बाद तुम्हारे कोई
तुम सा रूबरू न हुआ....
जो इश्क़ तुम से हुआ
वो कभी भी
ख़ुद से भी ना हुआ !
तुझ से
बहुत मिलता है मिज़ाज मेरा...
मैं तुझसे कभी मिलती नहीं,
ना ही तूँ
मेरे रूबरू हुआ !
चूल्हा मिट्टी का
मिट्टी तालाब की
तालाब ठाकुर का
भूख रोटी की
रोटी बाजरे की
बाजरा खेत का
खेत ठाकुर का
कुआँ ठाकुर का
पानी ठाकुर का
खेत-खलिहान ठाकुर के
गली-मुहल्ले ठाकुर के
फिर अपना क्या?
गाँव?
शहर?
देश?
ओमप्रकाश वाल्मीकि
कैसे प्रकृति के लिए
गुलशन खिलें है …
जमीं पर कितने ख़ूबसूरती से
फूल खिलें है…
सर्द हवाओं के साथ में लेकर
जुलें जूलें है …
रास्ते भी सारे कैसे
जैसे दूध से धूलें है …
पतझड़ है कि क्या,इससे
कुछ फ़र्क़ पड़े है … (१)
#प्रियदर्शना
कोई रंग नहीं,सफ़ेदी के
नज़ारे धरती पर ढलें है …
जैसे श्वेत चूनर धरा के
बदन पर मली है …
प्रकृति सर्द रातों में “पियु”
मूक बधिर खड़ी है …
इंतज़ार में हैं गरमाहट की
किसी और की क्या पड़ी है…(२)
प्रियदर्शना~🥀
Leicester- United Kingdom 🇬🇧
Meet yourself in stillness.
Breathe.
Quite your mind.
Listen and learn.
Your soul is your teacher.
Listen to the silence,where your truth lives.
Have a beautiful morning and a Happy Thursday 🦚🦋🌼🌸😇
@BachchaniBharti
ये दुनिया उसके
पीछे दौड़ा करती है
जो सपनों के ख़ातिर
मेहनत के पीछे पड़ जाते है
पर उम्मीदों की शीलाओंका
महल तब खड़ा होता है
जब पत्थर पर पत्थर
चड्ढा होता है
प्रियदर्शना