आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्र��� श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते म��ं बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी।
लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है।
अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा।
माननीय ऊर्जा मंत्र�� श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे।
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*बिजली कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, विद्युत राज्य मंत्री श्री यशोपद नायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नहीं पहुंचे : डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान महा वितरण के सीएमडी और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्�� भी नहीं आए : विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल के एजेंडा पर गम्भीर मतभेद के चलते कोई चर्चा नहीं: संघर्ष समिति ने कहा फ्लॉप रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट*
मुंबई में 04 एवं 05 नवंबर को हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के विरोध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए विरोध पत्र और विरोध प्रदर्शन की नोटिस का प्रभाव यह रहा कि बिजली कर्मियों के गुस्से को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री यशोपद नायक और यहां तक कि मेजबान प्रदेश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ��ी नहीं आए।
निजीकरण के पीपीपी मॉडल पर गम्भीर मतभेद के चलते महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण निगम महावितरण के सी एम डी लोकेश चन्द्र आई ए एस जो आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी है, ने भी इस मीट से दूरी बनाई और मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में नहीं आए। महाराष्ट्र की प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला आई ए एस भी मीट में नहीं आई। यह चर्चा रही कि निजीकरण के मुद्दे पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश चंद्र आई ए एस और महामंत्री यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल आई ए एस के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं जिसका परिणाम यह रहा कि बहु चर्चित मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुधार के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण पर दे���भर के विद्युत वितरण निगमों से मुहर लगवाने की मंशा से मुम्बई में आयोजित की गई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही है। मीट में मुख्य एजेंडा विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल लागू करना था जिस पर बात ही नहीं हुई।
संघर्ष समिति ने बताया की नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से केंद्रीय विद्युत मंत्री को एक माह पूर्व ही सूचित कर दिया गया था कि यदि निजीकरण ��े एजेंडा पर डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट की जा रही है तो बिजली कर्मी इसे स्वीकार नहीं करते। बिजली कर्मियों से पहले चर्चा की जाए और यदि केन्द्रीय विद्युत मंत्री नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों से मीट के पहले वार्ता नहीं करते और मीटिंग से निजीकरण का एजेंडा नहीं हटाया जाता तो बिजली कर्मी विद्युत मंत्री के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों के विरोध का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्री, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सी एम डी, इनमें से कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में नहीं आया।
संघर्ष समिति ने बताया कि मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 की सबसे चौंकाने वाली बात कह रही कि महाराष्ट्र के महावितरण के सी एम डी श्री लोकेश चंद्र आईएएस जो इस मीट के मेजबान भी थे और आयोजक भी वे मीट में नहीं आए। संघर्ष समिति ने कहा की महाराष्ट्र के विद्युत वितरण निगम के बड़े अधिकारियों ने बताया कि निजीकरण को लेकर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र और महामंत्री श्री आशीष गोयल जो उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन है के बीच में गहरे मतभेद हो गए हैं। इसी के चलते मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरफ फ्लॉप हो गई। उसमें केंद्री�� मंत्री से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक आए और न ही अधिकांश प्रांतों के चेयरमैन और एम डी आए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने एक साल पहले निजीकरण का निर्णय घोषित कर बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़��� दिया है। लगातार आंदोलन चल रहा है और कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ चुका है। समय की आवश्यकता यह है की पावर कारपोरेशन के प्रबंधन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर वास्तविक सुधार कार्यक्रम पर बिजली कर्मियों से वार्ता करनी चाहिए। बिजली कर्मी सुधार हेतु लगातार प्रयत्नशील है और उसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं।
