#ऑनलाइन_उपस्थिति_बहिष्कार
"कुछ अधिकारियों को शायद अभी भी यह भ्रम है कि दबाव, धमकी और नोटिसों से पंचायत सहायकों की आवाज़ दब जाएगी। लेकिन 01 जून से ऑनलाइन उपस्थिति के बहिष्कार ने बता दिया है कि सम्मान और संसाधनों के बिना आदेशों की उम्र बहुत लंबी नहीं होती।"
"4.6 साल में संसाधन नहीं दे पाए, लेकिन निर्देश और दबाव देने में कोई कमी नहीं छोड़ी। लगता है कुछ अधिकारियों ने समस्या का समाधान करने के बजाय समस्या को ही प्रबंधन का तरीका बना लिया है।"
"अजीब विडंबना है—मोबाइल विभाग देगा नहीं, संसाधन उपलब्ध कराएगा नहीं, लेकिन ऑनलाइन उपस्थिति हर हाल में चाहिए। शायद कुछ अधिकारियों को लगता है कि पंचायत सहायक कर्मचारी नहीं, जादूगर हैं।"
"01 जून से जारी बहिष्कार केवल ऑनलाइन उपस्थिति का नहीं है, बल्कि उस सोच का विरोध है जो अधिकारों से पहले आदेश और संसाधनों से पहले दबाव को महत्व देती है।"
"जब कर्मचारी वर्षों तक संसाधनों की मांग करते रहें और अधिकारी केवल निर्देश जारी करते रहें, तो समझ लीजिए कि समस्या व्यवस्था में नहीं, व्यवस्था चलाने के तरीके में है।"
✊ "संसाधन मांगने वालों को दोषी मत बनाइए, संसाधन न देने वालों से जवाब मांगिए।" 🔥
#संसाधन_नहीं_तो_कार्य_नहीं
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उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय मात्र एकल कर्मी पंचायत सहायक संचालित करता है।
❓ ग्राम सचिवालय स्थापना आदेश में लिखित कर्मी बीसी सखी, लेखपाल और अन्य 6 कर्मी रोस्टर अनुसार क्या आते हैं या नहीं, इसकी समीक्षा कौन करेगा?
❓ मात्र पंचायत सहायकों की उपस्थिति दर्ज करवाना, जबकि सफाईकर्मी, सचिव और केयरटेकर को इससे अलग रखना इस भेदभाव की समीक्षा कौन करेगा?
❓ बिना संसाधन, बिना अनुकूल व्यवस्थाओं के पंचायत सहायक किस प्रकार व्यवस्था संभाल रहा है, यह कौन देखेगा और समीक्षा करेगा?
❓ अपने निजी स्मार्टफोन और इंटरनेट का उपयोग करके विभागीय कार्य करने की मजबूरी की समीक्षा कौन करेगा?
❓ न्यूनतम मजदूरी ₹15,224 होने के बावजूद पंचायत सहायकों को मात्र ₹6,000 मानदेय दिया जा रहा है, इसकी समीक्षा कौन करेगा?
❓ 6-6 माह तक मानदेय नहीं दिया जाता तथा राजनीतिक मतभेदों के चलते चंद दिनों में नौकरी से निकाल दिया जाता है, इसकी समीक्षा कौन करेगा?
❓ राजनीतिक मतभेदों के कारण महिला पंचायत सहायकों को प्रताड़ित किया जाता है, इसकी समीक्षा कौन करेगा?
❓ आज तक 8 से 9 हजार पंचायत सहायक नौकरी क्यों छोड़ चुके हैं, इसकी समीक्षा कौन करेगा?
क्या इन सवालों का जवाब है आपके पास?
