लोकतंत्र: आदर्श और हकीकत के बीच आज एक बड़ा फासला है।
लोकतंत्र एक सुंदर आदर्श है—हर व्यक्ति को अपने जीवन को प्रभावित करने वाले निर्णयों में समान भागीदारी का अधिकार। लेकिन क्या यह आदर्श आज की राजनीतिक व्यवस्था से मेल खाता है?
हमने लोकतंत्र को सिर्फ़ बहुमत के शासन से जोड़ दिया है। नतीजा? आज दुनिया भर में ऐसे नेता लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से चुनकर आ रहे हैं, जिससे लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर हुई है।
लोकतंत्र का यह विकृत स्वरूप—पैसे और मीडिया के प्रभाव में बहुमत की राजनीति—हमारे आदर्श का प्रतिबिंब नहीं, बल्कि उसका विरोधाभास है।
समाज को लोकतंत्र के ऐसे स्वरूपों की तलाश करनी होगी जो उस आदर्श के करीब हों, न कि बहुमतवाद के नाम पर उसे कमजोर करें।
एक एक्सीडेंटल मुख्यमंत्री, श्रीमान नायब सैनी, अहंकार में चूर होकर डूम दलित समाज का अपमान कर रहे हैं।
जिन्हें PA व PS तक लगाने का अधिकार नहीं, क्योंकि अफ़सर से लेकर मंत्री तक की लिस्ट दिल्ली से आती है, वो बौद्धिक दिवालियेपन का शिकार हो गाली गलोच कर रहे हैं।
मैंने सीधे सवाल पूछे -:
👉किसान को 8 अक्टूबर से आज तक ₹3,100/क्विंटल धान का भाव क्यों नहीं मिल रहा, जो वादा श्रीमान नायब सैनी व भाजपा ने किया था?
👉 किसान, आढ़ती, मंडी मज़दूर, राईसमिल मालिक की दुर्गति क्यों, ₹2,309/क्विंटल धान का भाव क्यों नहीं मिल रहा, 2.5% आढ़त क्यों नहीं मिल रही?
👉 तीसरा सवाल NHM कर्मचारियों को लेकर था, जो निर्णय अगले दिन ही वापस लेना पड़ा।
मुझे डूम कहें या किसी और दलित समाज के नाम से पुकारें, मैं मेहनतकश समाज से नाम जोड़ कर फक्र महसूस करता हूँ, पर आपकी गालियाँ मुझे किसान-मज़दूर-आढ़ती-ग़रीब की आवाज़ उठाने व सरकार को आईना दिखाने को प्रेरित करती रहेंगी।
नायब सैनी जी,
ये वीडियो आपके वादाखिलाफी का सबसे बड़ा सबूत है।
आपने चुनाव में वादा किया था कि 8 अक्टूबर से पीआर धान की खरीद ₹3100 प्रति क्विंटल होगी।
सच्चाई यह है कि कैथल सहित पूरे हरियाणा में किसान ने मजबूरन पीआर धान ₹2100/₹2200 प्रति क्विंटल पर अब तक बेचा है।
हरियाणा के कुल धान उत्पादन की 50% से ज्यादा खरीद हो चुकी।
क्या ₹3100 प्रति क्विंटल धान की कीमत देने का वादा मात्र लोगों को बेवकूफ बनाकर वोट बटोरने का एक जुमला था?
भारत की एक जेल में बन्द एक कैदी मरवा देता है सिधु मूसेवाला को, करणी सेना के मुखिया को और अब बाबा सिदीकी को!!
याद रहे कि वह हमारी जेल में बन्द है!!
क्या फायदा फिर सरकार, पुलिस प्रशासन, law and order और judiciary का??
और इसमें नाम आता है #कैथल के 23 वर्षीय युवा का जिसने इस कत्ल को अंजाम दिया??!!
क्या हो रहा है हमारे बच्चों को??
#गँवार_swag नामक term सुनी थी मैंने जो एकदम फिट बैठ रही है आजकल की बढ़ती फूहड़ता, नफ़रत, दूसरों के दुःख और बेइज़्ज़ती पर आनंद लेने वाली पीढ़ी पर..!