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केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण और आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की मिलीभगत से संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की साजिश : संघर्ष समिति ने सार्वजनिक किये डॉक्यूमेंट: राष्ट्रीय स्तर के आन्दोलन की तैयारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के साथ मिली भगत में अपना समांतर सेक्रेटेरिएट चला रहा है और संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की गुपचुप योजना तैयार ���ी जा रही है। संघर्ष समिति ने इस बाबत ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सचिवालय के पत्र व्यवहार को आज यहां सार्वजनिक किया।
संघर्ष समिति ने बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने 09 सितंबर देश के सभी ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशकों को एक पत्र भेजा है जिस पत्र से बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है की केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की शह पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ऊर्जा निगमों के कार्य में सीधे दखलंदाजी कर रहा है। श्री आलोक कुमार अपने पत्र में देश के विभिन्न ऊर्जा निगमों से डाटा ऐसे मांग रहे हैं मानो वही देश के विद्युत मंत्री बन गए हों।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है और अब यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के लिए ही ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाया गया है और यह एसोशिएशन सरकार और निजी घरानों के बीच बिचौलिए का काम कर रही है।
��ल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स इस मामले को केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर के सामने शीघ्र रखेगी।
उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सेक्रेटेरिएट की दखलंदाजी तत्काल बंद न की गई और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से जुड़े हुए ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष और ��्रबंध निदेशक पद से न हटाए गए तो देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसके विरोध में सड़क पर उतरकर आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे।
संघर्ष समिति ने कहा की पत्र में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने लिखा है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 08 सितंबर को एक मीटिंग किया था जिसमें ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को भी बुलाया गया था । इस मीटिंग में केंद्रीय विद���युत प्राधिकरण ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से यह कहा कि वह विद्युत वितरण, ट्रांसमिशन और उत्पादन में कॉस्ट रिडक्शन के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को एक सुझाव दें। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की मीटिंग में यह भी तय हुआ कि इस बाबत ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी ऊर्जा निगमों से इनपुट डाटा मांगे और प्रस्ताव बनाए। इसी आधार पर श्री आलोक कुमार ने देश के सभी ऊर्जा निगमों के चेयरमैन से ���स संबंध में डाटा मांगा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह सारे घटनाक्रम बहुत ही गंभीर है और सरकारी काम में सोसाइटी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर्ड एक संस्था की इस प्रकार की दखलंदाजी देश के इतिहास में ��हली बार हो रही है।
संघर्ष समिति ने आश्चर्य व्यक्त किया कि कि यह सब केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के इशारे पर हो रहा है। श्री आलोक कुमार ने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ने अप्रैल 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के सामने भी एक प्रेजेंटेशन किया था।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में ऑल इंडियाडिस्कॉम एसोसिएशन का प्रादुर्भाव अचानक नहीं हुआ है बल्कि यह एक सोची समझी रणनीति के तहत निजीकरण को अंजाम देने हेतु बनाई गई संस्था है। सबसे आपत्तिजनक बात यह है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के शीर्ष पदाधिकारी भी बने हुए हैं जिससे यह मामला सीधे तौर पर हितों के टकराव का बनता है।
