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इस बंदे ने बिल्कुल सही मुद्दा उठाया की जंतर मंतर पर इस बात पर बहस होनी चाहिए कि यह 300 नंबर लाने वाला डॉक्टर बन जा रहा है लेकिन 540 नंबर लाने वाला डॉक्टर क्यों नहीं बन रहा है
Debunking the following fake historical oppression stories: A master 🧵
-Breast Tax
-Jhadu Matki
-Bhima Koregaon
-No Education to Shudra/Dalit
-No Shudra/Dalit Pujari
Big Thanks to all who contributed to debunking all these claims🙏
Save this 🧵 for future references.
गौर से देखो थ्री स्टार पुलिस अधिकारी को..
ये वही है जिसने जंतर मंतर प्रोटेस्ट में छात्रा के पीछे डंडा घुसाने की शर्मनाक हरकत की जो कमरे में कैद हो गई..
सोचो इस प्रोटेस्ट में इसके घर की बहन बेटी होती तो क्या उसके साथ यह लोग ऐसा ही बर्ताव करते..
सच तो ये है.. कि ये संघी मानसिकता के लोग हैं वर्दी की आड़ में अपने कुकर्म को बेहतर तरीके से अंजाम देते हैं..
सूत्रों के मुताबिक.. इसका नाम नवीन राठी है और यह दिल्ली पुलिस का अधिकारी है..
क्या महिला आयोग और मानव अधिकार आयोग इस घटना पर संज्ञान लेकर इस नीच अधिकारी पर कार्रवाई करेंगे..?
बंद नहीं हुआ 2000 रुपए का नोट।
RBI ने बताया क्या करना है!
RBI ने बताया है कि ₹2000 का नोट अब भी पूरी तरह वैध (लीगल टेंडर) है।
अगर आपके पास यह नोट है, तो आप इसे RBI के 19 इश्यू ऑफिस में जाकर बदल सकते हैं।
वहीं, जो लोग वहां नहीं जा सकते, वे इंडिया पोस्ट के जरिए किसी भी RBI इश्यू ऑफिस में नोट भेजकर इसकी राशि अपने बैंक खाते में जमा करा सकते हैं।
क्या ज़बरदस्त जॉब सिक्योरिटी है
> ये पूजा सिंघल हैं, 2000 बैच की IAS अधिकारी (झारखंड कैडर)
> इन्होंने ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल की और 21 साल की उम्र में भारत की सबसे कम उम्र की IAS अधिकारी बनीं
> 2022 में MGNREGA और माइनिंग लीज़ घोटाले के आरोप में ED ने इन्हें गिरफ़्तार किया
> ED के मुताबिक, 36 करोड़ रुपये नकद और 82 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति ज़ब्त की गई
> इन्होंने न्यायिक हिरासत में 2 साल और 4 महीने जेल में बिताए
> 2024 में ज़मानत मिली और नौकरी पर बहाल हुईं
> अभी (2026 में) ये झारखंड के IT और ई-गवर्नेंस विभाग की सचिव हैं
> इनके पास झारखंड कम्युनिकेशन नेटवर्क लिमिटेड के CEO का अतिरिक्त प्रभार भी है
सरकारें विभागों का नेतृत्व करने के लिए अधिकारियों को कैसे और किस आधार पर चुनती हैं?
डॉ पवन वर्मा:- आरक्षण तो गरीबों को मिलता है!
50% लिमिट कहाँ लिखा है?
Majority decide करेगी आरक्षण का!"
नेहा लाल दास:- अब इनसे पूछो?
1. क्या गरीबी के आधार पर आरक्षण कर दें?
तो ये ही बोलेंगे "नहीं नहीं आरक्षण गरीबी हटाओ योजना तो है नहीं"
2. आरक्षण का प्रावधान अम्बेडकर जी ने ही minority seats पर किया था, इसलिए 49.5% cap लगा! ये बात इंदिरा साहनी जजमेंट में भी लिखी है और संविधान सभा में अम्बेडकर जी ने खुद कहा है! लेकिन इन्होंने दोनों चीज़ें पढ़ीं तो होंगी नहीं!
3. और दुनिया के कौन से कोने में majority को affirmative action का लाभ मिलता है?
अम्बेडकर जी ने खुद कहा था कि आरक्षण majority सीट्स पर गैरकानूनी है और majority बनने के बाद कोई भी जोर जबरदस्ती नहीं कर सकता, वरना ये संविधान का उल्लंघन होगा!
लेकिन As Usual, इन्होंने ये सब तो पता होगा नहीं!
