SC ST एक्ट का विरोध ऐसे कर रहे हैं जैसे घर में सोये हो और sc st एक्ट लग गया।
तुम अपराध करोगे नहीं तो डर किस बात का।
भारत में तो आतंक विरोधी कानून है तो क्या सभी पर लग जायेगा।
मेरिट वालों के कारनामे.....!
SDM की बेटी को लगाया एक्सपायरी इंजेक्शन!
इंजेक्शन लगाने वाले मेरिटधारी का नाम *देव कुमार दूबे*...!
मामला प्रतापगढ़ का -
➡एसडीएम की बेटी को लगाया गया एक्सपायरी इंजेक्शन
➡फार्मासिस्ट पर एक्सपायरी इंजेक्शन लगाने का आरोप
➡8 साल की बेटी को बुखार पर CHC लालगंज ले गए थे
➡पैरासिटामोल इंजेक्शन की एक्सपायरी जून 2026 थी
➡एसडीएम लालगंज वाचस्पति सिंह ने की शिकायत
➡डीएम और सीएमओ से की गई मामले की शिकायत
➡मामले में सीएमओ ने मेडिकल स्टोर को किया सील
➡दो फार्मासिस्ट पर भी कार्रवाई, किया गया निलंबित
➡स्टोर प्रभारी अरविंद कुमार शुक्ला भी हुआ निलंबित
➡इंजेक्शन लगाने वाले देव कुमार दूबे भी निलंबित
➡CHC लालगंज में सामने आया लापरवाही
Doctors Name —
• SONAL AGRAWAL (Savarna)
• NIDHI PANDEY (Savarna)
When the pregnant woman could not pay these UC doctors Rs. 30,000, they k*lled the pregnant woman and her child.
Now let's blame Ambedkar and the reservation. Btw only infertile women can do politics on this issue.
मेरिटधारी डॉक्टर बने हत्यारे!
MP के रीवा में कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाया गया। अचानक वह डिलीवरी रूम से बाहर निकली और चिल्लाने लगी; "पापा मुझे बचा लो, ये मुझे मार डालेंगे।"
पिता ने समझा-बुझाकर उसे अंदर भेज दिया। थोड़ी ही देर में जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। काश, पिता ने अपनी बेटी की आशंका सुन ली होती, तो शायद आज वह बच गई होती। डॉक्टरों की क्रूरता और लापरवाही के चलते जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई।
घटना संजय गांधी अस्पताल की है। जब महिला के परिजनों ने इसकी शिकायत अस्पताल अधीक्षक राहुल मिश्रा से की, तो उसने बेहद असंवेदनशीलता से उन्हें डांटते हुए कहा;
"उसे 22 साल में ही गर्भवती क्यों कर दिया?"
बताइए, जिस अस्पताल में ऐसे निर्मम लोग अधीक्षक होंगे तो सोचिए वहाँ की नर्सें और डॉक्टर कितने संवेदनहीन होंगे।
परिजनों ने आरोप लगाया कि डिलीवरी के लिए उनसे ₹30,000 रिश्वत मांगी गई थी। उन्होंने पैसा नहीं दिया, तो डॉक्टरों ने जच्चा-बच्चा की हत्या कर दी। इस मामले में अस्पताल की डॉ. सोनम अग्रवाल और डॉ. निधि पांडे को निलंबित किया गया है।
लेकिन ये निलंबन काफी नहीं है। परिजनों के साथ बेहद क्रूरतापूर्ण एवं असंवेदनशील तरीके से बात करने वाले अस्पताल के अधीक्षक राहुल मिश्रा एवं अन्य सभी जिम्मेदार डॉक्टरों पर त्वरित कार्रवाई करके उन्हें जेल भेजा जाए।
कहाँ गए वो मेरिटधारी लोग, जो दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को -40 नंबर वाला कहकर अपनी जाहिलियत दिखाते हैं? अपने मेरिटधारी डॉक्टरों की क्रूरता देख लो।
हा ब्राह्मण पूरे देश में एक रहेगा,
क्षत्रिय पूरे देश ने एक रहेगा,
वैश्य भी एक रहेगा पूरे देश में,
लेकिन शुद्र को हर जगह अलग अलग वर्गीकरण में बांटा जाएगा। जिससे वो सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति ना बन पाए।
पहले ही शूद्र को स्पर्शय और अस्पृश्य में बाँटकर आपस में ही एक दूसरे का शत्रु बनाकर सदियों तक धूर्त जातिवादियों ने अपना हित साधा है।
सारे बहुजनों को चाहे वो ओबीसी, एससी, एसटी कोई भी हो सबको एक होकर रहना होगा, उसी में हमारी शक्ति है।
EWS आरक्षण जनरल कैटेगरी के गरीब बच्चों के लाभ के लिए आया था परंतु इस समाज के संपन्न परिवारों ने पूरे गरीब सवर्णों का हक मारकर रखा है
इसका सबसे बड़ा सबूत है The Indian Express द्वारा UPSC 2025 में ईडब्ल्यूएस कोटे से सिलेक्ट हुए छात्रों पर जारी रिपोर्ट 👇🏻
रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में में ईडब्ल्यूएस कोटे से यूपीएससी परीक्षा पास करने वाले कुल 104 कैंडिडेट थे। बड़ी हैरानी की बात है कि इनमें से अधिकांश बहुत ही संपन्न परिवार के लोग थे