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आज जनपद बिजनौर के थाना नहटौर के अंतर्गत बिजली चोरी में पकड़े गए दबंगों द्वारा दिनदहाड़े उपखंड अधिकारी (विद्युत) के कार्यालय में घुसकर मारपीट की तथा तमंचा लगाकर एसडीओ ��ा अपहरण करने का प्रयास किया। जब सरकारी अधिकारी अपने कार्यालय में ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा, यह जिला प्रशासन के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
विद्युत अभियंताओं पर उनके कार्यालय में घुसकर मारपीट की घटनाये लगातार बढ़ती ही जा रही है, ऊर्जा विभाग और उत्तर प्रदेश शासन को बिजली अभियंताओं की सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाये जाने की तत्काल आवश्कता है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि उपरोक्त प्रकरण में हमलावरों पर कठोर कार्रवाई कराये जाने की कृपा करें, जिससे विद्युत अभियंता प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में अपना पूर्ण योगदान देते रहें।
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उड़ीसा में निजी कंपनियों का लाइसेंस निरस्त करने हेतु स्वतः संज्ञान लेकर विद्युत नियामक आयोग ने सुनवाई की तारीख तय की : उड़ीसा के निजीकरण के विनाशकारी परिणाम को देखते हुए उप्र में बिजली के निजीकरण का निर्णय रद्द करने की मांग: निजीकरण के विरोध मे सितम्बर माह में किसानों, उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के सम्मेलन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उड़ीसा में हुए बिजली वितरण के निजीकरण के प्रयोग ��े विनाशकारी परिणाम आने के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय। संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि निजीकरण के विरोध में सितंबर माह में किसानों, गरीब व मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों के सम्मेलन प्रदेश भर में किए जाएंगे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने ��ज यहां बताया कि उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए टाटा पावर की चारों विद्युत वितरण कंपनियों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए 10 अक्टूबर को सुनवाई की तारीख तय की है। पहले यह तारीख 28 अगस्त को तय की गई थी लेकिन 29 अगस्त को उड़ीसा में स्थानीय अवकाश होने के कारण इसे 10 अक्टूबर को पुनर्धारित कर दिया गया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि उड़ीसा के सभी उपभोक्ता फोरमों की ओर से श्री किशोर पटनायक ने 16 अगस्त को टाटा पावर की चारों विद्युत वितरण कंपनियों के विरुद्ध उपभोक्ता सेवा में पूरी तरह अक्षम रहने और उपभोक्ताओं का उत्पीड़न करने के आरोप लगाते हुए इन कंपनियों का विद्युत वितरण का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की थी। उपभोक्ता फोरमों ने उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग रेगुलेशन 2004 की धारा 9(1) और (4) के अंतर्गत उपभोक्ता सेवाओं में पूरी तरह विफल रहने के आरोप लगाते हुए दाखिल की थी।
उपभोक��ता फोरमों ने अपनी प्रेयर में कहा है कि विद्युत परिषद को विघटित करने का और उसके उपरांत विद्युत वितरण का निजीकरण करने का सबसे पहला प्रयोग उड़ीसा में हुआ। यह दोनों ही प्रयोग पूरी तरह विफल रहे हैं। निजीकरण के परिणाम विनाशकारी हैं और उपभोक्ता दर दर भटक रहे हैं।
उपभोक्ता फोरमों का आरोप है कि भीषण गर्मी में घंटों बिजली की कटौती की जा रही है, बिना प्रॉपर नोटिस के विद्युत विच्छेदन किया जा रहा है, बेतहाशा बढ़े हुए गलत बिल भेजे जा रहे हैं और सबसे अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाकर उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है।
उपभोक्ता फोरमों ने अपने आवेदन में यह भी कहा है कि उड़ीसा के पूर्व बिजली कर्मियों को टाटा पावर द्वितीय श्रेणी का नागरिक मानती है। उनको बिना काम के किनारे बैठा रखा गया है और उनका करियर बर्बाद हो रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा की उड़ीसा में सबसे पहले 1999 में निजीकरण किया गया था। निजीकरण के एक साल बाद ही अमेरिका की एईएस कंपनी वापस चली गई। रिलायंस पावर की बाकी तीनों कंपनी का लाइसेंस फरवरी 2015 में विद्युत नियामक आयोग ने पूरी तरह अक्षम रहने के कारण रद्द कर दिया था।
2020 में चारों कंपनियों का लाइसेंस टाटा पावर को दिया गया और अब विद्युत नियामक आयोग ने बेहद खरा�� उपभोक्ता सेवा का स्वत: संज्ञान लेते हुए 15 जुलाई 2025 को टाटा पावर की चारों कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया है। टाटा पावर का लाइसेंस निरस्त करनी हेतू 10 अक्टूबर को सुनवाई हो रही है।
