हम आप वैज्ञानिकों के शोध पर भरोसा कर लेते हैं, उन्हें गीता-कुरान मान लेते हैं। फिर नाम बीएचयू जैसे संस्थान का हो तो भरोसा दोगुना होता है। @VCofficeBHU
बीएचयू के एक शोध पर जीने मरने जैसा विवाद सामने आया है। कोवैक्सीन पर हुए एक शोध में उसके दुष्प्रभाव को लेकर लंबी चौड़ी फाइंडिंग्स थी।
बकायदा बाकी अखबारों ने छापा था कि कोवैक्सीन लगावाने वालों में त्वचा और बाल झड़ने जैसी दिक्कतें आ रही हैं। 30 फीसदी में सांस की परेशानी, खून का थक्का जमना और मासिक धर्म संबंधित विकार हो रहे हैं।
लेकिन जब हमने @AU_VaranasiNews हमारी इस मिसिंग खबर पर फॉलोअप किया तो पता चला कि ये शोध फर्जीवाड़े का पुलिंदा है। मरीजों का डेटा फोन पर ले लिया है। और तो और न शोध में शामिल मरीज ने कोई साइड इफैक्ट बताया है न किसी डॉक्टर से उसे क्रॉस चैक करवाया।
उस पर बिना पूछे आईसीएमआर का नाम भी जोड़ दिया गया। @ICMRDELHI
तो अगर आप भी इस बात पर अपना बीपी चढ़ा उतार रहे हैं कि आपने कौन सी वैक्सीन लगवाई है और आपके पैर लगभग कब्र में हैं तो जीवन मरण महादेव पर छोड़ दें। ये कोविड पर रिसर्च का कारोबार है मेरी जान इसे फर्जी शायरी समझकर भूल जाएं। और ध्यान रहे इतनी जल्दी दुनिया के परपंचो से छुटकारा नहीं मिलने वाला।
जय हिंद।
सच दिखाती हमारी दो खबरें पढ़ें जिन्हें रबीश ने ब्रेक किया है। @RABISHSRIVASTA4
#BHU #Varanasi #Covid #covaxine @MoHFW_INDIA@mansukhmandviya
ये संतोष तिवारी हैं। 32 सालों से रामलला की पूजा कर रहे हैं।
सुबह अपने लल्ला के कानों में मंत्र सुनाकर उन्हें जगाना और फिर रात को थपकियां देकर, लोरी गाकर चारों भाईयों को सुलाना।
बाबरी के गुंबद के नीचे, फिर कटे फटे तिरपाल में और पिछले चार साल से लकड़ी की कुटिया में वो राम काज में लगे हैं। कहते हैं हमें लल्ला से मोहब्बत हो गई है, कई बार मन करता है उन्हें सीने से चिपका लें।
#Ayodhya #RamLalla #SabkeRam
लल्ला जब रात में सोइंहें, सुबह उठकर देखिहैं, तो सोचिहैं, हम ई कहां कुटिया से महल मा आ गए
रामलला विराजमान की शिफ्टिंग दो दिन टली, अब 21 की रात नए महल में सोएंगे रामलला
उपमिता वाजपेयी, अयोध्या।
लल्ला जब रात में सोइंहें, सुबह उठकर देखिहैं, तो सोचिहैं, हम ई कहां आई गए, कुटिया से महल मा। बाबरी के गुंबद, टूटे-फटे तिरपाल और फिर लकड़ी की कुटिया में रामलला की 32 साल करनेवाले पुजारी संतोष तिवारी अपने लल्ला की बात इसी भाषा में कहकर सुनाते हैं। कहते हैं, 21 जनवरी को जब रामलला को शयन आरती के बाद नए मंदिर में सुलाने ले जाएंगे तो रामलला अगली सुबह आंखे नए महल में खोलेंगे। शायद प्रभु राम भी हैरान रह जाएंगे खूबसूरत सा महल देखकर।
वो कहते हैं, इतने साल दिन रात पूजा कि है लल्ला की, अब तो मोहब्बत हो गई है उनसे। उन्हें सुबह मंत्र सुनाकर उठाना। मंगला आरती करना। बिना बत्ती जलाए, बिना घंटी बजाए, बिना शोर, धीमे से रामलला को जगाना। फिर उनका स्नान, श्रृंगार, भोग, रास, पूजन। फिर रात को शयन आरती के बाद उन्हें सिंहासन पर ही लेटा देना। कुछ देर चारों भाईयों, राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न को थपकियां देना। लोरियां सुनाना और फिर रजाई ओढ़ा देना। 32 सालों की यादें हैं।
फिलहाल रामलला के सभी कपड़ों की पैकिंग हो गई है। एक्स्ट्रा बिस्तर, रजाई भी बांध लिए गए हैं। ये सब वहां उनके लिए बने नए कमरों में साथ जाएंगे। हां बर्तन 21 तारीख को भोग के बाद बांधे जाएंगे।
पहले रामलला विराजमान को 19 तारीख की रात ही नए मंदिर में ले जाया जाना था। संतोष तिवारी कहते हैं, कोई भी विग्रह 24 घंटे बिना भोग-पूजन के नहीं रह सकता। वरना उसकी दोबारा प्राण प्रतिष्ठा करना होती है। और अगर 19 तारीख को लल्ला नए मंदिर चले जाते तो नए विग्रह के सामने उनका पूजन होता, भोग लगता। तो क्या नए प्रभु राम को बुरा नहीं लगता। वो ये नहीं कहते कि हम अभी अधिवास में हैं, अन्न, जल, औषधी में डूबे हैं, सिर्फ सूखे मेवे खा रहे हैं और रामलला विराजमान को भोग लगाया जा रहा है। इसलिए पुजारी, आचार्य और ट्रस्ट ने तय किया की अब रामलला विराजमान भी 21 की रात को ही नए महल में जाएंगे। ताकि दोनों को साथ भोग लगे। 22 की सुबह रामलला को छप्पन भोग लगाया जाना है। 21 जनवरी को रामलला विराजमान पांचों आरती के बाद नए महल में ले जाए जाएंगे। वहां जाकर सोएंगे और अगले दिन 22 जनवरी को नए मंदिर में उनकी सुबह होगी। हां कई सालों बाद उन्हें दो दिन के लिए बिना भक्तों के रहना होगा। क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के चलते दो दिन दर्शन बंद हैं।
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