@sureshpprabhu रेल के सिस्टम में लाया गया निवारण NIVARAN पोर्टल वाकई में सिस्टम को पारदर्शी बनाने और रेल को वैभव की ओर लेकर चल चुका था, लेकिन आपके जाते ही NIVARAN दम तोड़ गया और आम रेलकर्मी की आशाओं और आकांक्षाओं पर पानी फिर गया
ऐसा रेलकर्मी बताते हैं
@bstvlive@b_bhushansharan देरी पर गाय का दूध 30,35 रुपए लगता है मुश्किल से, अपने खाने के लिए दूध और गाय के चारा भूसा के लिए पैसा मिल जाता है बस, मेहनताना नहीं निकलता, वही दूध डेरी से खरीदो तब 60 का ��ड़ता है।
हां भैंस का दूध 60,80 तक लग जाता है
@PMishra_Journo यूपी के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के शिक्षकों का मामला,दोनों बेंच जीतने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा,वहां 1.5 साल बाद लाखों खर्च के बाद पुनः High court भेज दिया गया,
अब वहां ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद शीतकालीन अवकाश उसके बाद फिर ग्रीष्मकालीन अवकाश, यही चल रहा है,5 साल हो गए।
@LiveLawIndia यूपी के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के शिक्षकों का मामला,दोनों बेंच जीतने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा,वहां 1.5 बाद लाखों खर्च के बाद पुनः High court भेज दिया गया,
अब वहां ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद शीतकालीन अवकाश उसके बाद फिर ग्रीष्मकालीन अवकाश, यही चल रहा है,5 साल हो गए।
@MuditUpdates लक्ष्मीकांत जी को सोने की रामायण ट्रस्ट को वापस कर देना चाहिए, जिससे वो उसे कही और स्थापित कर सकें, जिससे उनको ख्याति और यश युगों युगों तक मिलता रहे, और
जिन्हें भी अपने दान की चिंता है, उनके दान को TV के सामने ट्रस्ट को वापस करके प्रभु के मंदिर को लांछन मुक्त कर देना चाहिए।
@AnilYadavmedia1 Upके कस्तूरबा विद्यालयों का ममला है 6साल हो गए,पूर्ण योग्यता र��ने वाली शिक्षिकाओं को डिमोट करके 22k से 9.8k पर कर दिया गया high court जीतने के बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट गई,वहां से फिर high court भेज दिया गया,अब सरकारी वकील उपस्थित ही नहीं होते,डेट पर डेट लग रही है 70 लाख खर्च हो गए
@dibang शिक्षा या शिक्षक दोनों की स्थिति देश के भविष्य का प्रतिबिंब है और यह एक दायिनीय स्थिति है । सरकार और सत्ता को इससे कोई लेना देना नहीं है । ९३००० सरकारी स्कूलों का बंद होना एक और उधारण है जो सरकार के रुख़ को काफ़ी हद तक साफ़ करता है । देश में इस पर कोई बहस नहीं है । भगवान बचाए ।
@dibang अनुदेशक से भी ज्यादा योग्यता रखने वाले कस्तूरबा के अंशकालिक शिक्षकों का वेतन 9800 ही है, जबकि उनको सुप्रीम कोर्ट की लताड़ के ���ाद 17000 दिया जा रहा
न्याय व्यवस्था तो है ही दयनीय, ऊपर से सरकार का रवैया बेहद ही निराशाजनक है
बताइए 6 साल हो गए, हजारों शिक्षकों को न्याय नहीं मिल रहा है
लगता है पूरी स्थिति की जानकारी नहीं यूपी में प्राथमिक शिक्षक भर्ती 8 साल पहले आई थी हम लोग सरकारी कॉलेज से शिक्षा प्रशिक्षण कर चुके हैं 33 पेपर पास कर चुके हैं केंद्रीय टीचिंग एलिजिबिलिटी टेस्ट सहित लेकिन 8 साल से मौका नहीं मिला हम नहीं कहते हमको नौकरी दे दो लेकिन हमको एक चांस तो दो 8 साल से लेकि�� आप लोग कोई भी किसी को पता ही नहीं चल रहा है जैसे हम लोग का किसी अलग दुनिया में हमारे लोगों का शोषण हो रहा है हमारे लोगों की स्थिति दिन बाद दिन इतनी खराब हो जा रही है की बात नहीं सकते
@dibang सालों से पढ़ा रहे जिन योग्य संविदा शिक्षकों को केवल पुरुष होने के नाते निकाल दिया गया, और शिक्षिकाओं को 22k से सीधा 9.8k देकर डिमोट कर दिया गया उनकी आत्मा रो रही है,high court की दोनों बेंच जीतने के बाद भी अधिकारी न्याय न देकर कोर्ट के चक्कर लगवा रहे हैं @myogioffice@UPGovt
@dibang 60,70 लाख खर्च हो गए वकीलों की फीस और अन्य न्यायिक प्रकिया में, अब पीड़ित थक हार चुके हैं
दो बेंच में जितने के बावजूद
उनकी आत्मा रो रही है और सरकार कोर्ट में दौड़ाए जा रही है
@dibang कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के कुछ संविदा शिक्षिकाओं का वेतन 22k से 9k कर दिया गया, तथा पुरुष होने के नाते शिक्षकों को निकाल लिया गया,high court की दोनों बेंच जीतने के बाद @CMOfficeUP सरकार SC कोर्ट ले गई,वहां से फिर high court आ��ा
यहां सरकारी वकील खड़े नहीं होते,6 साल हो गए
@CMOfficeUP@myogioffice@thisissanjubjp@UPGovt@barandbench High court जितने के बाद सुप्रीम कोर्ट में सरकारी वकील ने कहा हमें सुना नहीं गया, अब जब डेट पर डेट लग रही है तो वकील अनुपस्थित रहता है
मिशन शक्ति के वर्जन बदलने से मातृ शक्ति का विकास नहीं होगा केवल,कम से कम न���याय दीजिए
@dibang पता नहीं कब तक न्याय मिलेगा इस ढीली न्याय व्यवस्था में और जिस पर सरकारी वकील आए दिन गायब रहता हैं 6 साल कम समय नहीं होता और जो 22000 से 9 000 पर डिमोट कर दिए गए वो तो न जी प रहे ना मर पा रहे