संघर्ष समिति ने कहा की उड़ीसा में कृषि क्षेत्र उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत कम है। बिजली के क्षेत्र में घाटा मुख्यतः ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में होता है। निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा जैसे औद्योगिक ।प्रांत में विफल रहा है और निजीकरण के लाइसेंस निरस्त करने हेतु सुनवाई हो रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों की गरीब जनता पर निजीकरण न थोपा जाय।
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आज बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता जनपद बलिया को उनके कार्यालय में घुसकर हमला���रों द्वारा गाली गलौज करते हुए मारपीट की गई।
जब जनपद में बिजली विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी अपने सरकारी कार्यालय में ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता का क्या हाल होगा, अपराधियों का बोलबाला है कोई भी, कहीं पर भी, किसी को भी, घुस कर मार रहा है पुलिस प्रशासन त्वरित कार्रवाई भी नहीं कर रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कृपया ऐसे हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई कराने की कृपा करें, तथा बिजली अभियंताओं को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की कृपा करें । जिससे बिजली अभियंता प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे रहे।
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निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी : ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिविधियों पर संघर्ष समिति ने उठाया सवाल*
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बारे में ऑल इंडिया डिस्काम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिविधियों पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर ���्रदेश में सवाल खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण को लेकर की जा रही कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाई जाय। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 268 वें दिन प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि पता चला है कि नवंबर 2024 में लखन�� में हुई विद्युत वितरण कंपनियां की बैठक में निजी घरानों के साथ मिली भगत में गठित आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में न केवल रुचि ले रही है अपितु इस एसोशिएशन की आड़ में निजी घरानों का हित साधने की कोशिश भी की जा रही है जो अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण और निन्दनीय है।
संघर्ष समिति ने कहा कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन में विद्��ुत वितरण निगम के मौजूदा चेयरमैन और प्रबंध निदेशकों के साथ निजी घरानों के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफीसर हैं । एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल के पद पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के पूर्व ��ध्यक्ष और भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव आलोक कुमार सेवानिवृत्त आई ए एस है। एसोशिएशन के जनरल सेक्रेटरी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के मौजूदा अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि डॉ आशीष गोयल का पॉवर कारपोरेशन का चेयरमैन रहते हुए इस प्रकार निजी घरानों के साथ एसोसिएशन बनाना सरकारी गोपनीयता का हनन है और हितों के टकराव का मामला भी है। संघर्ष समिति ने कहा कि पारदर्शिता का त���ाजा है कि ऐसी परिस्थितियों में डॉक्टर आशीष गोयल को या तो अपने को आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से अलग कर लेना चाहिए अन्यथा स्वयं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी पता चला है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी विद्युत वितरण निगमों से करोड़ों रुपए का चंदा ले रही है। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर एक बड़े निजी घराने के सीईओ को रखा ग��ा है। यह चर्चा है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कई करोड़ का चंदा दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि करोड़ों रुपए का चंदा लिया जा रहा है तो सरकार को यह जांच करना चाहिए कि यह संगठन किसने बनाया है, किस उद्देश्य से बनाया है, देश के विद्युत वितरण निगम किस मद में इसे चंदा दे रहे हैं और इसका ऑडिट कैग से कराया जाना चाहिए। सरकार की अनुमति के बिना इस प्रकार संगठन बनाकर करोड़ों करोड़ों रुपए का चंदा लिया जाना पूरी तरह अनैतिक और अनुचित है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी जानकारी मिल रही है कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष और भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव सेवा निवृत आई ए एस श्री आलोक कुमार उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के उच्च अधिकारियों की अनौपचारिक बैठक ले रहे हैं और उन्��ें निजीकरण की प्रक्रिया तेज करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह बहुत गम्भीर बात है जिसकी जांच होनी चाहिए और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण न कर पाने से हताश और निजीकरण करने के लिए उतावले पॉवर कारपोरेशन के पूर्व और वर्तमान अधिकारी निजी घरानों के साथ मिलकर संविधानेतर कार्य कर रहे हैं ।