🚨 मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती में आधे नंबर से चयन न होने पर छात्र ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
— मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
Video Credit - TheLegalNow
A TRAGIC FINAL SERMON 🙏🏽💔
Father Patricio Alfredo Sánchez Molinari reportedly was celebrating Mass in Guayaquil, Ecuador, on Saturday when tragedy struck.
Just moments earlier, he had been reflecting on the brevity of life, telling his congregation: “One day all of us here will die.” He encouraged them to spend more time with God and their loved ones rather than on phones and worldly distractions.
He then continued with the Mass. While a member of the congregation was delivering a prayer, the large wooden crucifix mounted on the wall behind him suddenly detached and fell forward, striking him directly on the head.
Parishioners immediately rushed to help and called for an ambulance, but sadly, the 53-year-old priest died from his injuries.
The cause of the crucifix falling has not yet been established.
The timing of his final words makes this tragedy especially heartbreaking.
May his soul rest in peace. 🙏🏽🙏🏼🙏🏾
अभी एक भाई बहस कर रहा था कि जहाँ खोदोगे वहीं से बुद्ध जी से सम्बंधित कुछ न कुछ मिलेगा आपको। इसका अर्थ है कि केवल बुद्ध ही सत्य हैं और सबसे पुरातन हैं।
उसको जो जो समझ आया वो उसने बताया और चुपचाप सुनता समझता रहा.. फिर उससे दो तीन सवाल किया और उसे तर्क़ देते हुए चीज़ें समझाया तब जाकर वो माना कि उसकी बातों में क्या ग़लती थी..
- जैन धर्म के आख़िरी यानी 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर जी थे, जिनके समकालीन थे भगवान बुद्ध जी। भगवान गौतम बुद्ध जी उम्र में भगवान महावीर जी से बड़े थे। पर यहाँ मुद्दे की बात ये है कि उनसे पहले 23 और तीर्थंकर हो चुके थे यानी बौद्ध धर्म शुरू होने बहुत पहले से जैन धर्म था।
[ जैन धर्म बौद्ध धर्म से अधिक प्राचीन है। जहाँ बौद्ध धर्म की स्थापना गौतम बुद्ध (लगभग 563 ईसा पूर्व) ने की थी, वहीं जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी (लगभग 877–777 ईसा पूर्व) और प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी वैदिक काल से भी पहले से मौजूद थे।
ऐतिहासिक विवरण में देखा जाए तो आइये...
• जैन धर्म: जैन परंपरा के अनुसार यह धर्म शाश्वत है। ऐतिहासिक रूप से 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी बुद्ध जी से लगभग एक शताब्दी पहले हुए। और तो और ऋग्वेद में भी प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी का उल्लेख मिलता है। इसका मतलब ये है कि वेद बहुत पहले से था बौद्ध धर्म के।
• बौद्ध धर्म: इसकी शुरुआत गौतम बुद्ध द्वारा छठी शताब्दी ईसा पूर्व (लगभग 563 ई.पू. में लुंबिनी में जन्म) में हुई। ये महावीर जी के समकालीन थे।
सम्राट अशोक जी का नाम भी सब ख़ूब लेते हैं तो आइए बात करते हैं,
सम्राट अशोक बौद्ध धर्म अपनाने से पहले शैव धर्म (भगवान शिव के उपासक) के अनुयायी थे। कल्हण की किताब 'राजतरंगिणी' और अन्य ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, वे प्रारंभ में भगवान शिव जी की पूजा करते थे। 261 ईसापूर्व उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया क्योंकि कलिंग के रक्तपात ने उन्हें विचलित कर कर दिया। भेरीघोष युद्ध नीति को त्यागकर धम्मघोष को अपनाया।
