आज प्रतीक यादव के देहांत पर कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए पोस्ट किया। कई BJP CM ने भी पोस्ट किया है जैसे
योगी आदित्यनाथ और रेखा गुप्ता
मगर मैंने एक भी विपक्षी नेता की प्रतीक यादव के लिए पोस्ट नहीं देखी।
न तो राहुल गाँधी ने श्रद्धांजलि दी
न तो अरविंद केजरीवाल ने श्रद्धांजलि दी
न तो उद्धव ठाकरे ने श्रद्धांजलि दी
न तो तेजस्वी यादव ने श्रद्धांजलि दी
न तो हेमंत सोरेन ने श्रद्धांजलि दी
न तो ममता बनर्जी ने श्रद्धांजलि दी
आख़िर प्रतीक यादव मुलायम सिंह यादव जी के बेटे थे और अखिलेश यादव जी के छोटे भाई थे, तो ऐसे में तो श्रद्धांजलि देते हुए एक पोस्ट करनी चाहिए थी।
कितना दुखद होता है लाखों विद्यार्थियों की साल भर की मेहनत को यूं बर्बाद होते देखना.. इससे भी दुखद है ये सच कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है..क्या हम अपने देश के बच्चों को एक भ्रष्टाचार मुक्त परीक्षा का अधिकार नहीं दे सकते??शर्म आनी चाहिए इस परीक्षा तंत्र से जुड़े हर व्यक्ति को..हर एजेंसी को..
#NEETUG #paperleak #medicalentrance
आज हिन्दू नववर्ष है तो कुछ बातें जो सुधार करने योग्य हैं उस पर ध्यान देना चाहिए। हमारा धर्म बहुत विशाल है इसलिये हमें उसे सहेजते जाना है।
● मंदिरों में जो पुजारियों और प्रशासन द्वारा अव्यवस्था फ़ैली होती है उस पर सख़्ती से नियंत्रण की ज़रूरत है।
● झाड़ फूँक करके ईलाज़, और फूँक मारकर ये जो चमत्कार करने वाले लोग हैं इन पर भी सख़्ती से जाँच होनी चाहिए। इनसे साबित करवाया जाना चाहिए कि इनके फूँक मार देने भर से कोई कैसे ठीक हो रहा है। तब जाकर जनता आस्था और अंधविश्वास में अंतर कर पायेगी।
● ये जो भविष्य बताकर पर्ची पर लिख रहे हैं वो देश में होने बड़ी घटनाओं और आपदाओं के बारे में कोई बात क्यों नहीं बताते हैं? इस पर जवाबदेही होनी चाहिए। इससे देश का भला होगा।
● संतों और कथावाचकों को पॉलिटिक्स से दूर रहते हुए ही प्रवचन देना चाहिए। ऐसे सन्त भेष में रहने वाले लोगों द्वारा किसी जाति विशेष पर टिप्पणी करने पर कार्यवाही होनी चाहिए। तभी हिन्दू का महत्व हो पायेगा।
● धार्मिक महत्व का मतलब ये नहीं कि हर एक पेड़ या जगह पर कहीं पर भी एक मूर्ति रखकर उसे मंदिर कहने लगें, बल्कि उसका एक तरीक़ा होना चाहिए।
● शंकराचार्य जी से लेकर अन्य संतों द्वारा केवल धार्मिक मामलों में, आस्था के मामलों में बोलने का अधिकार होना चाहिए, अन्यथा वो राजनीति और जातिगत मामलों में बोलने लगते हैं तब वो जाति और पार्टियों में बांटे जा चुके होते हैं और सम्पूर्ण हिन्दू समाज एक नज़र से नहीं देख पाता है उन्हें।
● संतों पर अनावश्यक टिप्पणी करने वालों पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए।
● मंदिरों में VIP दर्शन बन्द करवाया जाए, किसी भी पुजारी के परिवार का एकाधिकार समाप्त किया जाए।
● मंदिरों के आस पास का माहौल बहुत सभ्यता वाला रखा जाए, छेड़छाड़ और धोखाधड़ी जैसे अन्य मामलों पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए।
● धार्मिक स्थानों पर होटल्स के मानक और रेट सरकार तय करे। किराया भी हर एक वाहन पर लिखा रहे। बिचौलियों पर निगरानी हो। जनता के लिये मंदिर में दर्शन और कर्मकांड वाले पूजा के स्थान अलग अलग हों.. ये vip और आम जनता के लिये एक तरह से रहे। जैसा कि मस्जिदों और गुरुद्वारा में है।
● गुरुद्वारे की तरह सेवाभाव स्थापित किया जाए लोगों के मन में। चरण रज से लेकर सन्त दर्शन और सन्त समाधि के बारे में बताया जाए। सत्संग, भजन और अन्य तरह से जोड़ा जाए।
● अगरबत्ती, धूपबत्ती, मिठाई के डिब्बों, प्लास्टिक के बोतल, पूजा पाठ के अन्य सामानों पर देवी देवताओं के चित्र लगाने पर रोक लगाई जाए। नाम लिखें लेकिन चित्र नहीं।
● मंदिरों के पास मिलने वाले प्रसाद की क्वॉलिटी चेकिंग समय समय पर होती रहे। शिव मंदिर के अतिरिक्त अन्य मंदिरों में जल चढ़ाने की प्रथा बन करें इससे फिसलन होती है और मूर्ति ख़राब होती है।
राधे राधे, सबका मंगल हो। धार्मिक आस्था का मतलब दिखावा नहीं बल्कि प्रेरणा देने-लेने और आत्मसुख के लिये है। सुकूँ मिले, सत्मार्ग मिले बस और क्या चाहिए।
~ अश्विनी यादव
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं महाराज जी।
मैं अक्सर ये सोचा करता था कि इस दौर में जब दुनिया के तमाम लोग जाति, धर्म और झाड़ फूंक के नाम पर लूट खसोट मचाये हुए हैं तो कोई ऐसा भी सामने आए...
