बीजेपी के सीनियर लीडर और पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी के साथ होने वाला पॉडकास्ट रिलीज़ हो चुका है। इस पॉडकास्ट में उन्होंने नरेंद्र मोदी, बीजेपी की सियासत, आरएसएस के एजेंडे और मुसलमानों को लेकर बीजेपी और आरएसएस की सोच पर खुलकर बातचीत की है। उन्होंने बीजेपी की अंदरूनी प्लानिंग और आरएसएस की जो असल सोच है, उसे भी खुलकर बताया है। पहली मर्तबा किसी बड़े नेता ने इन बातों का इस तरह खुलासा किया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने यह भी बताया कि लालकृष्ण आडवाणी और दूसरे नेताओं को छोड़कर आखिर क्यों आरएसएस ने 2014 में नरेंद्र मोदी को वज़ीर-ए-आज़म का चेहरा बनाया था। पहली मर्तबा ये तमाम बातें सामने आई हैं। Millat Podcast पर यह इंटरव्यू रिलीज़ हो चुका है। अब जाइए, देखिए और अपना फ़ीडबैक हमें ज़रूर दीजिए। @Swamy39
इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता, उसका सिर्फ़ एक नाम होता है मोहब्बत।
सहारनपुर की सुनीता अरोड़ा 180 किलोमीटर का सफर तय करके जंतर-मंतर सिर्फ़ इसलिए पहुँचीं क्योंकि उन्होंने रोज़ एक नौजवान, मोहम्मद जुनैद, को बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद करते देखा था।
मुलाकात होते ही सुनीता जी की आँखें भर आईं। उन्होंने कहा "बेटा, तेरी माँ तुझसे मिलने सहारनपुर से आई है ऐसे ही हिंदू-मुस्लिम एकता और इंसानियत की मिसाल बनकर लोगों की सेवा करते रहना" यह दृश्य बता गया कि नफ़रत की दीवारें चाहे जितनी ऊँची हों, इंसानियत और मोहब्बत उन्हें हमेशा पार कर जाती है।
यही है भारत की असली पहचान प्यार, भाईचारा और इंसानियत।
18 साल की कुलसुम बानो को अजमेर में NEET एग्जाम सेंटर के अंदर जाने नहीं दिया जा रहा क्योंकि उसने बुर्क़ा और दुपट्टा पहना हुआ है
कुलसुम का कहना है कि NTA ने हमें ऐसे पहनावे की इजाज़त दी है तो ये लोग मुझे क्यों रोक रहें हैं जबकि 3 मई को भी इसी पहनावे में मैंने पेपर दिया था
कुलसुम ने कहा अगर मेरे पहनावे की वजह से मुझे सेंटर के अंदर जाने नहीं दिया जाएगा तो मैं परीक्षा ही नहीं दूंगी
अभी जिस तरह के सियासी माहौल बनाया है खासकर तथाकथित सेक्युलर पार्टियों के विधायक सांसद टूट कर भाग रहे हैं ऐसे में सब से ज़्यादा मुस्लिम समाज को झटका महसूस हो रहा क्यूं यह तथाकथित सेक्युलर पार्टियों के विधायक सांसद मुस्लिम समाज वोटों के आधार पर जीत दर्ज कर के विधायक सांसद बने थे ऐसे अब मुस्लिम समाज को तथाकथित सेक्युलर पार्टियों को पूरी तरह से छोड़ देना चाहिए और AIMIM को आंख बंद करके स्पोर्ट करना चाहिए और AIMIM से जितने वाले को यह अहसास होगा कि वोह मुस्लिम समाज के वोटों से जीत कर सदन में पहुंचा है
जो भी तथाकथित सेक्युलर पार्टियां हैं उन सभी के विधायक सांसद को बीजेपी से कोई दिक्कत नहीं है यही वजह थी सपा के विधायक बीजेपी के स्पोर्ट करने पहुंच गए आरजेडी के विधायक टूट गए टीएमसी का तो बुरा हाल है ही
अब मुस्लिम समाज को समझदारी का सबूत देना चाहिए दरी बिछाने के लिए तड़पना छोड़ दे
जिल्लत की जिंदगी से इज़्ज़त कि मौत बेहतर है
जो दुनियादार होंगे वोह तथाकथित सेक्युलर पार्टियों के पीछे चलेंगे और जिनका इमान जिंदा रहेगा वोह AIMIM के साथ खड़ा होना अपनी शान समझेंगे!
