Listen to what BJP MLA Dilip Rawat said at a public event in Dehradun. Then think about Veer Chandra Singh Garhwali standing in Peshawar in 1930, refusing a direct military order to fire on unarmed Indians. Choosing court martial over killing his own people.
That was not foolishness. That was a spine that most of Uttarakhand’s politicians today cannot even imagine having.
रं समाज की यह पहल और एकजुटता स्वागत योग्य है.
सवाल तो प्रशासन और सरकार से है कि जिस इलाके में इनर लाइन परमिट के बिना कोई भी नहीं जा सकता, वहां कोई गुजरात का ट्रस्ट, राजस्थान से ट्रक लेकर पहुंच कैसे गया ? ये ट्रस्ट किसका है, किसकी शह पर काम कर रहा है ? धामी जी तो बड़ी डींगें हांक रहे थे कि उत्तराखंड के तीर्थों के नाम पर राज्य के बाहर किसी को कुछ नहीं करने देंगे, यहां तो आदि कैलाश के नाम पर गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली वाले ट्रस्ट बना कर दुनिया भर में चंदा बटोर रहे हैं और धड़धड़ाते हुए सीमा तक पहुंच जा रहे हैं और कोई पूछने वाला नहीं ?
सामरिक दृष्टि से संवेदनशील इस इलाके में बिना जांच- परख के किसी को भी जा कर कुछ भी करने की अनुमति कैसे दी जा सकती है ?
पारिस्थितिकी और पर्यावरण के लिहाज से भी यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है, वहां इतना भारी- भरकम निर्माण किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए.
@Rameshbhimtal Sabse imp
1) Daily blanket ban hona chahiye number of visitors pe... Ek limit se jyada nhi aur compulsory registration
2) outside State k pvt aur commercial vehicle ko no entry.
𝟏𝟑𝟏वां संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन
भाजपा सरकार द्वारा विशेष सत्र बुलाकर संसद में लाया जा रहा 131वां संविधान संशोधन विधेयक ना केवल देश के लिए बल्कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों के खिलाफ है, ये संसद में क्षेत्र के आधार पर असंतुलन पैदा करेगा l इस संसोधन के तहत संसद लोकसभा की सीटों की संख्या 545 से बढ़कर 850 हो जाएगी l
भाजपा बड़ी चालाकी से इस बिल को सदन में महिलाओं के 1/3 आरक्षण के नाम पर ला रही है और बोल रही है कि महिलाओं का लोकसभा में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए 350 लोकसभा सीटें बढ़ाई जा रही हैं I लोकसभा सीटों का ये परिसीमन जनसँख्या के आधार पर होगा और उन क्षेत्रों को नुकसान होगा जहाँ आबादी कम है I
दक्षिण भारत के राज्यों जिन्होंने जनसँख्या नियंत्रण पर काम किया और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार पर ध्यान दिया, इस संविधान संसोधन और नए परिसीमन के आधार पर उनकी लोकसभा में हिस्सेदारी कम हो जाएगी क्योंकि दक्षिण भारत और अन्य हिमालयी राज्यों में आबादी कम है l इस संसोधन का सबसे ज्यादा फायदा उन राज्यों को होगा जहाँ आबादी ज्यादा है, जैसे उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और उत्तर-मध्य के अन्य राज्य जहाँ भाजपा पहले से ही जोड़-तोड़ करके सत्ता में है l
पिछले कुछ समय से देखने में आ रहा है कि भाजपा किसी प्रकार भी सत्ता में बने रहना चाहती है चाहे उसे संविधान की धज्जियाँ ही क्यों ना उड़ानी पड़े, भाजपा ने बड़ी निर्लज़्ज़ता से संवैधानिक संस्थाओं जिसमे चुनाव आयोग भी आता है उनको अपनी राजननीतिक महत्वाकांक्षों के लिए हथियार की तरह प्रयोग किया है l विशेष गहन पुनरावृति(SIR) का भाजपा ने दुरूपयोग करके सत्ता हथियाने का माध्यम बना दिया है, भाजपा जहाँ चाहे वहां वोटर लिस्ट में बदलाव कर रही है और लाखों लोगों को मतदान से वंचित कर रही है l दक्षिण भारत में जहाँ भाजपा अपने पाँव नहीं जमा पा रही वहाँ इस संसोधन के माध्यम से भाजपा संसद में उन्हें कमजोर करना चाहती है, इसका नुकसान हिमालयी राज्यों को भी उठाना पड़ेगा जहाँ विशिष्ट संस्कृति है और क्षेत्रीय दलों की बड़ी भूमिका रहती हैं l
