ये "Delay, Confuse, Defeat" की साजिश है।
छात्रों के आंदोलन को जान बूझकर कानून के पचरे में डाला गया और राजनीतिक षड्यंत्र,झूठे वादे,धोखे देने में पारंगत यह सरकार फिर एक बार हम तमाम युवाओं के साथ किये गए वादे,उम्मीद और भरोसा को तोड़ दिया मात्र दो दिन में।
इनकी मंशा पर गहरा शक है।
अति आवश्यक सूचना
सभी मीडिया बंधुओं को सूचित किया जाता है कि आज रात्रि 8 बजे प्रेस क्लब, करम टोली में JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई है।
आप सभी सम्मानित मीडिया बंधुओं से आग्रह है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में अवश्य उपस्थित होकर अपना सहयोग प्रदान करें।
सादर — JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच
@Jrkndikhurpench शपथ-पत्र कोई साधारण कागज नहीं, यह शपथ है!
झूठा शपथ-पत्र देना IPC की धारा 191, 192, 193 के तहत अपराध है, जिसमें 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
अगर जाँच में साबित हुआ कि चयन गलत तरीके से हुआ है तो नौकरी तो जाएगी ही, ऊपर से कोर्ट सीधे FIR का आदेश दे देगी।
इसलिए समझ के दे
झारखंड के युवा दिन-रात पढ़ाई में जवानी खपा रहे थे और उधर साहब नौकरी बेचने में व्यस्त थे।
कागजी फाइलों और एजेंसियों के पीछे सच को ऐसे छिपा रहे थे मानो कोई राष्ट्रीय गुप्त मिशन हो!
CID इनको कब गिरफ्तार करेगी।
आखिर ऐसा कौन-सा 'सुरक्षा कवच' है जो सरकार को इतनी मेहरबान बनाए हुए है
CID के ADG मनोज कौशिक जी को अनुराग गुप्ता को बुलाकर पूछताछ करनी चाहिए कि उन्होंने किसके दबाव में झूठ बोलने और जाँच को ग़लत दिशा में ले जाकर हाईकोर्ट तक को ग़लत जानकारी देने का “अपराधिक” काम किया था?
लड़ाई झारखंड के भविष्य की है , देश के भविष्य की है , अगर सारे चोर, साइबर क्रिमिनल अफसर बन जाएंगे तो इस राज्य को कौन चलाएगा ? लूटमारी , भ्रष्टाचार खुलेआम होगा उसी को रोकने की लड़ाई है ...
👉अगर कोई लड़का पैसे देकर अफसर बनता है तो उसका उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना होगा ना कि राज्य की सेवा करना , वह सोचेगा कि मैंने जो पैसा लगाकर अफसर बना है, वह पैसा को किसी तरह से वापस कर लूं ,, फिर वह पैसा के चक्कर में उसकी ऐसी आदत लग जाती है कि वह आदत से कभी उभर नहीं पता और हमेशा भ्रष्टाचार करता है और राज्य को खोखला करता रहता है।....
हमार सोनार झारखंड को इस तरह से बर्बाद नहीं होते देख सकते हैं इस बात की लड़ाई है
📍 New Delhi
झारखंड छात्र आंदोलन के क्रांतिवीरों (चंडी तिवारी, राज कश्यप और विवेक कुमार) को राखी बांधी और उन्हें आगे लड़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया l
#StudentsMovemetJharkhand
JSSC CGL घोटाले में पेपर लीक साबित होने के बाद अब हमारी पूरी कानूनी रणनीति CID की जांच के लूपहोल्स (Loopholes) को सुप्रीम कोर्ट में CBI Probe का आधार बनाना है। नेपाल के 135 में से 120 सवालों को फर्जी 'गेस वर्क' बताकर अदालत को गुमराह करना, 28 अभ्यर्थियों के Paper-3 की जांच रोकना, नियामतपुर होटल के सुरागों को दबाना और सच उजागर करने वाले सरकारी अधिकारी मस्ताना सर को 4 महीने जेल भेजना यह साबित करता है कि सीआईडी सिर्फ मुख्य आकाओं को बचाने में लगी है। 5 करोड़ की ब्लैकलिस्टेड एजेंसी, कोलकाता-दिल्ली से नेपाल तक फैला अंतर्राज्यीय सिंडिकेट (Inter-State Racket) और चैन ऑफ कस्टडी की विफलता के बाद अब 'दागी' और 'साफ' अभ्यर्थियों का सेग्रीगेशन पूरी तरह नामुमकिन है। सीआईडी की यही लाचारी, दबाए गए तथ्य और सोची-समझी ढिलाई ही सुप्रीम कोर्ट में HC-Monitored CBI Probe का सबसे मजबूत और अचूक कानूनी आधार है! ⚖️🔥
🎯 अभी का सबसे बड़ा मिशन: CBI जांच का मजबूत 'कानूनी आधार' तैयार करना!
