पटना में हुए नीट छात्रा प्रकरण को लेकर जिस तरह से एक विशेष वर्ग द्वारा डॉ. प्रभात मेमोरियल हिरामती हॉस्पिटल को निशाना बनाया गया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। केवल इस आधार पर कि अस्पताल के संचालक क्षत्रिय समाज से हैं, उन पर अनर्गल आरोप लगाए गए, यह न केवल गलत है बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी हानिकारक है।
सच्चाई यह है कि जब मुश्किल समय में कई सरकारी अस्पतालों ने मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया था, तब इसी अस्पताल ने आगे आकर मानवता का परिचय दिया और मरीज की मदद की। लेकिन दुर्भाग्यवश, झूठे आरोपों और मीडिया ट्रायल के कारण अस्पताल की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा।
अब जबकि सरकारी जांच में अस्पताल को पूरी तरह निर्दोष पाया गया है, तब यह हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि सच्चाई का समर्थन करें और ऐसे संस्थानों के साथ खड़े हों, जो कठिन समय में लोगों की सेवा करते हैं।
आइए, हम सब मिलकर इस अस्पताल का समर्थन करें, ताकि इसका विश्वास और प्रतिष्ठा फिर से पहले जैसी स्थापित हो सके।
आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत को चुनौती देने का साहस रखने वाले महान गणितज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
बिहार के भोजपुर जिले के बसंतपुर गाँव में 2 अप्रैल 1942 को जन्मे डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह बचपन से ही अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। उनकी मेधा इतनी विलक्षण थी कि उन्होंने बेहद कम उम्र में ही उच्च गणित में महारत हासिल कर ली। आगे चलकर उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित University of California, Berkeley से गणित में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और वहां के शोध कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉ सिंह का नाम खास तौर पर Theory of Relativity पर अपने वैकल्पिक विचारों और शोध के कारण चर्चा में रहा। कहा जाता है कि उन्होंने जटिल गणितीय सिद्धांतों को चुनौती देने और उन्हें नए दृष्टिकोण से देखने का साहस दिखाया। उनकी असाधारण गणना क्षमता और तेज दिमाग के कई किस्से आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।
भारत लौटने के बाद उन्होंने Indian Institute of Technology Kanpur, Indian Institute of Technology Bombay और Indian Statistical Institute जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
हालांकि, जीवन के एक दौर में वे गंभीर मानसिक बीमारी Schizophrenia से भी जूझते रहे, जिसके कारण उनका करियर प्रभावित हुआ। इसके बावजूद उनकी प्रतिभा और योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
भारत सरकार ने उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें Padma Shri से सम्मानित किया।
डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह जी न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं, संघर्ष, प्रतिभा और समर्पण की एक अद्भुत मिसाल।
उनकी जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।
जब बात हमारे परिवार, बेटी, बहन पर आएगा,
तो मैं न ही संविधान मानुंगा और न ही इंसान |
स्वयं न्याय करुंगा, और राक्षसों कि बलि चढ़ाकर मां विंध्यवासिनी के चरणों में भेंट कर दूंगा 🔥✊
बिहार में राजपूत समाज का जिंदादील नेता :
भले ही राजपूत समाज के लोग सुधीर सिंह को कितना भी ट्रोल कर लें,
लेकिन जब समाज कि बात आया तो यही एक मात्र शेर मैदान में आए |
युवराज सुधीर सिंह सारण कि बेटी को न्याय दिलाएं, हम सभी आपके साथ है |
भाई, सच्चाई ये है: घाज़ीपुर वाली डॉ. आकांक्षा सिंह (द/ओ रंजीत सिंह, जमानिया) ही असली AIR 301 हैं। उन्होंने admit card, e-summon और barcode evidence शेयर किया जो UPSC roll 0856794 से मैच करता है।
बिहार (आरा) वाली का barcode स्कैन करने पर अलग नंबर आता है। UPSC लिस्ट में नाम AKANKSHA SINGH roll 0856794 rank 301 है, लेकिन असली वाली घाज़ीपुर की हैं।
बिहार वाली झूठ बोल रही है। सच्चाई यही है!