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#UPkePanchayatSahayak
और पंचायत सहायकों की पहचान कहा बन रही।
बिना मानदेय के काम कर रहे आप लोग आदेश जारी कर देते AC में बैठकर लेकिन उनका ग्राउंड में कोई इंप्लीमेंट हो रहा ये कभी समीक्षा की आपने ?? @uppanchayatiraj
पंचायत सहायक के द्वारा ही ग्राम सचिवालय संचालित किया जाता है आपके आदेश में लिखित 8 कर्मचारी की परछाई भी न दिखती पंचायत भवन में।
गजब मॉडल है आप लोगो का!
पंचायत सहायक वर्षों से स्थाई कर्मचारियों के समान अनेक विभागों के कार्य कर रहे हैं,हर विभाग अधिकारी अपने कार्य में पंचायत सहायको को उपयोग करता लेकिन आज तक उनके कार्यों का कोई संयुक्त दस्तावेजी प्रमाण तैयार नहीं हुआ है। न हमारे विभाग ने कभी इस पर पहल की, न करना चाहता है अतः हमे खुद ही यह बेड़ा उठाना होगा
आप नियम से खेल रहे हम भी काग़ज़ से खेलेंगे
पूरे उत्तर प्रदेश से विकास खंडो और जनपदों से पंचायत सहायक के कार्यों से संबंधित शासनादेश, कार्य आदेश, व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट, फोटो, नोटिस एवं अन्य कार्यों के प्रमाण एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि पंचायत सहायकों के कार्यों की एक राज्य स्तरीय मास्टर रिपोर्ट तैयार की जा सके।
📌 सभी पंचायत सहायक साथियों का योगदान अपेक्षित है।
वेबसाइट लिंक 🖇️ https://t.co/PoGiFCMCkt
🚨 पहले संसाधन, फिर कार्य! 🚨
पंचायत सहायकों से ऑनलाइन उपस्थिति, डिजिटल कार्य और 24×7 जवाबदेही की अपेक्षा की जा रही है, लेकिन आज तक अधिकांश पंचायत सहायकों को विभागीय मोबाइल, इंटरनेट सुविधा, प्रिंटर, तकनीकी संसाधन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
❓ बिना संसाधनों के कार्य कैसे संभव है?
पिछले 4.6 वर्षों से पंचायत सहायकों को कभी मानदेय रोकने, कभी सेवा समाप्ति और कभी कार्रवाई का भय दिखाया जाता रहा है। लेकिन अधिकारों की मांग करना कोई अपराध नहीं है।
हम स्पष्ट कहना चाहते हैं—
✅ पहले संसाधन उपलब्ध कराइए
✅ पहले व्यवस्था सुनिश्चित कीजिए
✅ उसके बाद कार्य का आदेश दीजिए
बिना संसाधनों के कार्य लेने की जिद केवल प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने का प्रयास है।
जब तक पंचायत सहायकों की जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक ऑनलाइन उपस्थिति का बहिष्कार जारी रहेगा।
✊ सम्मान भी चाहिए, अधिकार भी चाहिए।
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@myogiadityanath 4 साल से ग्राम पंचायतों की डिजिटल व्यवस्था संभालने वाले पंचायत सहायकों को आज भी सिर्फ ₹6000 मानदेय!
नियमित वेतन नहीं,
2-3 माह तो कहीं 6-6 माह बाद भुगतान!
नीति आयोग का मॉडल स्वीकार है तो फिर पंचायत सहायकों के साथ यह भेदभाव क्यों?
₹5 कमीशन का कमीशन नहीं,
सम्मानजनक वेतनमान और स्थायीकरण चाहिए।
57,000 पंचायत सहायकों की एक ही पुकार
स्थाईकरण और वेतनमान
"काम पूरे विभाग का,
अधिकार भी पूरे चाहिए!"
#पंचायत_सहायक
#स्थायीकरण
#वेतनमान
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वाह रे
पंचायती राज विभाग !
यदि ऑनलाइन उपस्थिति इतनी ही महत्वपूर्ण है तो साहस दिखाइए और नियम सभी पर एक समान लागू कीजिए
अन्यथा यह संदेश जा रहा है कि विभाग को नियमों से नही बल्कि सबसे कमजोर कर्मचारी पर दबाव बनाने से प्रेम है
क्या विभाग की बहादुरी सिर्फ पंचायत सहायकों तक ही सीमित है?
