ये साहब हैं- जनरल बीएम कौल!!
बृज मोहन कौल, जवाहर लाल नेहरु के दूरदराज के भतीजे-वतीजे लगते थे। कहा जाता है कि यही रिश्तेदारी उन्हें नॉदर्न कमांड का मुखिया बनाने का कारण थी।
शायद रहा हो।
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लेकिन बीएम कौल कोई राह चलते शख्स तो थे नही। 1933 में वे ब्रिटेन के सैंडहर्स्ट मिल्ट्री कॉलेज में सलेक्ट हुए। ब्रिटिश आर्मी में कमीशन मिला।
फिर वे प्रमोट होते गए। 1946 में वे आर्म्ड फोर्स नेशनलाइजेशन कमिटी के सदस्य नियुक्त हुए, जनरल थिमैया (भविष्य के इंडियन आर्मी चीफ) और जनरल मूसा (भविष्य के पाकिस्तानी आर्मी चीफ) शामिल थे।
तो कौल का इतिहास इम्प्रेसिव था।
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कौल, इम्प्रेसिव नरेटिव भी देते, अच्छी अंग्रेजी बोलते, और
औऱ आर्मी मुख्यालय में उनका खासा दबदबा था। मने सुंग जू, फ्रेडरिक दी ग्रेट, औऱ नेपोलियन के बाद कोई स्ट्रैटजी जानने वाला कोई जनरल इस धरती पर पैदा हुआ था..
तो वो बीएम कौल थे।
और इसलिए उन्हें फोर्थ कोर्प्स का कमांडर बनाया गया। यह एकदम फ्रेश एरिया कमांड बनी थी, नार्थ ईस्ट के लिए।क्योकि वहां चीन का खतरा बढ़ रहा था।
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कमांड का मुख्यालय तेजपुर था।
जब चीन ने तवांग पर हमला किया, औऱ तेजपुर की तरफ तेजी से बढ़ने लगा, कौल साहब की तबियत बिगड़ गई। छाती में दर्द का इलाज कराने दिल्ली भाग आये।
नेहरू ने जमकर फटकार लगाई, तो सीने का दर्द ठीक हो गया। वे मोर्चे पर लौटे। लेकिन रायता जितना फैलना था, फैल गया।
कौल साहब समेटने में सफल नही हुए।
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जान डालवी ने अपनी किताब "हिमालयन ब्लंडर" में बीएम कौल को 1962 में नेफा मोर्चे पर हार का मुख्य कारण बताया।
संभ्रांत भाषा मे डालवी ने जो लिखा- उसका सीधी भाषा मे मतलब होता है कि बीएम कौल, बड़बोले और कायर शख्स थे। याद रहे, कि जॉन डालवी, कोई विदेशी नही थे। उनका पूरा नाम है-जॉन परशुराम डालवी।
औऱ वे कौल की उसी कमांड में ब्रिगेडियर रहे।
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इस किताब ने कौल के ऊपर सवाल उठे, तो कौल ने वह किया, जो उन्हें बेस्ट आता था। अच्छी अंग्रेजी में अपनी एक किताब लिखी-
" द अनटोल्ड स्टोरी"
इसमे सारा ब्लेम नेहरू गवर्मेंट पर डाला। आज व्हाट्सप यूनिवर्सिटी में 1962 को लेकर नेहरू की जो आलोचना आप पढ़ते है, उसके रचयिता बीएम कौल हैं।
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लेकिन कोई बात नही। नेहरू के नेतृत्व में हार हुई, वे जिम्मेदार थे। अचरज यह कि उन्होंने ज्यादा मलामत, कृष्णा मेनन की करी।
जबकि सच यह था, कि नेहरू इस बड़बोले आदमी को हाथ भर दूर रखते थे। और वो रक्षामंत्री कृष्णा मेनन थे, कौल जिनके लाडले थे। दरअसल, उस दौर मे जनरल थिमैया की कृष्णा मेनन से जो खटपट हुई। फिर इस्तीफा, और नेहरू द्वारा बीच बचाव से इस्तीफा वापसी ड्रामा हुआ।
उसके सूत्रधार भी कौल ही थे।
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जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कोई किताब लिखी है। बरसों से वह सरकार के पास अटकी है। अनुमति जारी नही हुई, इसका कारण आज संसद में पता चला।
यह एक अलग किस्म की सेंसरशिप है। आप सेना के नाम पर उड़ी, बार्डर 2 और धुरंधर जैसी फिल्में देखिए। उसमे पुरानी सरकारों को निकम्मा दिखाने, और मौजूदा झंडाबरदारों को सुपरमैन बताने की छूट है।
लेकिन किसी किताब में आलोचना हुई, तो छपने न दी जाएगी। यह सब देखकर, याद आता है, कि इसी देश मे कोई दौर ऐसा भी था, जब कोई बीएम कौल जैसा कलाकार भी,
सरकार की कड़ी आलोचना के साथ,
किताब छाप कर बेच सकता था।
Robots in China are doing it all now, even dancing on stage like pros.