दोस्तों, इस वक्त हमारी पूरी रणनीति और सबसे मुख्य काम सुप्रीम कोर्ट के लिए CBI जांच का ठोस कानूनी आधार (Legal Grounds) तैयार करना है। सीआईडी ने जांच में जहाँ-जहाँ ढिलाई दी और सबूतों को दबाया है, उन सभी कानूनी खामियों (Loopholes) को एक मजबूत दस्तावेज़ के रूप में तैयार करना ही हमारी पहली प्राथमिकता है। सीआईडी की यही सोची-समझी नाकामी सुप्रीम कोर्ट में HC-Monitored CBI Probe का आदेश हासिल करने के लिए हमारा सबसे बड़ा हथियार बनेगी! ⚖️🔥
सॉफ्टवेयर बना, बैकएंड से खेल हुआ, OMR में हेरफेर के आरोप लगे और सिस्टम चलता रहा!
यह कोई छोटी-मोटी परीक्षा गड़बड़ी नहीं है। CID के अनुसार 14वीं JPSC PT में 100+ अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से पास कराने के तथ्य मिले हैं। 454 सफल अभ्यर्थियों की OMR अभी तक नहीं मिली, वहीं FRO-ACF में करीब 500 OMR से छेड़छाड़ के आरोप सामने आ चुके हैं।
CID पूरे मामले का स्पष्ट आंकड़ा सार्वजनिक करे।
और अदालत तक मामला पहुंचे तो सिर्फ प्यादे नहीं पूरे नेटवर्क और उनके कथित आकाओं की पहचान होनी चाहिए।
क्योंकि यह सिर्फ नौकरी का घोटाला नहीं, युवाओं के भरोसे की हत्या है।
आज रांची के मोरहाबादी में आदिवासी... सॉरी धर्मान्तरित ईसाइयों की एक रैली हुई, जिसमें परिसीमन को लेकर बड़े बड़े दावे किए गए। कल से ही ईसाई धर्मगुरुओं के कई पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जो इस बात की तस्दीक करते हैं।
सबसे पहले तो कांग्रेस को परिसीमन के मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि इनके राज (2008) में पड़ोसी राज्य ओडिशा के मयूरभंज जिले में अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटें 9 से घटा कर 7 कर दी गईं। छत्तीसगढ़ में ST सीटों की संख्या 34 से घट कर 29 रह गईं।
जिस कांग्रेस ने 1967 में बाबा कार्तिक उराँव जी द्वारा लाए गये डीलिस्टिंग बिल को ठंडे बस्ते में डाल कर आदिवासी समाज का अस्तित्व ही संकट में डाल दिया, जिन्होंने 1961 में आदिवासी धर्म कोड हटाया, जिन्होंने दर्जनों बार आदिवासियों पर गोलियाँ चलवाई, वे किस मुँह से स्वयं को आदिवासियों के हितैषी बताते हैं?
आप वास्तव में उन ईसाइयों के हितैषी हैं, जो आदिवासी समाज को संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों में अतिक्रमण करते जा रहे हैं। आदिवासियों के लिए आरक्षित 90% से ज्यादा सरकारी नौकरियों पर इन्हीं का कब्जा है। सिमडेगा, पाकुड़ एवं साहेबगंज समेत कई जिलों में हमारे जाहेरस्थान तथा सरना स्थलों पर अगर ताला लग गया है, तो उसके जिम्मेदार भी यही लोग हैं।
वैसे तो परिसीमन से पहले जनगणना एवं डेमोग्राफी समेत कई कारकों का ध्यान रखा जाता है, लेकिन हमारा स्पष्ट तौर पर मानना है कि परिसीमन के बाद शेड्यूल एरिया में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़नी चाहिए। आदिवासी समाज के हितों को लेकर केन्द्र सरकार गंभीर है और मुझे यकीन है कि हमारे समाज के साथ कोई अन्याय नहीं होगा।