🚨 ग्राम सचिवालय चल रहा है...
लेकिन समीक्षा कौन करेगा? 🚨
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय का पूरा दायित्व पंचायत सहायकों के कंधों पर है।
❌ विभागीय मोबाइल नहीं
❌ इंटरनेट सुविधा नहीं
❌ समय पर मानदेय नहीं
❌ सेवा सुरक्षा नहीं
❌ संसाधन नहीं
❌ सम्मान नहीं
फिर भी...
✅ ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य
✅ सभी डिजिटल कार्य अनिवार्य
✅ जवाबदेही केवल पंचायत सहायकों की
❓ ग्राम सचिवालय में रोस्टर के अनुसार अन्य कर्मियों की उपस्थिति की समीक्षा कौन करेगा?
❓ निजी मोबाइल और इंटरनेट से कराए जा रहे विभागीय कार्यों की समीक्षा कौन करेगा?
❓ ₹15,224 न्यूनतम मजदूरी के स्थान पर ₹6,000 मानदेय की समीक्षा कौन करेगा?
❓ महीनों तक लंबित मानदेय और राजनीतिक हस्तक्षेप की समीक्षा कौन करेगा?
❓ महिला पंचायत सहायकों के उत्पीड़न की समीक्षा कौन करेगा?
❓ 8-9 हजार पंचायत सहायकों द्वारा नौकरी छोड़ने के कारणों की समीक्षा कौन करेगा?
⚖️ जब पंचायत सहायकों से जवाबदेही मांगी जाती है,
तो पंचायत सहायकों के प्रति व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा?
✊ हमारी मांगें ✊
✔ पहले संसाधन, फिर कार्य
✔ विभागीय मोबाइल एवं इंटरनेट सुविधा
✔ सम्मानजनक मानदेय एवं समय पर भुगतान
✔ सेवा सुरक्षा एवं नियमितीकरण
✔ महिला पंचायत सहायकों की सुरक्षा
✔ समस्याओं की उच्चस्तरीय समीक्षा
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@oprajbhar@uppanchayatiraj@DirectorUPPR@ChiefSecyUP@Manojkmr_singh@AwasthiAwanishK
नीति आयोग का मॉडल स्वीकार होने के बावजूद पंचायत सहायकों के हितों की लगातार उपेक्षा क्यों की जा रही है?
पंचायत सहायकों की नियुक्ति हुए लगभग 4 वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी आज तक मात्र ₹6000 मानदेय पर कार्य कराया जा रहा है।
यह समझ से परे है कि आखिर किस आधार पर इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले कर्मियों को इतना अल्प मानदेय दिया जा रहा है।
प्रदेश के हजारों पंचायत सहायकों को नियमित रूप से मानदेय भी प्राप्त नहीं होता। कहीं दो-दो, तीन-तीन माह बाद तो कहीं छह-छह माह बाद भुगतान किया जाता है।
क्या नीति आयोग के मॉडल में भी ऐसी ही व्यवस्था का उल्लेख है?