रिपोर्ट के अनुसार:-
1)- कम से कम 67 छात्र किसी बड़े कोचिंग संस्थान से पढ़े
2)- कम से कम 46 काफी महंगे प्राइवेट स्कूलों में पढ़े
3)- कम से कम 28 छात्रों के परिवार के पास अपना खुद का व्यवसाय था
4)- कम से कम 10 छात्र पहले से निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे थे
5)- कम से कम 14 छात्र IIT से पढ़े हुए थे
हैरानी की बात है कि जो EWS आरक्षण सवर्ण समाज के उन परिवारों के लिए लाया गया जो आर्थिक तौर पर सक्षम नहीं है, उस आरक्षण को संपन्न लोगों द्वारा हाइजैक कर लिया गया
और भी अधिक हैरानी की बात यह है कि ये लोग SC,ST, OBC के जातिगत आरक्षण को जबरन टार्गेट कर रहे हैं और आर्थिक आधार पर करना चाहते हैं....अरे भाई पहले अपने समाज के गरीबों का हक खाना तो छोड़ो उसके बाद दूसरे समाज के गरीबों की सोचना
जिस दिन SC/ST/OBC आरक्षण का आधार भी आर्थिक हुआ तो गरीब वर्ग बिल्कुल उसका फायदा नहीं ले सकता, जैसा अभी ईडब्ल्यूएस में देखने को मिल रहा है...!!
जाति प्रमाण पत्र जलाने से जातिवाद ख़त्म,
बीपीएल कार्ड जलाने से ग़रीबी ख़त्म,
कैंसर की रिपोर्ट जलाने से बीमारी खत्म,
अगर किसी दिव्यांग का प्रमाण पत्र जला दें तो सीधा वो रेस करता हुआ दिखेगा ओलंपिक में ..
ऐसे दो कौड़ी के लॉजिक लेकर ये आंदोलन करने निकले है 👇🤡
"BJP हटाओ, आरक्षण बचाओ।" 🔥
आज उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी एवं "आरक्षण हटाओ आंदोलन" के नेताओं के बीच हुई बैठक इस बात की पुष्टि करती है कि यह पूरी मुहिम BJP द्वारा पोषित है।
अतः मैंने बसपा, सपा, कांग्रेस सहित सभी प्रमुख विपक्षी दलों को पत्र लिखकर अपील की है कि वे यूपी विधानसभा चुनाव में SC, ST और OBC वर्गों के आरक्षण को प्रमुख मुद्दा बनाएं और "BJP सत्ता में आई तो आरक्षण खत्म कर देगी" को प्रचार का केंद्र बिंदु बनाकर इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं।
अगर ऐसा हुआ, तो प्रदेश के युवा इस बार BJP को सत्ता से अवश्य बाहर करेंगे, क्योंकि आरक्षण भारतीय संविधान में वंचित बहुजनों को मिल रहे प्रतिनिधित्व का आधार है। संज्ञान लें;
@Mayawati@yadavakhilesh@kharge@RahulGandhi
"Dalit-Adivasi students are becoming doctors with -40 marks" you've probably heard this line before. Here's the truth: the General category is a flat zero out of 800. And this exact rule existed in 2023 too, with zero outrage back then. Full data breakdown in the video.
“पानी नहीं मूत पिलाएँगे”. दलितों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने वाले और उनको सार्वजनिक तौर पर अपमानित करने वाले इस जातिवादी को देखिए। माननीय सुप्रीम कोर्ट से कहना है की ये किसी कमरे के अंदर नहीं बल्कि सार्वजनिक रूप से कहीं गई बात है। @DelhiPolice
बताओ, एक अधिकारी दलितों को सड़क पर पीटता है, उन्हें गाली देता है। उसे दलित समाज का सच्चा प्रहरी, न्याय और समानता का प्रतीक बताया जा रहा है।
ऐसे हर ज़ुल्म का समर्थन करता ब्राह्मण मिल जाएगा बस शर्त ये है कि जुल्मी ब्राह्मण होना चाहिए।
भारतीय सभ्यता में ब्राह्मणों का इतना नैतिक पतन होने में सदियाँ लगी है।
अहंकार देखो SSP पांडे का . "सड़क तुम्हारे पिता की नहीं- सड़क गंदी कर दी "! ऐसे महानुभाव निकल रहे हैं Civil Services से? ये हिम्मत धार्मिक जुलूस में सड़क जाम और गन्दा करने वालों पर क्यों नहीं दिखाई देती . पुलिस में ऐसी सामंती सोच की कोई जगह नहीं!
मेरठ में ललिता गौतम को न्याय दिलाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ पुलिस द्वारा कथित रूप से दुर्व्यवहार और मारपीट की घटना बेहद चिंताजनक है।
भारत के संविधान का अनुच्छेद 19 प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी बात रखने तथा विरोध दर्ज कराने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ बल प्रयोग किया गया तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच होनी चाहिए। तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध उचित कार्यवाही की जानी चाहिए।