देखो सुनी सुनाई बातों पर मत जाओ, साफ़ समझो हम सब एक ही हैं बस सबके सोचने का तरीक़ा अलग है और सबकी समझ अलग है। सबकी मान्यता अलग है पूजा पद्धति अलग है।
इसके अतिरिक्त आरोप लगाना व्हाट्सएप पर पढ़कर बहुत आसान है पर जब बात तथ्य की जाएगी तो हवा हो जाता है सब के लिये।
भगवान कृष्ण राम आदि पर टिप्पणी करने लगते हो जातक कथाओं के बारे में भी पता करो, उन कहानियों को भी सुनों जिसमें भगवान बुद्ध ने मायावी शक्तियों का प्रदर्शन किया है। वो एक संत थे और सन्त स्वरूप में ही समय समय पर प्रभु आते हैं और लोगों को मार्ग दिखाते हैं। अंधेरे में रौशनी का काम करना ही भगवान का स्वरूप है।
इसलिये टीका टिप्पणी बन्द कर दो अब। जिसे मानना है मानिये पर ये जो लॉजिक दे रहे हो कि ये ही सबसे पहले और बाक़ी सब चोरी का है तो आप के पास तर्क़ नहीं बचेगा जब कोई दूसरा जवाब देने लगेगा तो।
राधे राधे साथियों।
~ अश्विनी यादव
बंगाल के शासक सुलेमान की बेटी, ब्राह्मण युवक कालाचंद पर हो गई थी मोहित
काला जादू करके किया अपने वश में, फिर शराब और मांस से किया धर्म भ्रष्ट
इस्लामी दरिंदा कैसे बना काला पहाड़? पूरा इतिहास बता रही हैं @Shh_Shaili
भाजपा के नेता अज्ञानता में हिंदुओं के मत परिवर्तन (कन्वर्शन) को प्रमोट कर रहे हैं या यह केंद्रीय भाजपा से कोई निर्देश है?
भीम जनता पार्टी वाले उत्तर दें!
बुद्ध और इन एंबेड करैत नव बौद्धों में कोई सम्बन्ध नहीं है।
मैं बुद्ध को पढ़ता हूं।
और भगवत गीता पतंजलि योगसूत्र भी।
बुद्ध ने ऐसा कुछ नहीं कहा जो पहले न कहा गया हो।
ये ईसाइयों के दलाल हैं।
इनको अल्टीमेटली ईसाई पशुबाड़े में घुसेड़ना है।
हिंदुत्व का आधार है कि प्रत्येक मनुष्य ईश्वरत्व की अवस्था प्राप्त कर सकता है।
बुद्ध ने उसी को शून्य कहा। कृष्ण उसी को चेतना कहते हैं। उपनिषदों में कहा गया है: गुरु शिष्य को कहता है: तत्त्वामसि- तुम ब्रह्म हो। शिष्य जब उस ब्रम्ह का अनुभव कर लेता है तो कहता है: अहम ब्रम्हाश्मि - मैं ब्रह्म हूं।
ईसाइयत की मूल अवधारणा है: प्रत्येक मनुष्य जो पैदायशी पापी है। जो जीसस की शरण में जाएगा उसका पाप मिट जाएगा। भले ही उसने कोई पाप किया न हो, फिर भी वह पैदायशी पापी है। #Original_Sin कहते हैं इसे।
कोई ईसाई यह नहीं कह सकता कि I am God. यह ब्लास्फेमी है। आपका गला काटा जा सकता है। कोई ईसाई पादरी यह तथ्य नहीं बताएगा।
फरवरी 2007 में पाकिस्तान का विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कुरैशी भारत आया था।
दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में उसने भारत के सभी चैनलों को इंटरव्यू दिया।
उसका इंटरव्यू राजदीप सरदेसाई रजत शर्मा करण थापर बरखा दत्त शेखर गुप्ता सब ने लिया। कोई परेशानी नहीं.. बहुत फ्रेंडली सवाल पूछे गए.. गंगा जमुनी तहजीब के बारे में पूछे गए पाकिस्तान की जनता के शौक के बारे में पूछे गए लाहौर के गोल चक्कर में बिकने वाले मटन चिकन के बारे में सवाल पूछे गए
फिर नंबर आया अर्नब गोस्वामी का जो उस वक्त टाइम्स नाउ में थे
अरनव गोस्वामी ने आई एस आई द्वारा दिए गए सवालों की लिस्ट या फ्रेम के बजाय पाकिस्तान के विदेश मंत्री से एक पत्रकार की हैसियत से सवाल पूछना शुरू किया
अरनव गोस्वामी का पहला ही सवाल था कि समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में भारत ने जो सबूत पाकिस्तान को दिया है उस पर आप ने क्या कार्रवाई किया ?
