2014 के बाद जो शब्द हर किसी की जुबान पर चढ़ गए
कभी सोचा है कि 2014 से पहले हम राजनीति की बात करते थे तो कैसे करते थे? और आज हमारी भाषा कितनी बदल गई है? चलो बताता हूं वो 9 शब्द जो आज हर गली-मोहल्ले में सुनाई देते हैं, लेकिन पहले शायद ही कभी सुने होंगे:
1. मोदी-मोदी
ये तो हर रैली में, हर चुनाव में, सोशल मीडिया पर हर जगह गूंजता है। 2014 से लेकर अब तक इस नारे की धूम है। कहीं भी चले जाओ - "मोदी-मोदी" सुनाई दे जाता है। पहले कभी किसी एक नेता का नाम इतना नहीं चला था।
2. भक्त
अरे वो "भक्त" वाला! हां वही जो मंदिर में भगवान का भक्त होता है ना, वैसे ही अब राजनीति में भी भक्त हो गए हैं। मोदी जी या BJP के जो पक्के सपोर्टर हैं, उन्हें लोग "भक्त" बोलने लगे। 2014 से पहले किसी ने राजनीति में ये शब्द सुना भी नहीं था। अब तो रोज सुनाई देता है - "अरे वो तो भक्त है यार!"
3. अंधभक्त
ये तो और भी कमाल का शब्द है! जब कोई बिना सोचे-समझे, बिना सवाल पूछे अपने नेता का समर्थन करता रहे, तो उसे लोग "अंधभक्त" बोलते हैं। सोशल मीडिया पर तो ये शब्द गाली की तरह चलता है। पहले कोई जानता भी नहीं था ये शब्द, अब देखो कितना फेमस हो गया!
4. अच्छे दिन
"अच्छे दिन आने वाले हैं" - याद है? 2014 के चुनाव का सबसे बड़ा नारा था। उस वक्त तो पूरे देश को उम्मीद थी कि सच में अच्छे दिन आएंगे। आज भी ये शब्द सुनाई देता है, पर अब कभी उम्मीद से तो कभी मजाक में भी इस्तेमाल होता है - "अरे भाई, अच्छे दिन कब आएंगे?"
5. चौकीदार
"मैं भी चौकीदार" - 2019 में तो ये पूरे देश में छाया हुआ था। मोदी जी ने खुद को देश का चौकीदार बताया और लोगों ने भी अपनी DP में चौकीदार लिख दिया। हालांकि विपक्ष ने "चौकीदार चोर है" का भी नारा दिया। खैर, चौकीदार शब्द तो इतिहास में दर्ज हो गया!
6. सनातन / सनातन धर्म
ये शब्द तो मैंने 2014 से पहले बहुत कम सुना था। हिंदू धर्म के लिए पुराना नाम है "सनातन धर्म"। लेकिन आज कल ये शब्द हर जगह सुनाई देता है - न्यूज़ चैनल पर, सोशल मीडिया पर, बहसों में। पहले तो बस पंडित जी ही बोलते थे, अब तो सबको पता है कि सनातन क्या होता है! राजनीति में खूब इस्तेमाल होने लगा है।
7. सर्जिकल स्ट्राइक
2016 की वो रात याद है जब पूरा देश इस शब्द को सुनकर खड़ा हो गया? पाकिस्तान में हमारी सेना ने धमाकेदार कार्रवाई की और उसे "सर्जिकल स्ट्राइक" बोला गया। उसके बाद से तो हर बड़ी कार्रवाई को लोग सर्जिकल स्ट्राइक बोलने लगे। अब ये सिर्फ सेना के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा की भाषा में भी आ गया - "यार मैंने ऑफिस में सर्जिकल स्ट्राइक कर दी!"
8. गोदी मीडिया
ये शब्द तो कमाल का है! "गोदी" मतलब मोदी की गोद में बैठा हुआ। जो मीडिया चैनल सरकार की हर बात को सही बताते हैं, उन्हें लोग "गोदी मीडिया" बोलते हैं। विपक्ष वाले और सोशल मीडिया पर तो ये शब्द खूब चलता है। न्यूज़ चैनल देखते हुए लोग बोलते हैं - "अरे ये तो गोदी मीडिया है भाई!"