पंचायत सहायकों को ₹5 प्रति परिवार के नाम पर जो कमीशन आधारित व्यवस्था दिखाई जाती है, वह व्यवहारिक नहीं है। एक कागज़ पर दर्ज कमीशन से किसी परिवार का भरण-पोषण नहीं हो सकता। यदि यही व्यवस्था है तो प्रदेश के सभी पंचायत सहायक उस ₹5 कमीशन का त्याग करने को तैयार हैं और उसे ग्राम निधि में दान करने को भी तैयार हैं।
हमारी मांग केवल इतनी है कि पंचायत सहायकों की आर्थिक मजबूरियों और भावनाओं के साथ खिलवाड़ न किया जाए।
ग्राम पंचायतों के डिजिटल और प्रशासनिक कार्यों की रीढ़ बन चुके पंचायत सहायकों को सम्मानजनक वेतनमान, नियमित भुगतान तथा स्थायीकरण का अधिकार मिलना चाहिए।
#पंचायत_सहायक_स्थायीकरण #पंचायत_सहायक_वेतनमान
@uppanchayatiraj@ChiefSecyUP@Manojkmr_singh@DirectorUPPR@AwasthiAwanishK@oprajbhar
माननीय मुख्यमंत्री जी @myogiadityanath नीति आयोग के मॉडल ग्राम सचिवालय के संचालक के साथ व्याप्त समस्याओं कर पिछले 4 सालों से बस आश्वासन दिए जा रहे है समाधान कभी नहीं हुआ।
कृपया पंचायत सहायकों की समस्याओं का समाधान करते हुए न्यूनतम वेतनमान और स्थाईकरण प्रदान करे।
मध्य प्रदेश –
रात 1 बजे पत्नी–बच्चों सहित मूवी देखकर लौट रहे बाइक सवार युवक को पुलिस ने चेकिंग के लिए रोका। बीच सड़क पर बाइक की चाभी निकाल ली। युवक ने मूवी टिकट भी दिखाया। पुलिस ने पत्नी के सामने युवक से दुर्व्यवहार किया, थप्पड़ मारा।
बेरोज़गारी, संविदा कर्मचारियों की स्थिति और व्यवस्था की संवेदनहीनता ?
ये लोग कोई अपराधी नहीं हैं, अपने हक़ और भविष्य की लड़ाई लड़ रहे युवा हैं।
दर्द इस बात का है कि उनकी मांगों का जवाब संवाद से नहीं, डंडे से दिया जा रहा है।
नौकरी माँगो तो लाठी
प्रश्न पूछो तो नोटिस,
आवाज़ उठाओ तो बदनाम।
धूप बहुत तेज़ है… इसलिए पुलिस लस्सी बाँट रही है।
काश युवाओं के भविष्य की तपिश को ठंडा करने के लिए भी कोई व्यवस्था होती।
बेरोज़गार युवा जब सड़क पर बैठता है, तो वह सिर्फ़ अपने लिए नहीं लड़ रहा होता।वह उस व्यवस्था से सवाल पूछ रहा होता है जिसने सपने तो दिखाए, लेकिन मंज़िल नहीं दी।
प्यास सिर्फ़ गले की नहीं है साहब,
रोज़गार की है, सम्मान की है।
पत्नी और बच्चों के साथ फिल्म देखकर लौट रहे युवक को पुलिस ने रोका, चाबी छीनी और सड़क पर थप्पड़ जड़ दिया।
मूवी टिकट दिखाने के बाद भी नहीं सुनी गई बात।
क्या अब आम आदमी को सड़क पर चलने के लिए भी अपनी बेगुनाही साबित करनी पड़ेगी?
वर्दी कानून की ताकत है, अपमान का लाइसेंस नहीं।
अंजना ओम कश्यप एवं आज तक ने 8 शिक्षकों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज किया है और इसके एवज में दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है,
मेरे अनुसार अब अंजना बुरी फँस सकती है,
क्योंकि शिक्षकों ने भी उल्टा किया तो अंजाम बुरा होगा,
खैर जो भी हो शिक्षक युवा के साथ है इसलिए हम शिक्षकों के साथ है।
अंजना @anjanaomkashyap शुक्रिया, आपने मुझ पर मुकदमा किया।
- 4PM संपादक संजय शर्मा @Editor_SanjayS
अंजना ओम कश्यप ने खान सर, अभिनय सर, बबिता मैडम के साथ 4PM चैनल पर भी मानहानि का मुकदमा किया है।
- संजय शर्मा ने इसका स्वागत किया है और कहा है कि अब देशभर में असली चर्चा होगी कि पत्रकारिता कौन कर रहा है।
- सुनिए संजय शर्मा की पूरी बात...