जिस पर भरोसा कर सकूँ
जिनकी बातों से मैं प्रभावित हो सकूँ
जिनका कहा हुआ ही मन में एक ज्वाला भड़का दे।
जो इंसानियत और धर्म को एक साथ जोड़ दें।
जो एक पिता की तरह, एक बच्चे, एक दोस्त और एक माँ की तरह से हमें दिखाई पड़ें...
बस भगवान ने मेरी सुन ली थी, मेरी ही क्या पूरे विश्व की सुन ली और महाराज जी के सत्संग आने लगे सबके पास।
मैं पहले से ही श्रीराधामाधव की भक्ति में रहा हूँ पर ये जो आस्था को और प्रगाढ़ बनाने ,भक्ति को पुष्ट बनाने साथ ही लोगों के प्रति बस समर्पण भाव रख लेने की सामर्थ्य आपकी दी हुई है महाराज जी।
आज हिन्दू नववर्ष है तो एक हिन्दू होने की वजह से मुझे ख़ुशी है कि मैं सबके प्रति अपने मन में प्रेम रखता हूँ।
आज नवरात्रि है और ख़ुशी की बात है कि मैं तमाम माताओं बहनों के प्रति कभी कुछ अनुचित नहीं किया हूँ।
आज प्रिय श्री प्रेमानन्द जी महाराज का जन्मोत्सव (दीक्षा प्राप्ति दिवस) है तो मुझे इस बात की ख़ुशी है कि आपके भक्ति भावना के इस आनंद सागर में उतर चुका हूँ... बस डूबते ही चले जाना है। आप शतायु हों, स्वस्थ रहें महाराज जी ये कामना है हमारी।🙏
राधे-राधे।
हास्य, व्यंग्य और कटाक्ष यह कोई सड़क किनारे बिकने वाले शब्द नहीं हैं कि जिसे मन हुआ, उसी पर चिपका दिया. इनकी अपनी एक परम्परा, मर्यादा और साहित्यिक गरिमा है. हीही-खीखी अंदाज़ में सायास की जाने वाली टिप्पणी और अनायास जन्म लेने वाले विशुद्ध हास्य, व्यंग्य या कटाक्ष में गहरा अंतर होता है. यह अंतर उतना ही गहरा है, जितना स्तरहीन फूहड़ लतीफ़ों और हरिशंकर परसाई, श्रीलाल शुक्ल या शरद जोशी के व्यंग्य के बीच होता है.
साहित्य में वह हास्य सबसे ऊँचा माना गया है, जिसमें लेखक स्वयं पर भी हँस सके और मर्यादा की रेखा भी न लाँघे. लेकिन जब पूरा प्रयास सिर्फ़ तालियाँ बटोरने और भीड़ के ठहाके तक रह जाए, तो वह हास्य नहीं, सस्ता बाज़ारू मनोरंजन भर रह जाता है.
संकट यह नहीं कि यह छिछोरापन मंचों पर छाया हुआ है, समस्या यह है कि इस फूहड़ता को ही लोग हास्य-व्यंग्य समझ बैठे हैं. और यह भूल; सच कहें तो साहित्य की समझ से अधिक, हमारी समझ की कमी को उजागर करती है.
