राजस्थान पुलिस के कर्मचारियों को राहत मिलनी ही चाहिए, 20-22 घंटे की ड्यूटी मानवता के खिलाफ़ हैं।
8-8 घंटे के तीन रोस्टर बने और New Employmnet law के अनुसार अन्य कर्मचारियों की तरह छुट्टी और अन्य सुविधाएं मिले।
जरूरत पड़े भर्ती निकले, लाखों युवा बेरोजगार हैं।
@AslamChopdar11 इनको भी कुछ सुविधा मिले, ये गूंगे हैं अपना दुखड़ा रो नहीं सकते, धरना प्रदर्शन कर नहीं सकते, संगठन बना नहीं सकते। ऐसे में कौन सुनेगा इनकी...
बस तपते रहो.....
@DigambarGurjar3@AslamChopdar11 माननीय SP साहब बता रहे हे कि अगर यहां के पुलिसकर्मियों के समस्या होती हे तो कुछ करेंगे
कभी बाहर निकल कर देखो SP साहब
आपको तो ये ही नहीं पता कि समस्या होती है या नहीं तो एक दिन आओ इनके साथ
वित्तीय सलाहकार साहब बोल रहे हैं कि जिनका RFID कार्ड रोडवेज पास बना हुआ है उनको TA का भुगतान नहीं किया जावे और रोडवेज के चालक और परिचालकों ने यह तय कर लिया है कि किसी भी पुलिसकर्मी को रोडवेज में बिठाएंगे नहीं, गाड़ी रोकेंगे ही नहीं, तो बताओ कैसे चलेगा काम?
खुद की तनख्वाह से रोडवेज पास का भुगतान करने के बाद भी ये हालात हैं।
रोडवेज के अधिकारी इनके खिलाफ न ही कोई कार्यवाही करते हैं और ना ही परिवादी की बात सुनते हैं।
@BhajanlalBjp@sarviind@arvindchotia@PoliceRajasthan
जब 22% पुलिस महकमा खाली है तो आमजन की सुरक्षा कैसे होगी..
स्वीकृत पद: 1,25,418
रिक्त पद: 28,003
(SI-ASI) रिक्तियां: लगभग 50%..
सिर्फ विज्ञापनों से अपराध नहीं रुकते थानों में जवानों की ज़रूरत है.
@RajCMO पुलिस भर्ती
का कैलेंडर जारी करो! 🗓️
#PoliceBharti#RajasthanPolice
"पुलिस कमिश्नर साहब का यह स्पष्ट संदेश सराहनीय है। सिस्टम को समझे बिना टिप्पणी करना केवल भ्रम पैदा करता है। हमें यह समझना चाहिए कि पुलिस हर परिस्थिति में हमारी सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहती है। वर्दी और उनकी कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान करना हम सबकी जिम्मेदारी है। 🫡
@CP_Jodhpur
77वाँ राजस्थान पुलिस दिवस 🇮🇳
सेवा, समर्पण और सुरक्षा का प्रतीक—हमारी पुलिस
समय के अनुसार सक्रियता, बेहतर सुविधाएँ और लंबित मांगों का समाधान ही मजबूत पुलिस बल की पहचान है।
आइए, पुलिस का सम्मान करें और साथ मिलकर सुरक्षित राजस्थान बनाएं।
#RajasthanPoliceDay@RajCMO@1stIndiaNews
@arvindchotia पत्रकार के दांतों में समस्या है और दिखाने आंखों के डाक्टर के पास जा रही है🤣
कमाल का पत्रकार बना दिया इनको जानकारी रखते नहीं...
पुलिस का काम होता है ठेके को बंद कराना पत्रकार साहिबा जी...
