यह क्या हुआ ..कि तेरी धुन में जिन से बिछड़े थे
उन्हीं के सामने .. तुझ से बिछड़ कर रोना पड़ा
मैं अपनी मर्ज़ी से इस दुनिया में हुआ कब था
मआनी ये हैं .. कि मुझ को जहाँ में होना पड़ा ..
~ पल्लव मिश्रा
न घर पलटने का यारा न ताब मंज़िल की
न यूं कि थक के यहीं बैठ जाना चाहता हूं।
घुमाता रहता हूं बातों को कितना शातिर हूं
हूं इतना सादा कि उसको बताना चाहता हूं।
~पल्लव मिश्रा
@Pallav561