पहले हम किसी की काबिलियत, पढ़ाई और योग्यता पर उसे जज करते थे, इम्प्रेस होते थे.... आजकल जो जितनी फूहड़ और घटिया बात बोलेगा उसपे किलकी मारते हैं.. कहाँ जा रहा है समाज?? कौन ज़िम्मेदारी लेगा??!!
#श्वेता_ढुल
Public universities are the cornerstone of our democracy, fostering hope and driving social transformation. As India welcomes first-generation learners, it’s alarming to see these institutions dismantled and handed to bureaucrats. We must resist this erosion of public education.
Grateful to the Ambedkar University Delhi Faculty Association (AUDFA) for organizing a crucial talk on ‘Democracy, Justice, and University.’
Watch my full lecture for deeper insights: #SavePublicUniversities #HigherEducation
TRIGGER WARNING ⚠️
पहली तस्वीर , बदायूँ
नवंबर, 2014 अखिलेश यादव मुख्यमंत्री
दूसरी तस्वीर , फ़र्रूख़ाबाद
अगस्त , 2024 योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री
पहली और दूसरी तस्वीर में फ़र्क़ ये है कि पहली तस्वीर के लिए @yadavakhilesh का इस्तीफ़ा माँगा गया , मीडिया ने अखिलेश की धज्जियाँ उड़ा दी।
दूसरी तस्वीर के लिए एक भी न्यूज़ चैनल , एक भी एंकर , एक भी मालिक/संपादक की ना हैसियत है और ना औक़ात कि @myogiadityanath से इस्तीफ़ा माँग सके।
10 साल में यही बदलाव आया है !
नया उत्तरप्रदेश !!
कल देश का हर नागरिक खुशी मना रहा था, मानों उनकी बेटी जीत गई है।
लेकिन खेल मंत्री, प्रधानमंत्री और BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे सत्ताधारी विनेश फोगाट के लिए मुबारकबाद देने से भी बच रहे थे।
विनेश वही महिला पहलवान थी, जिसने..
• PM मोदी के चहेते बृजभूषण सिंह के खिलाफ आवाज उठाई
• महिला पहलवानों के लिए 140 दिन से अधिक धरने पर बैठी
• उसे BJP की पुलिस ने सड़क पर घसीटा और FIR दर्ज की
इन सबके बावजूद भी उसने ओलंपिक में तिरंगा फहराया, लेकिन एक साजिश ने उसे हरा दिया।
ओलम्पिक के गोल्ड मेडल से बड़ा एक मेडल होता है —
खेत की मिट्टी का मेडल !
उस मेडल की विजेता विनेश फोगाट के नाम कुंवर नारायण की कविता का एक टुकड़ा:
दुर्गम वनों और ऊँचे पर्वतों को जीतते हुए
जब तुम अंतिम ऊँचाई को भी जीत लोगे—
जब तुम्हें लगेगा कि कोई अंतर नहीं बचा अब
तुममें और उन पत्थरों की कठोरता में
जिन्हें तुमने जीता है—
जब तुम अपने मस्तक पर बर्फ़ का पहला तूफ़ान झेलोगे
और काँपोगे नहीं—
तब तुम पाओगे कि कोई फ़र्क़ नहीं
सब कुछ जीत लेने में
और अंत तक हिम्मत न हारने में।
#Phogat_Vinesh @Phogat_Vinesh
#Gold
"बागी बलिया के लाल रहलें,
फिरंगीइन के काल रहलें,
सन् 57 के क्रांति के मशाल रहलें,
फांसी के फंदा चूमेवाला पहिला वीर बलिदानी रहलें।"
भारत में अंग्रेज़ शासन के खिलाफ क्रांति की मशाल जलाने वाले मंगल पांडे जी की जयंती पर कोटिश: नमन।
यह प्रस्ताव फर्जीवाड़े की पराकाष्ठा है। कार्यवाहक प्रधानमंत्री ने 'मोदी की गारंटी' का भौकाल बनाकर सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने नाम पर वोट मांगा था, जिसे हमारे देश की जनता ने नकार दिया। अब अचानक उन्होंने मुर्दा NDA में जान फूंकने की कोशिश की है।