Here Unitree robots doing Webster flips and are performing at Chinese-American singer Wang Leehom’s concert in Chengdu.
वोट चोरी से हरियाणा में कांग्रेस की सरकार चोरी की गई है - और इसका ब्लैक एंड व्हाइट सबूत आपके सामने हैं।
- ब्राज़ील की एक मॉडल हरियाणा की वोटर लिस्ट में 10 बूथों पर 22 वोट - अलग-अलग नाम से
- एक ही फोटो के साथ 223 वोट एक बूथ में - नाम हर बार नया
- एक ही घर में 501 वोटर दर्ज - वो घर जो सिर्फ़ कागजों पर है
- पूरे राज्य में 1,24,177 फर्ज़ी तस्वीरों वाले वोटर
- हज़ारों लोग ऐसे हैं जिनके वोट हरियाणा और उत्तर प्रदेश दोनों जगह हैं - इनमें कई BJP के नेता और कार्यकर्ता
- दो मंज़िला पुराने मकान, कोई 'फुटपाथ या खंभा' नहीं, फिर भी “मकान संख्या 0”
मानना पड़ेगा - “व्यवस्था” सच में टाइट थी और ये साफ है कि EC और BJP ने मिल कर हरियाणा का चुनाव चुराया है।
मैं हिंदुस्तान के युवाओं, देश के Gen-Z से आग्रह करता हूं - सत्य और अहिंसा का हाथ थाम कर चलें और भारी संख्या में निकल कर मतदान करें।
वोट चोरी को हराने और लोकतंत्र की रक्षा करने का यही सबसे बड़ा हथियार है।
अ-ज्ञानी जी कह रहे है – “जिनका घर नहीं होता उनका जीरो-जीरो होता है”।
अरे मूर्खो, फिर ये बताओ कि - उनका बूथ आप कैसे तय करते हो? इसका जवाब ना भाजपा दे पा रही है, ना ही इलेक्शन कमीशन।
सीधे सवाल का जवाब देने की बजाय, आए-बाएं-साय बातें बनाते हैं।
सिवान से लाइव चल रहा था
वोटर: हम बेरोजगारी और पलायन रोकना चाहते हैं - यूपी में जो हुआ वो चाहते हैं
उत्साहित रिपोर्टर: अच्छा! क्या अच्छा लगा यूपी में?
वोटर: जो अखिलेश जी के वक्त हुआ, धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगते थे
एंकर कूद पड़ा, लाइव कट
आउट ऑफ़ सिलेबस बात होने लगी थी!
जी हाँ दोस्तों, कंधे पर बैग लटकाए, पीले रंग की टीशर्ट पहने और आम आदमी की तरह चलने वाला वह व्यक्ति,
लोकसभा में भारत के विपक्ष का नेता है जो 37 पार्टियों का प्रतिनिधित्व करता है।
बिहार के समस्तीपुर जिले की रोसड़ा विधानसभा में मतदान बूथ के बाहर खुलेआम बीजेपी का प्रचार किया जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
ऐसी खबरें पूरे बिहार से आ रही हैं — खुलेआम वोट चोरी का खेल चल रहा है।
🚨 पूर्व ऊर्जा मंत्री RK Singh का बड़ा खुलासा!
बिहार में Adani Power को 25 साल का कॉन्ट्रैक्ट…
₹50,000 करोड़ की लूट फ़िक्स! 😡
सरकार बिजली ख़रीदे या न खरीदे –
हर साल अडानी को ₹2000 करोड़ देना ही देना! 🤯
ये कारोबार है या…
भ्रष्टाचार की सरकारी गारंटी? 💥