RSS मुखिया कहते हैं हिंदू धर्म को रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं।
लेकिन यहाँ 200 साल पुरानी मस्जिद को तोड़ा जा रहा है।दो सौ साल पहले रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ होगा शायद।
शिकायत नहीं कर रही हूँ क्योंकि अल्पसंख्यक मंत्री कहते हैं मुसलमानों पर ज़्यादती की कहानी कहकर देश को बदनाम न किया जाये
इन दिनों शामली की चांदनी कुरैशी और आयुष मलिक उर्फ़ मोहम्मद अली का मामला तेज़ी से चर्चा का विषय बना हुआ है और बनना भी चाहिए क्योंकि इस मामले में पुलिस की कार्यशैली न सिर्फ़ सवालों के घेरे में हैं बल्कि बता रही हैं कि कैसे दबाव में एक पूरे परिवार को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।
इसी हफ़्ते मुजफ्फरनगर के बघरा में आश्रम चलाने वाले यशवीर महाराज नामक व्यक्ति ने हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर लगातार प्रदर्शन किया और पुलिस को अल्टीमेटम देते हुए चांदनी कुरैशी के परिवार पर कार्रवाई की मांग की थी, आरोप था कि चांदनी कुरैशी नामक युवती ने आयुष मलिक नामक लड़के को अपने प्रेमजाल में फंसाकर उसका ब्रेनवॉश किया और उसको हिंदू से मुसलमान बनाया यानी आयुष का धर्मांतरण किया गया।
पुलिस ने यशवीर महाराज और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं की मांग पर आयुष के पिता की तहरीर पर FIR दर्ज की और FIR में डॉ चांदनी कुरैशी और उसके पिता, परिवार के सदस्यों और 3 मौलानाओं सहित 10 लोगों को नामजद किया, चांदनी कुरैशी और उसके पिता व घर की अन्य महिला को आयुष के जबरन धर्मांतरण के आरोप में तुरंत गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।
आयुष मलिक उर्फ़ मोहम्मद अली मीडिया के सामने आता है और कहता है "मैंने हिंदू धर्म किसी के दबाव में नहीं बल्कि अपनी मर्ज़ी से छोड़ा और इस्लाम धर्म क़ुबूल भी मैंने अपनी मर्ज़ी से किया है मुझ पर किसी का भी किसी भी प्रकार का कोई दबाव नहीं था, मैंने 12 साल पहले इस्लाम धर्म अपनाया और 4 वर्ष पहले चांदनी कुरैशी से निकाह किया, मैंने ख़ुद यूट्यूब से इस्लामिक जानकारी हासिल की और अपनी मर्ज़ी से मुसलमान बना लेकिन अब मुझ पर दोबारा हिंदू बन जाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है लेकिन मैं इस्लाम धर्म नहीं छोड़ूंगा।"
शामली पुलिस के अधिकारी की तरफ़ से बयान दिया गया कि "आयुष ने पाकिस्तानी मौलाना के वीडियो देखकर इस्लाम अपनाया और लगता हैं वह उस मौलाना के संपर्क में है!"