9. एंटी-नेशनल / देशद्रोही
यार ये सबसे खतरनाक शब्द है! आज कल अगर कोई सरकार की आलोचना करे, तो तुरंत उस पर "एंटी-नेशनल" या "देशद्रोही" का ठप्पा लग जाता है। TV डिबेट में तो हर दूसरे मिनट में सुनाई देता है। 2014 से पहले इतना आम नहीं था, अब तो जरा सी असहमति पर लोग बोल देते हैं - "तू देशद्रोही है!"
सच बोलूं?
2014 से पहले की राजनीति और आज की राजनीति में जमीन आसमान का फर्क है। सिर्फ सरकार नहीं बदली, हमारी बोलचाल की भाषा भी पूरी तरह बदल गई। WhatsApp पर, Twitter पर, चाय की दुकान पर - हर जगह ये शब्द सुनाई देते हैं।
कभी-कभी तो लगता है कि 2014 एक Turning Point था - न सिर्फ राजनीति के लिए, बल्कि हमारी सोच और भाषा के लिए भी।
आज का युवा तो शायद सोच भी नहीं सकता कि एक वक्त था जब "भक्त", "अंधभक्त", "सनातन" जैसे शब्द राजनीतिक बहस में नहीं होते थे!
तो ये थे वो 9 शब्द जिन्होंने 2014 के बाद भारतीय राजनीति की भाषा ही बदल दी। अब बताओ, तुम्हें कौन सा शब्द सबसे ज्यादा सुनाई देता है?
Scientific India की नींव किसने रखी? जवाब सुनके shock लगेगा
Nehru को बस "नेता" बोलके dismiss करना आसान है, पर सच ये है कि इस बंदे ने आज़ाद भारत का scientific दिमाग practically design किया था।
IIT, CSIR, Atomic Energy Commission, परमाणु program — ये सब बस इमारतें नहीं थीं। Nehru ने scientists को पूरा vision दिया: India को modern, rational, tech-powered देश बनाना है। और ये सिर्फ भाषण नहीं था, काम था।
"Scientific temper" — आज सुनने में fancy लगता है ना? पर Nehru के लिए ये सिर्फ नारा नहीं था। ये उनकी पूरी सोच थी। सवाल पूछो, तर्क करो, अंधविश्वास को challenge करो।
हॉमी भाभा के साथ देखो — PM होने के बावजूद experts की सुनते थे, उनसे बहस करते थे, पर institutions को कभी अपनी ego से नीचे नहीं आने दिया। Power थी, पर समझ भी थी।
आज का हाल देखो — WhatsApp पर हर कोई scientist बना घूम रहा है, "scientific temper" की जगह forwards ने ले ली है। देश labs और uncomfortable सवालों से बनता है, भाषणों से नहीं।
Nehru ने वही किया — reactors बनवाए, classrooms खोले, और सबसे जरूरी: अगली generation के लिए सोचा। सिर्फ अगले चुनाव के लिए नहीं, अगले 50 सालों के लिए।
अगर तुम Nehru को सिर्फ Congress या किसी एक नज़रिये से देखते हो, तो उनका असली योगदान miss कर रहे हो। History को politically नहीं, objectively देखो।
चाहे तुम्हें बाकी चीज़ें पसंद हों या ना हों, पर science और education में उनका contribution झुठलाया नहीं जा सकता। नींव उन्होंने रखी थी।
Legacy मूर्तियों में नहीं, institutions में होती है।
#Nehru #ScientificTemper #History
देगे बिल्कुल, माथे पर कलंक लेके कौन जीना चाहेगा। बुढ़ापे में भी पेंशन का मजा लेना है, न कि जे........L. यात्रा।
हिसाब देने से पहले टिप्स , बहुत अच्छी बात।
@Hari_patel__@jpsin1 सरकार को प्रत्येक उस संस्था के प्रति सजग होना चाहिए जो जनता के हितों से जुड़ी है।
जनता को तो उल्लू समझ रखा है, पैसे देने के बाद भी आज सेवा मिलना मुश्किल है।
@Hari_patel__@jpsin1 अबे बंदबुद्धि, गां@ड़ से सोचोगे तो कैसे पता चलेगा।
वर्तमान सरकार ही जनता को रामराज्य का सपना दिखाती है, और स्वयं सरकार ही जिम्मेवार है उक्त प्रकरण में। तो मूत दिया न।