बस हो, ट्रेन हो या हो मेट्रो,
सफ़र करते वक्त महिलाओं में एक बड़ी कॉमन चीज़ देखने को मिलती है।
अगर कोई पुरुष सीट पर बैठा होता है तो वो उम्मीद करती हैं कि उन्हें देखते ही सीट से उठ जाए। आमतौर पर पुरुष उठ जाते हैं और महिलाओं को बैठने की जगह भी देते हैं।
लेकिन अगर वो सीट पर बैठी हैं और कोई पुरुष आता है जिसे बैठने की ज़्यादा ज़रूरत है या कोई बहुत सामान लेकर खड़ा है या दिव्यांग हैं….. तो वो अपनी सीट से नहीं उठती।
सभी महिलाएं ऐसा नहीं करतीं। पर ज्यादातर यही करती हैं। तो बस उनसे यही कहना है कि दोस्त हम बराबरी की बातें करते हैं। तो हर जगह होना चाहिए। ऐसा नहीं होता कि हम जब चाहें तब पुरुषों पर निर्भर हो जाएं और बाकी वक्त बराबरी की बात करें।
Copied : @raksha_s27
FINANCE BILL MAY BE TABLED TODAY IN PARLIAMENT
"Irrationality on #cryptocurrency is completely unacceptable,"
Ajit Khurana, crypto expert said.
#Crypto