अधिकारी के इस बयान के बाद फैक्ट चेक हुआ तो पाया गया कि अधिकारी आयुष के जिस मौलाना के साथ संपर्क में होना बता रहे हैं उनका तो इंतिक़ाल भी 2010 में हो गया था।
ख़ैर आगे बढ़ते है और बात करते हैं उस कानून व्यवस्था की जिस पर पुलिस कभी ध्यान नहीं देती क्योंकि पुलिस को हिंदू संगठनों द्वारा रोज़ कोई न कोई मुस्लिम का मुद्दा दे दिया जाता है या यूं कहे कि पुलिस ख़ुद ऐसे मामलों का इंतेज़ार करती हैं, जिस यशवीर महाराज के अल्टिमेटम के बाद पुलिस चांदनी कुरैशी और उसके पिता, मौलाना सहित 10 लोगों के खिलाफ़ FIR दर्ज करती हैं वह महाराज ख़ुद सीना चौड़ा करके मीडिया इंटरव्यू में कहता है कि "मैंने मात्र 10 महीनों में ही 7 जिलों के 150 से अधिक मुस्लिमों का धर्मांतरण कर उन्हें हिंदू बनाया है।"
यशवीर महाराज रोज़ किसी न किसी मुस्लिम को हिंदू बनाने का दावा करता है लेकिन उसी यशवीर पर कार्रवाई करने की बजाय पुलिस उसके अल्टीमेटम के सामने काम करती हुई नजर आती है और उस लड़की व उसके परिवार को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया जाता हैं जिस पर यशवीर आयुष मलिक के धर्मांतरण का आरोप लगाता है, लड़का चीख चीख कर कह रहा है कि मैंने स्वेच्छा से इस्लाम धर्म क़ुबूल किया है लेकिन पुलिस और मीडिया ट्रायल में एक परिवार इंसाफ़ की जंग हारता जा रहा है और उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल उनका पाकिस्तानी कनेक्शन ( मीडिया ट्रायल में) दिखाया जा रहा है।
रोज़ उसी उत्तर प्रदेश से दर्जन भर ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें हिंदू लड़कों द्वारा मुस्लिम लड़कियों को हिंदू बनाया जाता हैं लेकिन उन मामलों का न मीडिया ट्रायल होता हैं और न ही पुलिस कार्रवाई में दिखते हैं, आप अनभिज्ञ नहीं हैं कि धर्म किसी से भी जबरन न क़ुबूल करवाया जा सकता है न छुड़वाया जा सकता है क्योंकि धर्म कोई डोर नहीं जो खींचने से टूट जाए, धर्म एक आस्था है धर्म एक यकीन है जो मानने वाले के शरीर के हर हिस्से में पाया जाता है, अंदर भरा होता हैं और अंदर समाया होता हैं जो तलाशने से भी नहीं मिलेगा।
किसी से भी कोई भी व्यक्ति न जबरन धर्म छुड़वा सकता है न कोई धर्म क़ुबूल करवा सकता है यह जानते हुए भी हर रोज़ मुस्लिम युवाओं पर हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण के केस दर्ज कर उनके परिवारों को तबाह किया जा रहा है, लेकिन शामली का प्रकाश में चल रहा मामला तो इतना खोखला है कि पुलिस की ईमानदारी साफ़ देखी जा सकती हैं कि पुलिस कितनी ईमानदार हैं और कितनी लोकतंत्र, स्वतंत्रता की रक्षा की जा रही हैं।
“पहले भोली लड़कियां और अब भोले लड़कों को फँसाया जा रहा है।”
हद हो गई है, इस देश में न कोई अपनी मर्ज़ी से शादी कर सकता है, न धर्म बदल सकता है। सब कुछ सरकार और उसकी पालतू मीडिया तय करेगी।
न धर्म की आज़ादी, न शादी की आज़ादी, न जीने की आज़ादी।
क्या देश बना दिया है इन लोगों ने !
Do yourself a favor,watch this video.
You will know why India is being turned into a living hell,not just for the 200 million Muslims, but also for anyone who wants to adopt Islam
While the Indian Constitution still says the country has freedom of religion
आयुष मलिक, मोहम्मद अली ने मीडिया के सामने कहा है कि मुझे किसी ने फोर्स नहीं किया, मैं अपनी मर्ज़ी से मुस्लिम बना हूँ और दाढ़ीरखकर मैंने हज़ूर की सुन्नत अदा की है, मैं नमाज़ पढ़ता हूँ, किसी का मुझ पर दबाव नहीं था न है, मेरी बीवी और ससुर को खामाखा परेशान किया जा रहा है।
यहीं नहीं शामली के एक वरिष्ठ अधिकारी मीडिया को बोल रहे हैं कि ये अभी भी डॉक्टर इसरार अहमद के संपर्क में हो सकता है जो पाकिस्तानी स्कॉलर हैं, जबकि हकीकत ये है कि डॉक्टर इसरार अहमद का २०१० में इंतकाल हो चुका है।
मुसलमानों के खिलाफ सिर्फ प्रोपेगैंडा और झूठा भ्रम फैलाया जा रहा है।
“अल्हमदुलिल्लाह नमाज़ फ़र्ज़ है मुझ पर आप जहां भी हो जैसे भी हो नमाज़ की फर्ज़ तो अदा करनी ही है”
“मैं मूर्ति पूजा नहीं करता था मेरा इस्लाम की तरफ़ रुझान बढ़ा और इस्लाम को पढ़ने लगा, सीखने लगा, जुड़ने लगा और फिर अपनाया”
आयुष मालिक की ये बातें सुनकर कौन कहेगा कि ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन हुआ है ?