मतलब थोड़ा तो पढ़ लेते आरक्षण के बारे में, फिर आते मंच पर😂😂
इस लाइव डिबेट में @neha_laldas दीदी आपको को भी जाना चाहिये था
इस सूअर का एक टीवी सीरियल आता था सत्यमेव जयते नाम से उसमे यह हिन्दू समाज के खिलाफ झुठा प्रचार प्रसार झुठा प्रोगैंडा लेकिन इसने कभी भी लव जिहाद हलाला तीन तलाक मुताह अलतकिया के बारे में नही बताया
क्या सच में शिक्षा केवल सवर्णों तक सीमित थी?
एडम्स सर्वे (1830 के दशक) के आँकड़े देखिए—
📚 कुल हिन्दू विद्यार्थी: 22,957
सवर्ण वर्ग
🔹 ब्राह्मण – 5,744
🔹 कायस्थ – 2,733
🔹 सवर्ण बनिक – 538
🔹 वैद्य – 194
➡️ कुल सवर्ण विद्यार्थी: 9,209 (40.1%)
अन्य जातियों के विद्यार्थी (SC/ST/OBC सहित):
➡️ 13,748 (59.9%)
यदि शिक्षा पर केवल सवर्णों का ही अधिकार होता,
तो विद्यालयों में लगभग 60% विद्यार्थी अन्य जातियों से कैसे होते?
इतिहास को भावनाओं से नहीं, मूल दस्तावेज़ों और तथ्यों से समझिए।
स्रोत: William Adam's Survey of Indigenous Education (1830s).
@NITIAayog@PMOIndia@druditatyagi@DrKumarVishwas@narendramodi@myogiadityanath
अनिरुद्धाचार्य जी फायर मूड में हैं 🔥🔥
भरत तिवारी एनकाउंटर पर पूरे सिस्टम को फ़ाड़ डाला
जब सरकारें काम नही करेंगी तो नौजवान तो हथियार उठाएगा ही, सिस्टम की नाकामी से भरत तिवारी जैसा बच्चा हथियार उठाने को मजबूर हो गया
जब भरत ने किसी को नहीं मारा फिर एनकाउंटर क्यों?
भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था यानी बिहार पुलिस की शरण में आया था फिर भी मार दिया, शरण में आए हुए को मारना अधर्म हैं।
एक माओवादी ने सरेंडर किया
> 39 लाख कैश, घर और नौकरी मिली
भरत तिवारी ने सरेंडर किया
> एनकाउंटर कर दिया गया
ये एक ही देश में दोहरे मापदंड की शर्मनाक मिसाल है।
एक आदमी जन सेवा केंद्र पर आया और बोला कि उसके खाते में ₹3500 जमा कर दो?
केंद्र संचालक ने पैसे जमा कर दिए, लेकिन उसे कुछ बात अजीब लगी।
आदमी बार-बार कह रहा था कि उसने एक आयुर्वेदिक दवा मंगवाई है।
और उसी के लिए ऑनलाइन पैसे भेज रहा है।
जन सेवा केंद्र वाले ने पूछा, "कौन सी दवा है भाई?"
आदमी ने अपना WhatsApp खोलकर दिखाया।
मैसेज में लिखा था।
"बधाई हो, आपने 12 लाख रुपये की कार जीत ली है।"
साथ में कार की फोटो, कुछ कागज और रजिस्ट्रेशन की कॉपी भी भेजी गई थी।
आदमी बोला, "इन लोगों ने कहा है कि रजिस्ट्रेशन पूरा हो गया है।"
"बस थोड़ी सी फीस जमा करनी है फिर कार मिल जाएगी।"
जन सेवा केंद्र वाले ने पूछा, "अभी तक कितने पैसे भेज चुके हो?"
आदमी बोला, "पहले ₹3500 भेजे थे।"
"आज फिर ₹3500 जमा कर रहा हूं।"
अब हिसाब देखिए।
पहली Payment = ₹3500
दूसरी Payment = ₹3500
कुल = ₹7000
जन सेवा केंद्र वाले ने पूछा, "कार मिली क्या?"
आदमी बोला, "अभी नहीं मिली।"
"लेकिन वो लोग कह रहे हैं कि थोड़ी और प्रक्रिया बाकी है।"
तब केंद्र संचालक ने कहा, "भाई अगर सच में 12 लाख की कार मिली होती।"
"तो हर बार नया चार्ज और नई फीस क्यों मांगी जा रही है?"
फिर उसने समझाया कि अक्सर ऐसे लोग पहले छोटी रकम मांगते हैं।
फिर ₹3500, ₹5000, ₹7000 करते-करते हजारों रुपये निकलवा लेते हैं।
आदमी कुछ देर चुप रहा।
क्योंकि अब उसे भी समझ आने लगा था कि शायद यह दवा का ऑर्डर नहीं।
बल्कि इनाम के नाम पर चल रहा एक धोखा था।
अगर कोई आपको ऐसे ही कार जीतने का मैसेज भेजे और पहले पैसे जमा करने को कहे, तो क्या आप भरोसा करेंगे?