सवाल ट्रेफिक पुलिस वालों से कर रही है🤣
धन्य हो गयें यूट्यूब मीडिया से
मीडिया की जो थोड़ी-बहुत इज्जत बची हुई है, उसे ये प्रतिदिन नए उगने वाले पत्रकार मिट्टी में मिलाकर छोड़ ही देंगे। सच में, बिना प्रिंट की ट्रेनिंग के छुट्टे सांड जैसे ही होते हैं रिपोर्टर
राजस्थान की सरकारी भर्तियों में OBC वर्ग के आरक्षण के साथ लगातार हो रहा छेड़छाड़ और कटौती बेहद गंभीर है। LDC भर्ती में निर्धारित 21% आरक्षण के स्थान पर मात्र 15% देना न केवल संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना है, बल्कि सामाजिक न्याय की अवधारणा पर भी सीधा प्रहार है। यही स्थिति चतुर्थ श्रेणी, वनपाल एवं द्वितीय श्रेणी की भर्तियों में भी देखने को मिल रही है, जहाँ नियमों को मनमाने ढंग से बदलकर आरक्षित वर्गों के अवसर जानबूझकर सीमित किए जा रहे हैं।
रोस्टर प्रणाली की आड़ में युवाओं के अधिकारों का हनन करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। यह रवैया सरकार की नीयत और नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। भाजपा सरकार को तुरंत इस अन्यायपूर्ण प्रक्रिया को रोकना होगा। मुख्यमंत्री को स्वयं संज्ञान लेते हुए आरक्षण से जुड़ी सभी विसंगतियों को दूर करना चाहिए और OBC युवाओं को उनका संवैधानिक व वैधानिक अधिकार पूरी मजबूती के साथ सुनिश्चित करना चाहिए।
@RajCMO@RajGovOfficial@BhajanlalBjp@INCIndia
राजस्थान अवकाश नियम 59 में स्पष्ट शब्दों में उल्लेखित हैं कि नियमानुसार अवकाश स्वीकृत करने वाले अधिकारी को कर्मचारी के आवेदित एवं देय अवकाश की प्रकृति में परिवर्तन करने का कोई अधिकार नहीं है। परंतु पुलिस विभाग में पुलिस कार्मिकों द्वारा अवकाश मांगने पर अवकाश स्वीकृत करने वाले अधिकारी द्वारा राजकीय अवकाश (GH) को आकस्मिक अवकाश (CL) में परिवर्तन कर कर्मचारी के खाते से जान बुझ कर CL खत्म की जाती है। इस समस्या से पीड़ित होकर ASi श्री अचला राम जी चौधरी साहब ने न्यायोचित आदेश जारी करवाने बाबत श्रीमान SP साहब जैसलमेर से निवेदन किया है @JaisalmerPolice@PoliceRajasthan@BhajanlalBjp@RajCMO
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की LDC / कनिष्ठ सहायक भर्ती की जारी विज्ञप्ति में OBC को 21% की बजाय मात्र 15% आरक्षण देना खुला अन्याय है। यह कोई तकनीकी भूल नहीं, बल्कि रोस्टर के नाम पर सुनियोजित भेदभाव है।
चतुर्थ श्रेणी, वनपाल भर्ती और अब RPSC 2nd ग्रेड शिक्षक भर्ती (गणित) में भी OBC को नगण्य प्रतिशत में समेट देना बताता है कि पिछड़े वर्ग के युवाओं को लगातार हाशिये पर धकेला जा रहा है। लाखों OBC बेरोज़गार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कब तक चलेगा?
संविधान समान अवसर की गारंटी देता है, फिर OBC के हक़ क्यों काटे जा रहे हैं? यह सीधे-सीधे सामाजिक न्याय और संविधान की मूल भावना पर हमला है।
माननीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी से आग्रह है कि इस गंभीर विषय पर तुरंत हस्तक्षेप कर संपूर्ण जाँच करवाई जाए और OBC को उनका संवैधानिक 21% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
देश में एक विचार है जो OBC सहित तमाम पिछड़े वर्गों को दबाना चाहते हैं, उनके प्रतिनिधित्व को खत्म करना चाहते हैं। हर बार कलम के माध्यम से आरक्षित वर्गों के भविष्य को अंधकार में धकेला जा रहा है।
आखिर यह अन्याय कब तक चलेगा, युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ आखिर कब तक किया जाएगा? वंचितों के हक की ये आवाज एक दिन जरूर इन ताकतों से मजबूत होगी तथा अपना हक लेकर कर रहेगी।
माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह रहेगा कि इस गंभीर विषय का तत्काल संज्ञान लेते हुए LDC सहित सभी संबंधित भर्तियों की सम्पूर्ण जाँच करवाई जाए, OBC वर्ग को संवैधानिक 21% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए तथा युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे इस अन्याय का स्थायी समाधान निकाला जाए। सामाजिक न्याय केवल काग़ज़ों में नहीं, बल्कि भर्तियों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
@RajCMO@RajGovOfficial #Rajasthan