🎓 नवीन शिक्षा सत्र 2025-26 की मंगलकामना��ँ 🎓
आज एक बार फिर से ज्ञान की ओर एक नए सफर की शुरुआत हो रही है।
📚 “शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।”
आइए, इस नवीन शैक्षणिक सत्र में यह संकल्प लें कि कोई भी विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित न रहे।
हर विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में शिक्षा का दीपक जलता रहे और यही दीप युवा शक्ति को राष्ट्र-आराधन के पथ पर अग्रसर करे।
सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं गुरुजनों को नव शिक्षा सत्र 2025-26 की अनंत शुभकामनाएं।
आप सभी का यह शैक्षणिक वर्ष ज्ञान, अनुशासन और उपलब्धियों से परिपूर्ण हो।
#NewAcademicSession
हरियाणा चुनाव में अपार सफलता के बाद अब अशोक गहलोत संभालेंगे महाराष्ट्र में कांग्रेस की जिम्मेदारी।
चंडीगढ़ के पांच सितारा होटल में बैठ कर संभाला था ���ूरा चुनाव।अब महाराष्ट्र कांग्रेस इनके लिए ढूंढ रही है शानदार पांच सितारा होटल।
राजस्थान सरकार में गृहमंत्री राज्य मंत्री श्री जवाहर सिंह बेढ़म जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
प्रभु श्री राम जी आपको स्वस्थ, सुखी, यशस्वी व सुदीर्घ जीवन प्रदान करें।
@jawaharbedam
आज डीडवाना ज़िला कलेक्ट्रेट कार्यालय पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी लाड़नूँ द्वारा विधान सभा से असवैधानिक निलंबन के विरुद्ध आयोजित सत्याग्रह में शामिल हुआ।
आप सभी का साथ और विश्वास ही मेरी असली ताक़त है।
माँ कुश्ती मेरे से जीत गई मैं हार गई माफ़ करना आपका सपना मेरी हिम्मत सब टूट चुके इससे ज़्यादा ताक़त नहीं रही अब।
अलविदा कुश्ती 2001-2024 🙏
आप सबकी हमेशा ऋणी रहूँगी माफी 🙏🙏
इन बेटियों के रास्तों पर कांटे बोने वालों, ये बेटियां फिर खड़ी होंगी और फिर लड़ेंगी. ये बेटियां जीतेंगी जरूर!
क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संधर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही।
वरदान माँगूँगा नहीं।।
चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्तव्य पथ से किंतु भागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।🇮🇳🇮🇳🫡🫡 @Phogat_Vinesh
विभीषण, जयचंद और मीरज़ाफ़र के देश में क्या नहीं हो सकता?
मैं सातवीं कक्षा में था।
किसी दूसरे गाँव में खेल प्रतियोगिताएं थीं। हमारे स्कूल का मेजरसिंह कुश्ती के लिए गया हुआ था। उसी गाँव का एक लड़का भी कुश्ती में था और उसे मेजरसिंह स�� बहुत डर था।
हमें बहुत प्यास लग रही थी। प्रतियोगिता स्थल पर पानी की ठीक व्यवस्था नहीं थी तो मैं अपने एक दोस्त के साथ उस गाँव में चला गया और एक घर में पानी मांगा।
जिस समय हम पानी पी रहे थे, वहाँ एक शिक्षक आए। उन्होंने उस परिवार के मुखिया से पूछा कि क्या आपके घर कपास तोलने वाला स्प्रिंग वाला कांटा है?