उत्तराखंड में हम पहले से परिसीमन का मुद्दा उठाते आ रहे हैं, पहले से ही उत्तराखंड में 2007 में थोपे गए परिसीमन से असंतुलन पैदा हुआ और पहाड़ में विधानसभा की सीटें कम कर दी गईं थी I इस नए बिल से उत्तराखंड में लोकसभा सीटों का भी असंतुलन पैदा होगा आज जहाँ उत्तराखंड में 5 लोकसभा सीटें हैं जिसमे पहाड़ पर 4 लोकसभा सीटें हैं और मैदानी क्षेत्र में में 1 लोकसभा सीट है I अब नए संसोधन विधेयक आने से उत्तराखंड लोकसभा की करीब 9 से 10 हो जाएँगी, जिसमे से पहाड़ में केवल 3-4 सीटें ही रहेगी लेकिन मैदान क्षेत्र में 6-7 लोकसभा सीटें हो जाएँगी, इससे उत्तराखंड से लोकसभा में पहाड़ का प्रतिनिधित्व नगण्य रह जाएगा l
उत्तराखंड में नए परिसीमन के आधार 105 विधानसभा सीटों की बात सुनाई दे है, ये नया संसोधन विधेयक उत्तराखंड में विधानसभा सीटों के परिसीमन का आधार भी बनेगा, जिससे उत्तराखंड में विधानसभा के अंदर बहुत बड़ा असुंतलन पैदा होगा l आज उत्तराखंड में 2007 के परिसीमन के बाद पहाड़ में करीब 36 विधानसभा सीटें हैं और मैदानी क्षेत्र में 34 विधानसभा सीटें हैं, नए संसोधन विधेयक के आधार पर परिसीमन से 105 सीटें होगीं जिसमें पहाड़ पर 35-40 विधानसभा सीटें और मैदानी क्षेत्र में करीब 70 सीटें हो जायेगीं, इससे विधानसभा के अंदर बड़ा असंतुलन पैदा होगा और पहाड़ी क्षेत्र का प्रतिनिधत्व कम हो जाएगा I भाजपा का इरादा उत्तराखंड में पहाड़-मैदान वाली लड़ाई करवाना और उत्तराखंड को मिनी उत्तरप्रदेश बनाने का है, जो उत्तराखंड के आस्तित्व के लिए बहुत ही खतरनाक है I
हम पहले से ही उत्तराखंड भौगोलिक आधार पर परिसीमन की माँग करते आ रहे हैं लेकिन ये नया संसोधन विधेयक उस माँग को कमजोर रहा है और ये उत्तराखंड के साथ अन्याय होगा l हम नए संसोधन विधेयक के विरोध में हैं क्योंकि ये सदन में क्षेत्रों के आधार पर प्रतिनिधित्व का असंतुलन पैदा करेगा, दक्षिण राज्यों और विशेषकर हिमालयी राज्यों के साथ अन्याय होगा I
भाजपा इस विधेयक को सदन में महिलाओं के प्रतिनिधत्व बढ़ाने के रूप में पेश कर रही है लेकिन उसकी मंशा कुछ और है, वो इस विधयेक को राजनीतिक हथियार के रूप में प्रयोग करना चाहती है l हम सदन में महिलाओं के आरक्षण के विरोध में नहीं है, अगर भाजपा को महिलाओं को सदन में 1/3 का प्रतिनिधत्व देना है तो वो वर्तमान सीटों के आधार पर ही लागू कर दे और हम इसका समर्थन करते हैं l
मैं पुनः स्पष्ट करना चाहता हूं कि हमारा विरोध महिला आरक्षण नहीं बल्कि जनसंख्या आधारित परिसीमन है ।
विपक्ष को एकजुट होकर भाजपा सरकार द्वारा संसद के विशेष सत्र में लाए जा रहे 131वें संविधान संशोधन विधेयक का विरोध करना चाहिए, अगर लोकतंत्र को बचाना है तो इभाजपा की ऐसी चालबाज़ियों का विरोध करना होगा l
जय भारत, जय उत्तराखंड
,
@shivbhatt@HimalayanRoars Bheji sare log same video share kr rhe h including me.. jink pas genuine photos videos h pls wo jarur share kijiye .. taki srf social media wala festival na ban jaye
@vyav2017 @PinxhuNegi Actually in many books katyuri and kartikeyapur dynasty is taught together. What I knw is that earlier capital was joshimath and later shifted to katyur valley in kumaon and thn it came to be known as katyuri dynasty.
@vyav2017 @PinxhuNegi Actually there were followers of Buddhism in uttrakhand. And I have even read king bhudev(katyuri dynasty) who killed buddhists and tried to erase signs of Buddhism from uttrakhand. Same katyuris established badrinath and kedarnath shrines.
@iNikhilsaini Not just humans... Himalayas are home to various flora and fauna. And wildlife is very vulnerable to noises created by so called just chilling tourists.