आचार्य प्रशांत कहते हैं,'परंपरा में कचरा है, बहुत है। परंपरा के नाम पर मनुष्य ने अंधेरा भी पैदा किया है। लेकिन अपनी दृष्टि की सीमा को परंपरा की सीमा मान लेना भी भूल है। आधुनि��ता का अधिकार है कि वह अतीत से प्रश्न करे, पर प्रश्न करने से पहले उसे समझे भी।'
@Advait_Prashant
🏆 A champion’s journey doesn’t end with a medal.
Suchika Tariyal made history in MMA. But her conversation with #AcharyaPrashant raises a deeper question:
"Can we win the world and still remain strangers to ourselves?"
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🥊 सुचिका तरियाल: रिंग की चैंपियन, सत��य की जिज्ञासु 🇮🇳
सुचिका तरियाल भारत की एक प्रतिभाशाली Combat Sports खिलाड़ी हैं, जिन्होंने जूडो, जू-जित्सु, कुराश और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) में अपनी पहचान बनाई है।
वह आठ बार की राष्ट्रीय जूडो चैंपियन, कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता और जू-जित्सु की विश्व चैंपियन रह चुकी हैं।
सितंबर 2026 में उन्होंने एशियन गेम्स में MMA में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। 🥉
लेकिन खेल की उपलब्धियों से परे भी जीवन के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।
हम जीतना क्यों चाहते हैं? हमारी महत्वाकांक्षाओं के पीछे क्या है? क्या शारीरिक क्षमता के साथ स्वयं को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण नहीं है?
इन्हीं प्रश्नों पर संवाद करने के लिए सुचिका तरियाल हाल ही में आचार्य प्रश��ंत जी से मिलीं।
रिंग में प्रतिद्वंद्वी से मुकाबला करना एक बात है, और स्वयं को समझने की यात्रा दूसरी।
आइए, इस महत्वपूर्ण संवाद को सुनें और सत्य की खोज में उठने वाले प्रश्नों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ।
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