@DrRanjeetMeena@ECISVEEP शिक्षा इनके एजेंडे में है ही नहीं तो ये क्यों सोचे किसी के भविष्य के बारे में ये तो केवल अपना मतलब देखेंगे, बच्चों को अर्धवार्षिक परीक्षा के बीच में चुनाव कराना कहा तक उचित है, क्या विभागों में आपसी सामंजस्य नहीं है , या शिक्षा विभाग की परवाह कोई करता ही नहीं है
भारत में जितने भी इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक बिकती है…
OLA, Ather, TVS, Hero, Honda…
लगभग सभी कम्पनियाँ अपना अलग चार्जर और चार्जिंग सॉकेट बनाती हैं…
जिससे दूसरी कम्पनी का स्कूटर या बाइक चार्ज नहीं होते…
सरकार को कम से कम ये पॉलिसी तो लागू करनी चाहिए
सभी कम्पनियाँ एक जैसा चार्जर और एक जैसा चार्जिंग सॉकेट बनाएँगी…
जैसे C पिन चार्जर से सभी तरह के मोबाइल चार्ज होते हैं…
वैसे एक तरह के चार्जर से सभी बाइक स्कूटर चार्ज हो सके…!!!
एक तो चार्जिंग सेटअप की कमी…
और दूसरा हर सेटअप पर अलग तरह के चार्जर….
कितनी बेकार पॉलिसी है….!!!
आदरणीय श्री @BhajanlalBjp जी आपकी दूरदर्शी सोच #आपणो_अग्रणी_राजस्थान की दिशा में कंप्यूटर अनुदेशकों की वेतन विसंगति,पदनाम परिवर्तन की मांगों को भी पूरा करें श्रीमान
#bci_4200(वरिष्ठ अध्यापक -कंप्यूटर विज्ञान)
#sci_4800 (व्याख्याता- कंप्यूटर विज्ञान)
कृपया संज्ञान लें श्रीमान जी
@JATbera1 आज से पहले कितनी बार कंप्यूटर अनुदेशकों की मांगो को सरकार के सामने रखा है आपके संघ ने, केवल सम्मेलन या जब किसी ओर ने किया तो आप भी शामिल हो गए
@AnshumanVishno1 भर्ती किस पद के लिए हुए थे , सरकार ने थोड़े कहा था कि आप लग जाओ फिर आपको लेवल 2 में लगा देंगे, आप खुद ही उमीद करो खुद ही निर्णय करो , ऐसा नहीं होता
@ShikshaNewsRaj1 इनको देख कर तो लग रहा है ये मंत्री जी की पोल खोल रहे है , जब सड़क ही खराब है तो लेम्बोर्गिनी कहा से जाएगी , ओर शायद कोई फोटो भी नहीं आई ऐसी
@VinuGujjar0808@Sunil93Gora लेकिन ढक्कन को देखने के लिए , रात में कौन रुकेगा , यह भी तो देखना है , कई जगह तो पतीली को रखने की जगह ही नहीं वहां क्या करे
@pantlp इसका मतलब तो यह हुआ जो बोले वही जाए तेल लेने, अरे भाई जब सारे काम ही जनता करे तो मंत्री ,संत्री, अधिकारी क्यों बनाए क्यों शिक्षा का बजट क्यों टैक्स , सब जनता ही करे तो सवाल भी जनता से ही पूछ लेते सरकार को लपेट रहे हो , महोदय
@dineshbohrabmr जब तक गाँव वाले ही नहीं चाहते जब तक कोई कुछ नहीं कर सकता, जब गांव वाले कुछ लोग विरोध कर रहे थे तो दूसरे ही लोग उन का विरोध करते , किसी को राजनीति करने की जरूरत ही नहीं पड़ती न
@sarviind इसमें मास्टर्स की क्या गलती है , उन्हें तो अपने से उच्च अधिकारियों के ऑर्डर फॉलो करने पड़ते है , अगर आप सब में इतनी ताकत है तो सभी sdm ऑफिस, तहसीलदार ऑफिस में टॉयलेट चेक करके बताओ, फिर स्कूल में जाना
(शिक्षकों की फिलहाल यह एक पीड़ा है)
हर साल 250 झंडे खरीदने हैं।
न्यूनतम 5000 रुपए का खर्च है लेकिन कोई बजट नहीं है।
आगे कोई खरीदता नहीं, मुफ़्त में बाँटो।
पिछले साल 80% बच्चों ने मुफ्त में भी झंडे नहीं लिए। यह कहकर कि पिछले साल वाला झंडा हमने संभाल कर रखा है। वही इस साल भी काम आ जाएगा। फेंक देते तो झंडे का अपमान होता।
कलेक्टर साहब अपने सारे टारगेट शिक्षा विभाग के मत्थे ही मढ़ते हैं जबकि इस विभाग में बाकी विभागों की तरह "एकस्ट्रा" रास्ते नहीं होते। यहां तो कईं बच्चों की फीस भी शिक्षक अपनी जेब से दे रहे होते हैं।
@JodhpurDm@madandilawar
@itSachinverma कुछ नहीं यह स्क्रिप्टेड वीडियो है अगर आदमी अकेला कुछ कर रहा था तो बनियान पर माइक क्या कर रहा है ,लोग पहले से प्लान करके वीडियो बनाते है , वही है
@scribe9104 तो क्या किसी की बुराई करने मात्र से आप लोगों को परेशान करोगे या करने वाले का साथ दोगे ऐसे तो कोई किसी का विरोध में बोल ही नहीं पाएगा, तो क्या बोलने की इस सजा पर आप जो कर रहे है उनको सपोर्ट कर रहे हो