Alhamdulillah i am muslim.... ओर मुझे किसी ने जबरदस्ती मुसलमान नही बनाया, मैंने अपनी मर्जी से अपनी खुशी से इसलाम कुबूल किया और आयुष से रहमान बना...
ये वही शामली के दवा कारोबारी देवराज सिंह का बेटा आयुष सिंह है जिसने चांदनी नाम की मुस्लिम लड़की से शादी की थी
आज आयुष (रहमान) ने खुद मीडिया के सामने आ कर अपनी बीवी चांदनी और उनके परिवार पर लगाए गए सभी आरोपी को खारिज कर दिया,
आयुष के पिता ने चांदनी और उसके परिवार पर बेटे को जबरन हिंदू से मुसलमान बनाने और ब्लैकमेलिंग, संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया था...
इस लड़के के ईमान को सलाम 🫡
भारत में हिन्दुओं की आबादी - 115 करोड़
भारत में मुस्लिम की आबादी - 21 करोड़
भारत में नॉनवेज हिन्दू आबादी - 65 करोड़
भारत में नॉनवेज मुस्लिम आबादी - 18 करोड़
भारत में हिन्दू का मासिक NV खर्च - 250
भारत में मुस्लिम का मासिक NV खर्च - 185
हिन्दुओं के प्रतिदिन बलि देने के स्थल - 4
मुस्लिम के प्रतिदिन बलि देने के स्थल - 0
फिर हम मुस्लिम को दोषी कैसे करार देंगे ज़ब हम अपने गिरेबान में नहीं झाँक रहे.
जीव हत्या हर रोज़ होती है.
मीट की दुकाने हर रोज़ खुली होती हैँ.
बीफ कारोबार में हम दूसरे नंबर पर हैँ.
हमारी होली दीवाली पर जमकर नॉनवेज खाया जाता है
किस मुँह से हम उनको दोषी मानेंगे?
और रोकेंगे तो क्या कारण देंगे?
شامیوں کو حج کرتے ہوئے دیکھ کر دل مسرت سے بھر گیا ساتھ ہی دل میں ایک درد اٹھا
کااش
فلسطینی بھی شامل ہوتے ۔
کاش وہ بھی شامیوں کی طرح سجدہ شکر ادا کررہے ہوتے
ان شاءاللہ اگلے سال ان شاءاللہ ہم دیکھیں گے یہ منظر کے غزاوی بھی عرفات کے میدان میں لبیک اللھم لبیک کی صدا لگا رہے ہونگے
सड़क पर होली मना सकते है ,
सड़क पर दिवाली मना सकते है ,
सड़क पर कावड़ यात्रा निकाल सकते है ,
सड़क पर शोभायात्रा निकाल सकते है ,
सड़क पर नवरात्रा में रामलीला हो सकती है ,
लेकिन जब मुसलमान मस्जिद या ईदगाह पूरी भरी होने की वजह से सड़क पर नमाज पढ़ ले तो उन पर FIR दर्ज हो जाती है,
सरकार कावड़ियों पर हेलीकाप्टर से फूल बरसाती है और जब मुसलमान सड़क पर मस्जिद में जगह ना होने की वजह से पढ़ ले तो उन पर लाठियाँ चलाई जाती है ,
पुलिस प्रशासन तो घर में नमाज पढ़ने वालो पर भी FIR दर्ज कर देती है , किसी मकान में दोस्त रिश्तेदार 8 - 10 लोग मिलकर नमाज पढ़ ले तो उनपर FIR दर्ज कर लीं जाती है ,
अगर भारत का लोकतंत्र समानता का अधिकार देता है तो मुसलमानो के लिए कानून अलग क्यों ?
मुसलमानो के साथ भेदभाव क्यों ?