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 268 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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निजीकरण से 76500 बिजली कर्मियों की नौकरी खतरे में: निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष की तैयारी : सेवा करेंगे और हक भी लेंगे - संघर्ष समिति
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया गया तो लगभग 76500 सरकारी कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा। आज निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 267 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण रोकने के लिये निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली की बढ़ी हुई मांग को देखते हुए बिजली कर्मी आंदोलन के साथ-साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं को भी सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड कर रहे हैं । संघर्ष समिति ने कहा कि उनका नारा है - सेवा करेंगे और हक भी लेंगे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 17500 और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 10500 नियमित कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त इन दोनों विद्युत वितरण निगमों में लगभग 50 हजार संविदा कर्मी काम कर रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निजीकरण के बाद बिजली कर्मियों को तीन विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प यह है कि वे निजी कंपनी की नौक��ी स्वीकार कर लें। दूसरा विकल्प यह है कि वे अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आ जाए और तीसरा विकल्प यह है कि वे स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर घर चले जाएं। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसे बिजली कर्मी बहुत बड़ी संख्या में हैं जो निजी कंपनियों की नौकरी छोड़कर पावर कारपोरेशन में सरकारी नौकरी करने आए थे। अब कई कई साल की नौकरी के बाद उनसे यह कहना कि वे फिर निजी कंपनी में चल जाए यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है ���र बिजली कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
दूसरे विकल्प के रूप में यदि बिजली कर्मी अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आते हैं तो वे सरप्लस हो जाएंगे और उनकी छटनी की नौबत आ जाएगी। इतना ही नहीं तो पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से अन्य विद्युत वितरण निगमों में आने वाली बिजली कर्मी नियमानुसार वरिष्ठता क्रम में 2025 बैच के नीचे अर्थात सबसे नीचे रखे जाएंगे। स्वाभाविक है कि ��रप्लस होने पर सबसे पहले इन बिजली कर्मियों की ही छटनी होगी।
संघर्ष समिति ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2002 में निजीकरण के बाद दिल्ली के विद्युत वितरण निगमों में कुल 18097 बिजली कर्मी कार्यरत थे। निजीकरण के एक वर्ष के अंदर-अंदर निजी घरानों के उत्पीड़न से तंग आकर 8190 बिजली कर्मियों ने सेवानिवृत्ति ले ली। इस प्रकार दिल्ली में निजीकरण के एक साल के अंदर ही अंदर-अंदर 45% बिजली कर्मी सेवान��वृत्ति लेकर घर चले गए। तब बिजली कर्मचारियों को पेंशन मिलती थी। अब पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में कार्यरत 90% बिजली कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिलती वे सेवा निवृत्ति लेकर कहां जाएंगे ?
हाल ही में 1 फरवरी 2025 को चंडीगढ़ विद्युत विभाग का निजीकरण किया गया। निजीकरण जिस दिन किया गया उसी दिन लगभग 40% बिजली कर्मी सेवा निवृत्ति लेकर घर चले। चंडीगढ़ में बिजली कर्मचारियों की यूनियन और सरकार के बीच 1 फरवरी की रात जो समझौता हुआ था आज तक उसे लिखकर नहीं दिया गया है। और निजी कंपनी यह कह रही है कि यह समझौता सरकार ने किया था हमें इससे कोई मतलब नहीं है। निजीकरण की यही भयावह कहानी अब उत्तर प्रदेश में दोहराई जा रही है जिसे बिजली कर्मी कदापि स्वीकार नहीं करेंगे।
निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 267 वें दिन आज बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरो�� प्रदर्शन कर निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया। बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण बिजली कर्मचारियों और उनके परिवार के लिए अंधेरे का संदेश लेकर आ रहा है। बिजली कर्मियों ने कहा कि वे किसी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे और यह संघर्ष तब तक चलता रहेगा जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता।
