IIT-Bombay द्वारा साहिल वाकोड़े की आत्महत्या से जुड़े अपने पहले के बयान के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगना महत्वपूर्ण कदम है। कल हमने कहा था कि साहिल जी की मृत्यु के अगले दिन, 19 सितंबर को परीक्षा में मोबाइल फोन और अन्य आरोपों को लेकर जारी संस्थान के बयान पर गंभीर सवाल उठते हैं। अब IIT-Bombay ने स्वयं स्वीकार किया है कि जांच पूरी होने से पहले घटना की परिस्थितियों को किसी निश्चित रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं था।
IIT-Bombay में बीटेक (एनर्जी साइंस) के द्वितीय वर्ष में पढ़ रहे साहिल वाकोड़े केवल एक छात्र नहीं, बल्कि देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक JEE Advanced में AIR 614 हासिल करने वाले होनहार और मेहनती दलित युवा थे। प्रथम वर्ष में 8.5 CGPA हासिल कर उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा का परिचय दिया था। ऐसे प्रतिभाशाली छात्र की असामयिक मृत्यु ने न केवल उनके परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है, बल्कि देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, सम्मान, समानता और संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
IIT-Bombay द्वारा 19 सितंबर को जारी किए गए उस बयान ने उन जातंकवादियों को एक मौका दिया, जो ऐसे दुखद क्षणों में भी दलितों को नीचा दिखाने के लिए तैयार रहते हैं। अब संस्थान की माफी से यह स्पष्ट है कि जांच पूरी होने से पहले घटना से जुड़े तथ्यों को किसी निश्चित रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं था। ऐसे संवेदनशील मामलों में संस्थागत जिम्मेदारी और अधिक गंभीर होनी चाहिए।
सोचिए, उन माता-पिता पर क्या गुजर रही होगी, जिन्होंने एक तरफ अपना होनहार बच्चा खो दिया और दूसरी तरफ उसी बच्चे को नकलची बताकर न केवल उन्हें, बल्कि उनके पूरे समाज को नीचा दिखाने की कोशिश होते देखी।
@iitbombay, आपकी यह माफी माफी योग्य नहीं है।
यह बेहद पीड़ादायक और शर्मनाक है। हमारी टीम मौके पर डटी है।
#JusticeForSahilWakode
तथाकथित सवर्णों ने मुस्लिम शासकों की चाटुकारिता करके भीख रूपी जमीने ली फिर अंग्रेजों की चाटुकारिता में जमींदारी की भीख ली वावजूद उसके एक रत्ती भर उपलब्धि नहीं दे पाए।
चुनमंगे चुन को ही मेरिट समझ लिए जबकि आज भी भारत के सारे प्रतीक चिह्न बुद्ध और उनके अनुयायियो की दें है।
अनुपम खीर, राममंदिर चढ़ावा डकैती को जस्टिफाई कुछ इस तरह कर रहे है की मुग़ल काल में राममंदिर लूट लिया तो उससे ये उबर गए तो तो चढ़ावा चोरी से भी उबर जाएँगे?
मैं ये नहीं समझ पा रहा कि मुग़लो से ये कैसे उबरे थे?
बाबर के बेटे हुमायू को भारत के क्षत्रियों ने पनाह दी और अकबर को अपने घर में जन्म देने के लिए आश्रय दिया फिर अकबर के 9 रतन में 4 ब्राह्मण क्षत्रिय शामिल थे फिर जहांगीर से लेकर औरंगजेब तक की सेवा में इनके वंशजे सभी शामिल रहे तो उबरे कैसे थे और किससे थे?
