटिक , पासी , वाल्मीकि , मतंग आदि दलितों को शेड्यूल कास्ट में सम्मिलित करने का विरोध किया था और 1936 की शेड्यूल कास्ट ऑर्डर में से इनका नाम हटा दिया था लेकिन गांधी जी और जगजीवन राम जी के प्रयास से इन जातियों को शेड्यूल कास्ट की सूची में सम्मिलित किया गया था ।
आज के लेख में हमने बताया कि किस प्रकार अंबेडकर ने पूरी कोशिश की कि शेड्यूल ट्राइब का उपबंध संविधान में अलग से ना हो इस लिए की आदिवासी शोषित नहीं हैं लेकिन जयपाल सिंह मुंडा , नेहरू , पटेल आदि लोगो के प्रयास से शेड्यूल ट्राइव एसटी का उपबंध संविधान में सम्मिलित हुआ ।
इस लिए मैं कहता हूँ अंबेडकर सिर्फ महारों के नेता थे देश के नहीं ।
#संविधान_निर्माता_BN_राव