भारत में ऑफिस अफेयर्स और विवाहेतर संबंधों का ट्रेंड बढ़ रहा है।
▪️ 40% लोग सहकर्मी के साथ रिश्ते में
▪️ 36% महिलाओं ने वर्कप्लेस रोमांस स्वीकार किया
▪️ 2018 के बाद एक्स्ट्रा-मैरिटल प्लेटफॉर्म्स में तेज़ बढ़ोतरी
नतीजा: बढ़ते तलाक, मानसिक तनाव और परिवार पर असर।जागरूक बनें।
कब तक निर्दोष पति झूठे आरोपों और एकतरफ़ा व्यवस्था में कुचले जाते रहेंगे?फ़र्ज़ी केस, मेंटेनेंस की वसूली और सिस्टम की बेरहमीइसका खामियाज़ा परिवार और बच्चे भुगतते हैं।
न्याय का मतलब संरक्षण है, कुचलना नहीं।
अब वक्त है जवाबदेही, सेफगार्ड्स औरजेंडर-न्यूट्रल सुधारों का।#StopFalseCases
झूठे वैवाहिक मामलों के बाद अगर कोई पति टूट जाता है,तो ज़िम्मेदारी किसकी है?
कानून, व्यवस्था और न्यायपालिका से सवाल है—
क्या झूठे आरोपों पर भी जवाबदेही तय होगी?
न्याय का मतलब सिर्फ़ आरोप नहीं, सत्य, संतुलन और संरक्षण भी है #QuestionsToTheSystem#StopFalseCases#JusticeForMen
बेईमानी को FIR के पीछे छुपाया नहीं जा सकता।
धोखा एक निजी गलती हो सकती है,
लेकिन झूठे मुक़दमे आपराधिक कृत्य हैं।
न्याय का मतलब सहानुभूति नहीं, सबूत और जवाबदेही है। झूठे केस रिश्तों को नहीं, ज़िंदगियाँ बर्बाद करते हैं। #FalseCasesAreCrime#InfidelityIsNotACrime#JusticeForAll
भारत में झूठे केस अब हथियार बन चुके हैं।
निर्दोष पुरुष आरोपों में कुचल दिए जाते हैं
क्या पुरुषों को जीने का हक़ नहीं?
क्यों कानून में दोहरा मापदंड—
आरोप = सज़ा (अगर पुरुष),
अपराध भी माफ़ (अगर महिला)?
अब बहुत हुआ।
हमें चाहिए Gender-Neutral Laws।
#JusticeForMen#StopMisuseOfLaws