किसी फल की आशा से जब तुम कर्म करते हो और उस प्रक्रिया में किसी को सताते या दुख देते हो, तो बंधन बन जाता है। कामना बंधन बन जाती है। अगर निष्काम होते हो तो बंधन नहीं बनता है। सकाम कर्म ही बंधन का कारण बना था, अब निष्काम कर्म से ही मुक्त होगे।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
अध्यात्म अंधी यात्रा नहीं; बल्कि जागरूकतापूर्ण खोज है। भगवान तुम्हारे सामने है, चहुँ ओर है, लेकिन पर्दा हटाने के लिए सच्चा गुरु चाहिए।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🌹
🏵️श्री सिद्धार्थ रामायण 🏵️
🍁भगवान राम भारत की आत्मा हैं!
🍁भारत की चेतना जब विदेशी आक्रांताओं से लुट-पिट सी गई थी, तब उस तार-तार हो गई चेतना में पुनः प्राण संचारित करने के लिए प्रभु ने गोस्वामी तुलसीदास जी के माध्यम से जन भाषा में प्रभु राम की गाथा को उतारा था।
-जिसने भारत की सोयी और आक्रांत चेतना में पुनः प्राण फूंक कर उसे पुनर्जीवित कर दिया था।
-आज तुलसीकृत रामायण सनातनियों के घर- घर में सुशोभित है।
🍁सतयुग के आगमन की शुरुआत हो चुकी है..!
दोबारा फिर से प्रभु श्री राम की गाथा उतर रही है!
इस बार प्रभु ने “समर्थगुरु श्री सिद्धार्थ औलिया” जी को माध्यम चुना है!
-भविष्य में घर- घर में इसका पाठ होगा!
💐यह परम पावन और पुनीत ग्रंथ प्रकाशित हो गया है। आप “समर्थगुरु धारा” (ओशोधारा)आश्रम से इसे प्राप्त कर सकते हैं!
🛕🚩श्री सिद्धार्थ रामायण🚩🛕
💐 अयोध्या कांड 💐
।।116।।
“ हम तपस्वी हैं तप का मिला फल हमें;
राम सीता लखन तुम ने दर्शन दिए ।
तुम यशस्वी हो हे महामानव भरत;
भाई हो तो भरत सा कहेगा जगत।।”
🎶ॐ जय जय सियाराम🎶जय जय सियाराम 🎶 ॐ जय जय सियाराम
।।117।।
“ भरत ने कहा धन्य धन्य मुनिवर हुआ;
रोष माँ से न मेरा, है जो कुछ हुआ।
सोचता हूँ मगर राम का कष्ट जब;
हृदय फटता है स्वीकार होता न तब।।”
🎶ॐ जय जय सियाराम🎶जय जय सियाराम 🎶 ॐ जय जय सियाराम
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💐श्री सिद्धार्थ रामायण सत्संग💐
💐 गोरख गीता सत्संग 💐
Youtube पर Samarthguru Dhara Live channel पर प्रत्येक शनिवार शाम 6.00-7.00 Pm “श्री सिद्धार्थ रामायण” तथा प्रत्येक रविवार शाम 6.00-7.00 Pm समर्थगुरु द्वारा रचित “गोरख गीता” पर सत्संग चल रहा है, सभी सियाराम और गुरु गोरखनाथ जी के प्रेमियों का इस दिव्य सत्संग में हार्दिक स्वागत है!
🕉️🙏जय समर्थगुरु 🙏🕉️
@SiddharthAulia
@ShriSiddharthRamayan
@narendramodi@myogiadityanath@SudhanshuTrived@JaipurDialogues
Yoga, Ageing, and Dementia!Acharya Kuldeep from #SamarthGuruDham (Murthal) delivered an impactful presentation at the workshop organized by PGI Chandigarh today.He highlighted the vital role of Yoga in promoting mental wellness and managing dementia during old age. #PGIchandigarh
साधकों के ही प्रति नहीं बल्कि विश्व में सद्धर्म की स्थापना के लिए, खास करके जो शुभ शक्तियां हैं, शुभ लोग हैं उनकी रक्षा के लिए सूफ़ी बाबा, सूफ़ी मिस्टिक ग्रुप के अंग-संग हैं। भारत की रक्षा मे दिव्य उपस्थिति के रूप में सूफ़ी बाबा निरंतर सहयोग करते रहते हैं।
💚 -Samarthguru 💚
साक्षी का अर्थ है निराकार के तल पर,आत्मा के तल पर जीना-सब्जेक्टिव लिविंग। संसार हो या परमात्मा, दोनों के प्रति जागरण निराकार के तल पर ही संभव है।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
आत्मभाव का पहला चरण है कि मैं देह नहीं हूँ। अधिकतर लोग देहभाव में जीते हैं। जब तक देहभाव है, तब तक आत्मभाव नहीं हो सकता।तो देह भाव से आगे बढ़ना है,तभी आत्मभाव तक जा सकते हैं। अभी तक देह से हमारा तादात्मय है। यह जो तादात्म्य हमने बना लिया है,उस तादात्म्य को तोड़ना है।
-Samarthguru
आपके पास सब कुछ है,लेकिन फिर भी आपको लगता है कि कुछ कमी है,मुझे लगता है कि मेरे पास कुछ भी नही है। यह जो मनोदशा है,इसका नाम है खालीपन। इस खालीपन को भरने की यात्रा का नाम है-अध्यात्म। खालीपन महसूस होने लगा,वैराग्य जैसी हालत है। आनंद आपके खालीपन को भर सकता है।
-Samarthguru 🏵
1. अधिक से अधिक प्रकृति को देखने की आदत डालो।
2. Count your blessings. जो तुम्हें जीवन में मिला है और जो तुम्हारे पास है, उस पर ध्यान दो।
3. दिन में कम से कम 40 बार Thank you बोलो।
अगर ये तीन काम तुमने किए, तो तुम्हारे जीवन में अहोभाव उतर आएगा।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
चिंता से मुक्त होने का उपाय है मंगल भाव। भीतर मंगल भाव पैदा करो। परमात्मा मंगलमय है, गुरु मंगलमय है, सृष्टि मंगलमय है। परमात्मा को मंगलमय जानते हुए स्वधर्म का पालन करो। जैसे-जैसे मंगल भाव बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे तुम चिंताओं से मुक्त होते जाओगे।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
भले-बुरे का ज्ञान जो होता है,अर्थात जिसको संतों ने 'हंस बुद्धि' कहा है,वह विवेक है। जब तक नाम तत्व को नही जाना,तब तक विवेक पूरी तरह जागा नहीं। प्रज्ञा अर्थात् समझ के साथ जीना विवेक है।शुभता का मार्ग विवेक है।निर्णय लेने की क्षमता विवेक है। विवेक सत्संग से पैदा होगा।
-Samarthguru
ब्रह्म सृष्टि का रचनाकार है। ब्रह्म सौंदर्य का प्रेमी है।यह नीले आकाश,उड़ते मेघो,उडते पक्षी,नदी के प्रवाह को देखो,चांद को देखो! कैसी सुंदर सृष्टि है!क्योकि ब्रह्म सुन्दरम् का पक्षधर है।दिन-ब-दिन वह सुंदर किये चला जाता है।ब्रह्म के सिवा सृष्टि की रचना कोई नही कर सकता।
-Samarthguru
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