बिहार: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज निवासी मौलाना तौसीफ़ के साथ ट्रेन में हुई घटना और बाद में बरेली (यूपी) में उनका शव मिलना बेहद चौंकाने वाला और निंदनीय है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन एडवोकेट ने बिहार सरकार और रेल मंत्री से मांग की है कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए फौरन उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की।
अमेरिका और इज़राइल के मीडिया की तरफ़ से पूरी ताकत के साथ यह दावा किया जा रहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर, अल्लामा सैयद आयतुल्लाह ख़ामनेई की शहादत हो चुकी है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्र के नाम संबोधन में यही दावा किया, और अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट से इसी बात को दोहराया है।
दूसरी ओर, ईरान के तमाम स्रोत इन खबरों को पूरी तरह गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम लीडर ज़िंदा हैं और पूरी तरह से स्वस्थ हैं। ईरान के कई लोग यह भी कह रहे हैं कि सुप्रीम लीडर वॉर रूम में मौजूद हैं और सीधे तौर पर यह मार्गदर्शन दे रहे हैं कि किस पर, कैसे और कहाँ हमला करना है। कुछ ही मिनट पहले सुप्रीम लीडर के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट भी किया गया, जिसमें हैदरी तलवारों की तस्वीर के साथ यह संदेश दिया गया कि हर फ़िरऔन के लिए कोई न कोई मूसा होता है।
जंग के दौरान दुश्मन का एक एजेंडा होता है—झूठी खबरें और फेक न्यूज़ फैलाना, और मनोवैज्ञानिक रूप से अपने विरोधी को कमजोर करना। कहा जा रहा है कि अमेरिका और इज़राइल का असली मकसद ईरान पर हमला करके वहाँ की सरकार को बदलना, इस्लामी गणतंत्र के निज़ाम को खत्म करना और अपनी पसंद की हुकूमत स्थापित करना है।
सुप्रीम लीडर की मौत की खबर फैलाने का उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि लोग सड़कों पर निकलें, बगावत का माहौल बने और अंदरूनी अस्थिरता पैदा हो। एक दूसरा अनुमान यह भी है कि बार-बार ऐसा दावा करके सुप्रीम लीडर को अपनी मौजूदगी साबित करने पर मजबूर किया जाए, ताकि किसी तरह उनकी लोकेशन तक पहुँचा जा सके।
इन सबको झूठा प्रोपेगेंडा बताया जा रहा है और कहा जा रहा है कि सुप्रीम लीडर ज़िंदा और सुरक्षित हैं। इसे हक़ और बातिल की जंग के रूप में भी पेश किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि अमेरिका और वैश्विक ताकतों का एजेंडा ईरान के इस्लामी निज़ाम को खत्म करना और अपनी मर्जी की सरकार कायम करना है। ईरान और अल्लामा आयतुल्लाह ख़ामनेई के लिए दुआ की अपील की जा रही है।
अमेरिका और इज़राइल ने एक साथ मिलकर ईरान पर हमला किया और दावा किया कि उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर, राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और सेना के अहम कमांडरों को मार गिराया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ मिनट का एक वीडियो जारी कर ईरानी जनता से कहा कि अब तुम अपनी सरकार खुद बना लो, तुम्हें रेजीम चेंज करने का मौका दिया जा रहा है।
लेकिन सिर्फ एक घंटे के भीतर ही ईरान ने जंग का नक्शा बदल दिया। ईरान ने इज़राइल के विभिन्न इलाकों को निशाना बनाया और क्षेत्र के अलग-अलग देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। बहरीन में मौजूद अमेरिका के पाँचवें नौसैनिक बेड़े पर भी लगातार हमले किए गए, जिससे पूरा मध्य पूर्व डर और दहशत में आ गया।
अब तक ईरान ने इज़राइल के अलावा सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, इराक, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को पूरी ताकत से निशाना बनाने का दावा किया है और इस ऑपरेशन का नाम “फतह-ए-खैबर” रखा है।
एक तरफ दुनिया की बड़ी ताकतें एक साथ दिखाई दे रही हैं, जबकि दूसरी तरफ ईरान अकेले उनका मुकाबला कर रहा है। ईरान की नौसेना ने ऐलान किया है कि आज रात वह दुनिया को अपनी नई ताकत का एहसास कराएगी। इज़राइल भर में सायरन बज रहे हैं और तेल अवीव समेत कई शहरों में सैन्य ठिकानों के तबाह होने की खबरें सामने आ रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति को शायद अंदाजा नहीं था कि ईरान का जवाबी हमला इतना गंभीर और खतरनाक साबित होगा।
#Iran #IsraeliranWar
The chief minister of India's Bihar state has sparked outrage for pulling down a Muslim doctor’s face veil during a public event where newly-recruited alternative health practitioners were given their letters of appointment.