घर में मौजूद बुज़ुर्ग किसान ने हमें पानी पिलवाने ��र परिचय पूछने के बाद शिक्षक से मुख़ातिब होकर कहा, मास्टर साहब, हमारे घर स्प्रिंग वाला कांटा तो नहीं है, लेकिन हमारा बेटा कल ही नया बाट वाला कांटा गंगानगर से लेकर आया है। आप वह ले जाओ। बाट भी नए ही हैं। सब कुछ नया है।
मास्टरजी ने बोले, किसी ने बताया था कि आपके यहाँ है।
चौधरी साहब बोले, मास्टर जी, स्प्रिंग वाला कांटा भी था; लेकिन वह तो हमने तोड़कर फेंक दिया; क्योंकि वही सही नहीं तोलता था। और सही नह���ं तोलने के कारण कभी हमारे चुगारों (कपास चुनने वाले मज़दूरों को) को तो कभी हमें नुकसान हुआ करता था।
स्प्रिंग फंस जाते तो चुनी हुई कपास का वज़न कम आता था तो चुगारों को नुकसान होता था। लेकिन स्प्रिंग ढीले होकर लटक जाते तो हमें अधिक भुगतान करना होता था।
मास्टर जी बोले, हाँ, वही-वही स्प्रिंग वाला कांटा चाहिए था।
बुज़ुर्ग किसान ने कहा, समझा नहीं। दुनिया तो सही तोलना चाहती है और सही कांटे यानी तोलने वाली मशीन को ही रखना चाहती है। लेकिन आपको कौनसी बेईमानी करनी है, जो आप ऐसा कांटा लेना चाहते हैं?
मास्टर जी झेंपते हुए चले गए। वे उसी गाँव के कुश्ती के प्रभारी थे और स्कूल के खेलों का जिम्मा उनके ही भरोसे था।
हम लौटे तो देखा कि वही मास्टर जी कहीं से स्प्रिंग वाला कांटा ले आए थे और मेजरसिंह के भार का विवाद करके उसे बाहर कर दिया गया था।
मेजरसिंह एक तरफ रुआंसा बैठा हुआ था और सबको गालियां दिए जा रहा था। गाॅंव वाले स्कूल के लड़के मेजरसिंह का मज़ाक उड़ा रहे थे और स्कूल के मास्टर जी सबके बीच विजयी मुद्रा में घूम रहे थे।
मेजरसिंह लगातार गालियां निकाल रहा था और हल्ला कर रहा था। वह न किसी से डरता था और न किसी के काबू आता था।
हमारे स्कूल के प्रभारी सहीराम शर्मा भी उसे समझाकर हार चुके थे।
इसी बीच वही ज़मींदार, जिनके घर से हम पानी पीकर आए थे, घोड़़े पर चढ़कर कहीं जा रहे थे। वह पास से गुजरे तो वे मेजरसिंह के मुंह से गालियां सुनकर उसे थप्पड़ मारने के ��िए घोड़े से नीचे उतरे। वे बोले, छोटा सा लड़का और गालियां दे रहा है! रुक बदतमीज़!!!
वे बोले, घोड़े से उतरे और आगे बढ़े तो मेजरसिंह भागने के बजाय उनके सामने तनकर खड़ा था।
तो जैसे ही उन्होंने थप्पड़ ताना, मेजर ने मास्टरजी की तरफ इशारा करके कहा, ओए बुड्ढ़े, मुझे क्यों मारते हो। इस बेईमान को मारो थप्पड़! जो मास्टर होकर बेइमानियां करता है!
इस पर उन्होंने मास्टरजी से कुछ पूछा और कुछ मेजरसिंह से। थोड़�� ही देर में माजरा उन्हें समझ आ गया।
अब चौधरी साहब ने मास्टरजी से बहुत बुरा बोलना शुरू किया।
मास्टर जी ने जैसे ही कहा, एक बार मेरी बात सुनो आप। चौधरी साहब, आप ही के पाेते को तो जितवा रहा हूँ!
आज भी वह दृश्य मेरी आँखों के आगे है और मैं उस दृश्य को कभी नहीं भूल सकता।
चौधरी साहब ने बहुत खींचकर मास्टर जी के थप्पड़ रसीद किया और बोले, आप इतनी दूर से आए इतने छोटे से बच्चे के साथ नाइन्साफ़ी करके हमारे हिस्से मे�� पाप लिखना चाहते हो। लानत है, तुम्हारी शिक्षा पर!