पाकिस्तान का विदेश मंत्री जवाब देने में अटक गया फिर और गोस्वामी ने जब कड़वे सवाल पूछने शुरू किये तुरंत ही आईएसआई के अधिकारी आए और अरनव गोस्वामी के साथ तू तू मैं मैं करने लगे और इंटरव्यू बंद करने को कहने लगे
पाकिस्तान का विदेश मंत्री चुपचाप बैठा देख रहा था
सवाल यह है क्या किसी देश का विदेश मंत्री किसी को इंटरव्यू दे और सेना के अधिकारी उसका इंटरव्यू रुकवा सकते हैं ?
दूसरी बात है की अर्नब गोस्वामी के पहले जिन पत्रकारों ने इंटरव्यू लिया उन्होंने उस वक्त मना क्यों नही कर दिया कि हम पत्रकार हैं हमारा धर्म है अपने अनुसार सवाल पूछना ना कि दिए गए फ्रेम के अनुसार सवाल पूछना
लोपामुद्रा, घोषा , अपाला , विश्ववारा आत्रेयी , वाक् आम्भृणी , रोमशा, शश्वती, जुहू ब्रह्मजाया, गोघा, सूर्या सावित्री, यमी, इन्द्राणी, श्रद्धा कामायनी, अदिति, सरमा, उर्वशी, नदी, रात्रि, मेधा, दक्षिणा, वाग्देवी, सरपराज्ञी।
इन महिलाओं ने वेदों की ऋचाएं लिखी हैं।
अब उस समय मिश्रा, शुक्ला,जाटव, यादव उपनाम तो था नहीं और ना ही बाबा साहब का संविधान जिसमें जाति प्रमाण पत्र से आपको बता पाऊं कि ये महिलाएं ब्राह्मण थी या शूद्र पर महिलाओं को वेद लिखने तक का अधिकार था।
तो अपना एजेंडा और अपना कागज खुद तक सीमित रखिए।🙏
General Category Pays the Highest Price in India
• IIT – ₹10 Lakh
• NIT – ₹6.5 Lakh
• IISc – ₹8 Lakh
• IIM – ₹34 Lakh
• JNU – ₹5.8 Lakh
• NSU – ₹3.5 Lakh
Merit is not subsidized, it is penalized.
"फौजी की बेटी" ने जब वामपंथी राह चुनी तब फौजी पिता ने कहा देशद्रोहियों के साथ क्यों जा रही हो ? पिता ने "देशद्रोहियों" का दामन थामने पर बेटी से बात करनी छोड़ दी।
बेटी आज भी दिल्ली, जयपुर और वाराणसी में आतंकी हमला करके 30 निर्दोष भारतीयों की जान लेने वाले और इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की पर गोली दागने वालों को निर्दोष मानती है। बेटी आज बांग्लादेश से प्रेरणा लेती है, जहां रक्तरंजित तख्ता पलट में 1500 लोग मारे गए, जहां हिंदुओं पर हमलों की 2500 घटनाएं रिकॉर्ड हुईं, दीपू दास को हिंदू होने पर खम्भे पर लटका कर ज़िन्दा जला दिया गया।
बेटी की इस खतरनाक "विचारधारा" को छुपाने के लिए "फौजी पिता" की आड़ लेने का खेल शुरू हो गया है!
