हम लड़े थे पहले भी और लड़ेंगे आगे भी !
SI अभ्यर्थियों के हक के लिए हम फिर से मैदान में मजबूती से लड़ेंगे
28 सितंबर को सभी साथी शहीद स्मारक जयपुर RPSC के खिलाफ आवाज बुलंद करने पहुंचे !
RPSC किसी भी भर्ती का साक्षात्कार करवा रही है वो ना रोल नंबर ना Alphabet के आधार पर ले रही।
फिर किस आधार पर साक्षात्कार का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है।
साक्षात्कार कार्यक्रम 90% कैटेगरी के आधार पर हो रहा है जिससे भेदभाव आराम से बिना किसी कठिनाई से हो रहा है।
स्टूडेंट्स का कहना है कि RPSC एक तरफ पदों को खाली रखकर, दूसरी तरफ साक्षात्कार में पक्षपात करके चयन कर रही है यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
#जयपुर_चलने_की_तैयारी_करें
अब बहुत हुआ अन्याय
अब और सहन नहीं कर सकते।
#RPSC जनता के पैसे से चलती हैं ये किसी की जागीर नहीं है कि जो मन में आए वो कर रहे हैं।
आखिर पेपर सेट करने की भी एक मर्यादा होती हैं, कम से कम 40% तो नंबर ल सके, या कम से कम 2 घंटे में तो सॉल्व हो सके।
ईमानदारी से परीक्षा देकर बैठे SI अभ्यर्थियों के हित में अगर वास्तव में न्याय करना है, तो परीक्षा दोबारा कराने के विकल्प पर विचार होना चाहिए।
वरना नुकसान हो जाने के बाद सिर्फ औपचारिकता निभाने से क्या हासिल होगा?
अभ्यर्थी 2–4 साल तक मेहनत करके तैयारी करता है और फिर परीक्षा से पहले उसे सिर्फ कुछ महीनों का समय मिलता है।
ऐसे में पेपर का स्तर ऐसा तो होना ही चाहिए जिसे मेहनत और सामान्य समझ के आधार पर हल किया जा सके।
जब वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थी भी पेपर को देखकर सवाल उठाने लगें, तो पेपर के स्तर और उसकी जरूरत पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
मुश्किल पेपर बनाना अलग बात है, लेकिन परीक्षा ऐसी भी नहीं होनी चाहिए कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थी खुद ही सोचने लगें कि आखिर तैयारी किस स्तर की करें।
जो अभ्यर्थी पूरी ईमानदारी से परीक्षा में शामिल हुए हैं, उनके भविष्य और उनकी मेहनत को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
गलती हुई है तो उसे स्वीकार करके सही समाधान निकालना ही बेहतर रास्ता है।
बाकी अपनी बात कमेंट में जरूर लिखना…
लेकिन असहमति भी अपनी भाषा और संस्कारों के साथ ही रखना। 🙏🏻 #RPSC #SI
सुनने में आया है कि निकाय चुनावों में राजस्थान के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री दोनों के गृह जिले हाथ से निकल गए है।
यह भी सुनने में आ रहा है कि इसी तरह शिक्षा और रोज़गार के मुद्दे को दरकिनार किया गया तो स्थिति और विकट हो जाएगी। 🌝
"आईएएस दिव्या मित्तल की खबर सुनकर बड़ा अफसोस हो रहा है.. वो जितनी शानदार महिला हैं.. उतनी ही शानदार अधिकारी भी थीं.. आखिर उन्होंने रिजाइन क्यों दिया!! दिव्या मित्तल के इस्तीफा देने के बाद यूपी की ब्यूरोक्रेसी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.. एक के बाद एक इस और आईपीएस अफसर नौकरी क्यों छोड़ रहे हैं??"
मैं आईएएस दिव्या मित्तल के बड़े प्रशंसकों में हूं..
दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में क्या लिखा है उसे पढ़िए..
"आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है. साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था.. दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था.. अपने देश में न होना खलता था.. मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर.. वो कर्ज़ चुकाना था.. चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों.. सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला..
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा.. देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है.. मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है.. और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है.. सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था. इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला, उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है..
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ. सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया.. लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए.. उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी.. और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी.. इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी.. और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे..
आज आभार से आँखें नम हैं. बस एक दृश्य इनमें बसा है. लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई. पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा.. और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है.
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल
#IAS #Bureaucrats #Bureaucracy #Resign #Resignation #Lucknow #UttarPradesh
यह हैं हरियाणा के मोहित जाट, जो दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे।
मोहित का कहना है कि जब उन्हें पता चला कि छात्र जंतर-मंतर से संसद तक प्रदर्शन करेंगे, तो उन्होंने पहले ही मेडिकल लीव ले ली। छुट्टी खत्म होने के बाद उन्हें कई बार ड्यूटी जॉइन करने के लिए बुलाया गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जब उन पर लगातार दबाव बढ़ा, तो उन्होंने दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर पद से इस्तीफा देना उचित समझा और छात्रों के बीच जंतर-मंतर पहुंच गए।
उनका कहना था— "मैं अपने भाई-बहन जैसे छात्रों पर लाठी नहीं उठा सकता। मेरे शिक्षकों ने मुझे इस काबिल बनाया है कि मैं मेहनत करके अपना पेट पाल लूंगा।"
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर जाट पुलिसकर्मियों को उनकी जाति के नाम पर लगातार निशाना बनाया जा रहा था, मानो हर जाट पुलिसकर्मी एक जैसा हो। आज मोहित के फैसले ने यह साबित कर दिया कि किसी व्यक्ति का चरित्र उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके अपने फैसलों और सिद्धांतों से तय होता है।
किसी भी समाज या जाति को एक घटना के आधार पर कटघरे में खड़ा करना गलत है।सवाल सत्ता से करो, आदेश देने वालों से करो, नीतियों से करो। पूरे समाज को बदनाम करके अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश मत करो।
#StudentPower #StudentProtest
दिल्ली पुलिस, मोदी-शाह की हुकूमत तो सुने ही, आम युवाओं! ये भाषण आपको ज़रूर सुनना चाहिए. इस आंदोलन में 23 दिन तक अनशन पर बैठी @neha_aisa का ये भाषण इस मोड़ पर बहुत ज़रूरी हस्तक्षेप है.