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IPS अविनाश पांडेय की बर्खास्तगी एवं उस पर कार्रवाई की मांग करने हेतु गृहमंत्री अमित शाह जी के नाम मैंने जो पत्र लिखा था, उसे फेसबुक पर 10 लाख से अधिक लोग पढ़ चुके हैं।
सैकड़ों लोगों ने अपने प्रोफाइल से शेयर किया है। सरकार की चुप्पी उन्हें बहुत भारी पड़ेगी। समाज सब देख रहा है।
पत्रकार: जो लोग जेल भेजे गए हैं उनके लिए क्या कहा
सांसद जी:जो लोग जेल गए हैं बिना शर्त उनको रिहा किया जाए मैने अधिकारीयों से बात करी हैं, किसी सार्वजनिक सम्पति को नुक्सान नही पहुंचाया हैं
आपने सिर्फ़ अपने आप को बचाने के लिए उनको जेल भेज दिया हैं वो सारे बच्चें हमारे समाज के हैं
तमिलनाडु के तिर्ची में OBC हिंदू लड़की और दलित लड़के ने आपस में शादी तो लड़की के घरवालों ने जातिगत गालियां देते हुए लड़के पर हमला किया और दुल्हन को अगवा कर लिया।
पुलिस इस मामले में जातिवादियों पर कड़ी कार्रवाई कर रही है। अब तक पांच लोग अरेस्ट हो गए हैं। कुल 11 नामजद हैं।
ब्राह्मणों के प्रति लोगों में नफ़रत बढ़ती जा रही है, आज दो इंटरव्यू देखे जिसे देखकर लगता है, आने वाले समय में ब्राह्मण वर्ग अछूत हो जाएगा,
एक इंटरव्यू में पत्रकार पूछती है ब्राह्मण पूजनीय है?, उसके जवाब में रुद्रप्रताप कुशवाह कहते है "ब्राह्मण पूजनीय कैसे हो गया, वह लतियाने लायक़ है, शोषण अत्याचार, जातंकवाद फैलाया, मुगलों और आक्रांताओं से संधि की"
एक दूसरे इंटरव्यू में राम मंदिर में मौजूद माताजी कहती है, ब्राह्मणों को दान दक्षिणा अनुदान देना बंद करना चाहिए, पूरे देश के मंदिरों में दानपेटी में दान नहीं देना चाहिए,
ब्राह्मण समाज हिन्दू धर्म को लीड करता है, उनके बताए रास्ते पर चलता है, उनकी बनाई जाति व्यवस्था का पालन करता है, लेकिन अब लोगों का जाति व्यवस्था में दम घुट रहा है, जनता विद्रोह करने पर उतारू है,
ब्राह्मण लोगों को ही आगे आकार जाति व्यवस्था, मनुस्मृति को तिलांजलि देना होगा, जिन जिन ग्रंथों में शूद्रों महिलाओं वर्णव्यवस्था की बात लिखी है उनको सार्वजनिक रूप से जलाना होगा,
समय की परिस्थितियों को समझना होगा ।
अगर अविनाश पांडे की गर्मी ज्यादा बढ़ गई है तो इसको बॉर्डर पर भेज दो जो चीन ने अरुणाचल प्रदेश में कब्ज़ा कर चुका है l
अगर यहीं थप्पड़ अविनाश पांडे ने गैंगरैप करने वाले अपराधियो पे बरसाता तो UP में अपराधि कुछ कम हो जाते l
योगी आदित्यनाथ जी अब दलित समाज सब देख रहा है जवाब मिलेगा
यह कोई दरोगा या इंस्पेक्टर नहीं,बल्कि मेरठ एसएसपी अविनाश पाण्डेय है। इसकी भाषा देखिए।
मेरठ एसएसपी कह रहा है कि यह रोड इनके (दलितों) पिता जी की नहीं है। रोड गन्दा कर दिया,सालों ने।
एसएसपी अविनाश पाण्डेय द्वारा दलितों गाली देने का अधिकार किसने दिया?
बाबासाहेब का सपना था कि दलित समुदाय को शिक्षित करके उन्हें Governing Class बनाना है, शासन-प्रशासन में भेजना है। समाज के युवाओं पर FIR कराकर उनका करिअर खराब करना कौन सा मिशन है? आप ही बताइए।
यूपी लोक सेवा आयोग की 15 नियुक्तियों में 6 EWS. यानी 40% सीट EWS को। 52% OBC और 22% SC के लिए कोई सीट नहीं।
तो बताओ दलितों और पिछड़ों। राम राज्य में मज़ा आ रहा है न?? बुरा लग रहा है तो Retweet करें।