वह बाकी शिक्षकों पर भी बहुत बिगड़े और बोले कि अगर शिक्षक ही ऐसा करेंगे तो इस इन बच्चों का क्या होगा।
उन्होंने खड़े रहकर कुश्ती करवाई। देखी। मेजरसिंह जीता और उनका पोता हारा। उन्होंने मेजरसिंह को शाबाशी दी और अपनी जेब से इनाम भी दिया।
वह किसी खेल प्रतियोगिता में मेरी पहली उपस्थिति नहीं थी। लेकिन मैं सदा ही देखता रहा हूँ कि खेलों में खेल भाव���ा को जितना आहत किया जाता है, उतना तो राजनीति में भी नहीं होता!
लेकिन तब चौधरी साहब जैसे लोग थे, जो अन्याय को अन्याय कहने का साहस रखते थे।
किसी शिक्षक का साहस नहीं था कि वे उन्हें सामने से जवाब देते। उस अन्याय के बारे में सुनकर सबके सिर शर्म से झुके हुए थे।
तब से अब तक बहुत लोग गए। बहुत लोग आए। लेकिन अब हालात क्या हैं?
आज खेलों के प्रबंधक खिलाड़ियों का दूध पी जाते हैं। उनकी डाइट खा जाते हैं। उ���का पोषण करने के बजाय उनका तरह-तरह शोषण करते हैं।
सत्ता के शीर्ष पर सदा से ही धृतराष्ट्र बैठे रहे हैं और वे दुर्याेधनों को सुयोधन और दु:शासनों को सुशासन समझकर संरक्षित करते हैँ। और बहुत ही गर्व के साथ करते हैं।
मुझे कोई हैरानी नहीं, अगर किसी भारतीय ने ही इस महान् खिलाड़ी विनेश फोगाट के साथ अन्याय कर दिया हो!
आमिर खान की फ़िल्म दंगल में भी तो यही दिखाया गया था कि किस तरह इंस्ट्रक्टर जलन के कारण एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी के साथ अन्याय करता है।
क्या उन लोगों के हाथ कम लंबे हैं, जिनके ख़िलाफ़ विजेश और उनके साथी खिलाड़ियों ने इतनी लंबी लड़ाइयां लड़ीं।
जो एक इतनी ताक़तवर पार्टी को अपने सामने नतशीश रख सकता है, वह कहाँ क्या नहीं कर सकता?
और ऐसे युग में विभीषण, जयचंद और मीरज़ाफ़र क्या नहीं कर सकते?
लेकिन यह तो आशंका है। इसलिए जाँच करवानी चाहिए। जाँच तो इसलिए भी होनी चाहिए कि ओलंपिक कमेटी और फोगाट को खिलवाने का जिम्मा ��िन पर था, उन्होंने उसके वेट का ध्यान क्यों नहीं रखा?
सचिन पायलट विश्वप्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में संबोधन देंगे
इंग्लैंड में स्थित, विश्वविख्यात ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता सचिन पायलट को विशेष रूप से अपने विद्यार्थियों तथा अध्यापकों क�� संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया है। 14 जून को, भारत के शाम 6:30 बजे (इंग्लैंड में दोपहर 2:00 बजे) ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में श्री पायलट वहां के प्रोफेसर आंनदी मणि और माया ट्यूडर द्वारा आयोजित चर्चा में युवाओं तथा अध्यापकों से संवाद करेंगे।
अगर आप ऑनलाइन माध्यम से या उपस्थित रह कर इस चर्चा का हिस्सा बनना चाहते हैं तो इस लिंक पर आवश्यक विवरण और रजिस्ट्रेशन फॉर्म उपलब्ध है: https://t.co/kNt3DfTP70
Sachin Pilot to Speak at the World Renowned Oxford University
The Oxford University, UK has invited senior Congress leader Shri Sachin Pilot to address its students on 14 June at 6:30 PM (India time) / 2:00 PM (UK time). The prestigious university has especially invited Shri Pilot to share his views and have a detailed interaction with the students and faculty there on a wide range of issues. The program is hosted by Prof. Anandi Mani and Dr Maya Tudor.
The event is open to the public and can be accessed online also. For further details and the registration form, please visit: https://t.co/kNt3DfTP70
@SachinPilot