#stop_privatization_of_uppcl
#stop_victimization_of_uppcl_employees
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आन्दोलन के 250 दिन पूरे होने पर बिजली कर्मियों ने प्रान्त भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन कर व्यक्त किया आक्रोश : निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों के वापस होने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प
निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 250 दिन पूरे होने पर ��ज बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों , जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। बिजली कर्मियों ने संकल्प लिया कि जब तक निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती संघर्ष जारी रहेगा।
राजधानी लखनऊ में मध्यांचल मुख्यालय पर भारी बारिश के बीच बिजली कर्म���यों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि शीर्ष प्रबन्धन की निजी घरानों के साथ मिलीभगत है और आठ माह से निजीकरण न कर पाने के कारण हताश प्रबंधन बिजली कर्मियों का लगातार उत्पीड़न कर रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्पीड़न का उद्देश्य बिजली कर्मियों का मनोबल तोड़ना है किंतु बिजली कर्मी किसी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे।
उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कराने हेतु संघर्ष समिति की मांग है कि मार्च 2023 की हड़ताल के बाद ऊर्जा मंत्री द्वारा समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस लिये जाने के निर्देश के अनुपालन में समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाय।
निजीकरण के नाम पर 55 साल की उम्र और डाउन साइजिंग के नाम पर हटाये गये सभी संविदा कर्मी बहाल किये जाय।
उत्पीड़न की दृष्टि से बिजली कर्मियों के किये गये सभी ट्रांसफर निरस्त किये जाय।
फेसियल अटेंडेंस के नाम पर जून और जुलाई माह का रोका गया वेतन तत्काल बिजली कर्मियों को दिया जाय।
उत्पीड़न के नाम पर स्टेट विजिलेंस की जांच कराकर शीर्ष पदाधिकारियों के विरुद्ध की गई फर्जी एफ आई आर वापस ली जाए।
रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने की दृष्टि से धमकी देकर जोर जबरदस्ती से स्मार्ट मीटर लगाने की कार्यवाही तत्काल बन्द की जाय।
आज वाराणसी, आगरा, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा में मुख्यतया बड़ी विरोध सभा और प्रदर्शन किया गया।
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यशस्वी मुख्यमंत्री जी मां० @myogiadityanath बुलंदशहर के चीफ इंजीनिय��� ने ट्रांसफर पालिसी के विरुद्ध जहाँगीराबाद खंड में 11 जेई में से 10 का ट्रांसफर कराया गया। पूरे जिले से 34 जेई का ट्रांसफर कर दिया जिससे एक एक जेई पर 3-4 बिजलीघर होने से व्यवस्था खराब होती जा रही हैं।
बिजली कर्मियों के साथ अब उनके परिजन भी कूद पड़े हैं निजीकरण के खिलाफ सत्याग्रह में।
यह सिर्फ नौकरी की लड़ाई नहीं है बल्कि जनता के अधिकारों की लड़ाई है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष श्री अवधेश वर्मा जी का कोई तोल नही कोई मोल नहीं।
जिस हिसाब ललकारते ह�� शायद ही कोई ऐसा दहाड़ता हो। अद्वितीय ऊर्जा का संचार है आपने @uprvup अध्यक्ष जी। आपके रहते निजीकरण करना आसान नही है। जोरदार, जबरदस्त, जिंदाबाद 🙏
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट ने बिजली निजीकरण में छिपे भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है।
इस वीडियो को रिट्वीट करें और निजीकरण के विरोध में अपना समर्थन ज़रूर दर्ज करें।
@DrLaxman_Yadav@ravish_journo@BhimArmyChief@uprvup
आपसे अनुरोध है कि फेसिअल अटेंडेंस केनाम पर शोषण स्वीकार नही है अटेंडेंस के लिए फोन नही दिया गया है तो केवल सिम से कैसे लगाए। अगर 36 घण्टेमें वेतन नही मिलातो सभी अवर अभियंता सिम भी वापस कर देंगे और इसके लिए प्रबन्धन ही जिम्मेदार होगा
@myogiadityanath@UPGovt@UPPCLLKO@ABPNews
MD महोदया @MdPvvnl जून माह की भयंकर गर्मी और आंधी तूफान में टूटी विद्युत लाइन को दिन रात कार्य कर विद्युत आपूर्ति सुचारू करने वाले अवर अभियंताओं का वेतन रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है जिसके कारण बुजुर्गों की दवाएं बच्च���ं की फीस आदि को पूरा न होने पर अवर अभियंता परेशान हैं।
गोविंद नगर, कानपुर विद्युत कार्यालय में सैकड़ों कर्मचारियों ने निजीकरण के खिलाफ ज़ोरदार प्रदर्शन किया।
💥 लड़ेंगे... और एक दिन ज़रूर जीतेंगे।
✊ इंकलाब ज़िंदाबाद।
#StopElectricityPrivatization@UPRVPAS