~आलोक श्रीवास्तव l #AalokNama
सैल्यूट है झांसी के ट्रेन मैनेजर प्रवीण यादव को! 🫡🚊
अपनी सूझबूझ से मालगाड़ी को रुकवाकर, समय पर अटैक पीड़ित यात्री को अस्पताल पहुँचाने में जो तत्परता दिखाई, वो काबिले तारीफ है। गर्व है कि भारतीय रेलवे में ऐसे जांबाज और संवेदनशील कर्मचारी हैं।
धन्यवाद @DRM_Jhansi @RailMinIndia
हिंदुस्तानी मुसलमानों को आज दो रकात नफ़्ल पढ़कर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए कि उसने आपको भारत में पैदा किया।
शुक्रगुज़ार होना कमजोरी नहीं… ईमान की निशानी है।
जब दुनिया के कई हिस्सों में मुसलमान आपस में ही सियासी लड़ाइयों और जंग का शिकार हैं, तब आप यहाँ अमन से रोज़ा रख रहे हैं, नमाज़ पढ़ रहे हैं, ज़कात दे रहे हैं।
आपकी मस्जिदें खुली हैं।
आपका रोज़ा महफ़ूज़ है।
आपकी इबादत पर कोई पहरा नहीं।
ये सब यूँ ही नहीं है।
ये इस मिट्टी की ताकत है। इस लोकतंत्र की ताकत है। इस बहुसंख्यक हिंदू क़ौम की सहनशीलता है।
हर वक़्त शिकायत करने से पहले आईने में देखिए।
जिस थाली में खाते हैं, उसी को कोसना बंद कीजिए।
वतन ने आपको पहचान, अधिकार और सुरक्षा दी है।
भारत आपकी सबसे बड़ी नेमत है।
अल्लाह भारत को सलामत रखे…और हमें भी शुक्रगुज़ार बनाए। आमीन
सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा ❤️
श्री प्रेमानन्द जी महाराज की बातों किसी को धैर्य मिल रहा है। किसी को जीने की राह मिल रही है। किसी शहीद के प्रति मन में सम्मान और प्रेम की बात कर रहे हैं...
सच्चे सन्त ऐसे ही होते हैं जो जनभावना, देशप्रेम और मानवसेवा की बात करते हैं।
लोग ऐसे सन्त से नफ़रत कैसे कर लेते हैं भला।
आज के मैच के बाद मैं वो कह रहा हूँ जो आज तक मैंने कभी नहीं कहा था...
क्रिकेट इतिहास में दुनिया का सबसे बेहतरीन T20 कप्तान सूर्य कुमार यादव हैं।
The Super Man on a Mission 🔥
महाशिवरात्रि पर जब लाखों लोग “हर हर महादेव” का जयघोष करते हैं, तब मंदिरों के बाहर बैठा हर छोटा विक्रेता भी उसी आस्था से अपनी रोज़ी कमाता है।
फूल बेचने वाला, बेलपत्र वाला, प्रसाद वाला, दूध और धूप बेचने वाले...इन सबके घर का चूल्हा भी त्यौहार से जलता है।
त्योहार सिर्फ पूजा नहीं होते, ये समाज के उस मेहनतकश वर्ग की उम्मीद होते हैं जो दिन-रात संघर्ष करता है। लेकिन, बहुत से लोग हिन्दू त्योहारों का विरोध करते हैं, जबकी उनके लोगों की रोजी ही त्योहारों के भरोसे है...भोलेनाथ सबका ध्यान रखते हैं — और शिव का यही संदेश है: आस्था सबकी, सम्मान सबका, रोज़ी सबकी। हर हर महादेव 🙏
मेरे दादा ने ज़िंदगीभर विचारधारा का बोझ उठाया, जिनके साथ वो रहे उनके महल बन गए और उनका पूरा जीवन गरीबी में निकल गया।
मेरे पापा ने जीवनभर वफादारी और ईमानदारी की मिसाल पेश की और ज़िन्दगीभर साईकिल से दौड़ते रहे।
मेरे लिए मेरे हित सबसे पहले रहे बाक़ी सब बाद में, आज मेरे पास दो दो गाड़ियां हैं।
विचारधारा का बोझ ग़रीब के कंधों पर डाला जाता है। ग़रीब को ग़रीब बनाए रखने का सबसे बेहतरीन माध्यम विचारधारा ही है।
आप जिन नेताओं के लिए विचारधारा की बात करते हो, वह एक दूसरे के घर शादी में रसगुल्ले खाते हैं, एक दूसरे के बच्चे साथ साथ मौज मस्ती करते हैं।
किसी के साथ ग़लत मत करो। समाज में नफ़रत मत फैलाओ। इसके सिवाय,
आप अपनी और अपने परिवार की ज़िंदगी बेहतर बनाने के लिए जो भी कर सकते हो वो करो।
@Aamitabh2 सर एक निवेदन है आपसे
उत्तर प्रदेश के वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की वेतन विसंगति और कैशलेश उपचार के लिए आवाज उठाइये
हम लोग बहुत दुर्दशा और शोषण का शिकार हो रहे हैं और कोई सुनने वाला नहीं है
अब आपका ही सहारा है
@Aamitabh2