सामान्य वर्ग को पता होना चाहिए कि जिस भाजपा ने हर जगह आरक्षण 50% से अधिक किया, वहाँ आरक्षितों की फ़ीस माफ़ है और वह फ़ीस आप ही भर रहे हो।
यदि एक 100 विद्यार्थियों की IIT को चलाने के लिए ₹100 रुपये चाहिए, और आरक्षित का योगदान शून्य हो, फिर भी वह IIT चल रही है, तो आपकी फीस, जो ₹1/विद्यार्थी होनी थी, वह ₹2/विद्यार्थी है।
यानी, आपके पिता केवल आपकी शिक्षा का ही नहीं बल्कि उस आरक्षित की भी शिक्षा का भार उठा रहे हैं जो ना केवल कम नंबर लाता है, बल्कि हर तरह के अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करता है।
मध्य प्रदेश में OBC में 40% जातियाँ मुस्लिम हैं। आप उनकी भी फ़ीस का इंतज़ाम करते हैं। और यही @BJP4India आपको यह भी बताती है कि उन्होंने फलाने राज्य में मुस्लिम आरक्षण रुकवा दिया।
सत्य यह है कि यह #AntiGCBJP बस आपसे दलितों-मुस्लिमों के लिए रक्तदान और अंगदान नहीं करवा रही है, बाक़ी आपके रक्त-स्वेद की कमाई पर आधा अधिकार जिनको देना था, मोदी ने वह दे दिया है।
आत्मा जब यूं शरीर छोड़ जाएं तभी होता है महाप्रयाण! वीडियो नहीं होता तो विश्वास नहीं होता!
काशी में बीकानेर के पंडितों के साथ गायत्री पुरश्चरण करते पंडित नारायण व्यास ने मोक्ष के मंत्र पढ़ते यूं देह त्याग दी, वीडियो नहीं होता तो भरोसा नहीं होता!
!!! मोदीजी की हिसाब चुकता स्कीम का लाइव टेलीकास्ट देखिये !!!
यह देखिये MODI Act क़ो हथियार बनाकर देश में कैसी गुंडागर्दी चल रही है !
एक दलित गुंडा IIT Bombay क़े डायरेक्टर का किस तरह इंटेरोगेशन कर रहा है !!!
IIT Bombay क़े सारे प्रोफेसर हाथ जोड़कर अपना सिर झुकाये खड़े हुए हैं और डायरेक्टर खुद इस दलित गुंडे क़े आगे हाथ जोड़कर बैठा हुआ है.
IIT Bombay की गलती सिर्फ इतनी है कि इसने परीक्षा में नकल करते हुए एक दलित छात्र क़ो रंगे हाथों पकड़ लिया था और उसे नकल करने से रोक दिया था.
जिस काबिल प्रोफेसर ने नकलची दलित छात्र क़ो पकड़ा था,उसे अपराधी घोषित करके उसके ऊपर SC ST Act का फेक केस पहले ही दर्ज़ किया जा चुका है
लेकिन @narendramodi जी क़ो उस निर्दोष प्रोफ़ेसर पर फ़र्ज़ी केस करने से भी तसल्ली नहीं हुई-इसलिए इस दलित गुंडे क़ो भेजकर IIT Bombay क़े सभी प्रोफ़ेसरों और डायरेक्टर क़ो भी ज़लील किया जा रहा है.
मोदी जी का सन्देश साफ है कि किसी भी दलित छात्र क़ो किसी भी परीक्षा में अगर कोई टीचर या प्रोफेसर नकल करने से रोकेगा तो उसका जीना हराम कर दिया जायेगा
It was indeed birth based because Xuanzang also mentioned Shudra king, Vaishya king, Kshatriya Monk, Baniya monk Brahmin monk etc
Thoda Padhai Likhai karoge toh badiya rahega instead of Larping.
When Buddhism was at its peak in India and Xuanzang travelled from China to India via Central Asia, India was referred to as the "Country of the Brahmins.”
Xuanzang himself also described India as the “Country of the Brahmins.” multiple times in books. I have read his original work years ago. Why don't Ambedkarites read OG buddhist work?