An average SBI employee managed 987 customers in 2014.
Now, one SBI employee manages 2,162 employees.
Headcount grew 10.4% at SBI in 12 years, while customer franchise grew 141.8%.
Research by @RupeetoolByFGM
Customer to employee ratio at #SBI (2014 vs 2026)👇
✔️2014: 987 customers per employee
✔️2026: 2,162 customers per employee
•✔️Total headcount growth: Just 10.4%
@TheOfficialSBI@RupeetoolByFGM
3-Day Bank Strike deferred. Late evening Sunday meeting between trade unions & associations & IBA led to this. Couldn’t the meeting have been held on Saturday? Two bankers’ lives would have been saved & 1.8 million bank employees would have escaped the harassment of Sunday banking. @IBA_org_in
Atleast itni sharam to karo
on moral grounds sare Union leaders under UFBU resign kare
Ek Officer jiski Sunday banking ke karan death ho gayi, uski responsibility le.
Ye to minimum hai.... Itna to karo uncle ji @ChVenkatachalam
#Opinion | Five-day banking: Is it time to end Saturday branch work?
Banks have observed holidays on the second and fourth Saturdays since 2015. With #digitalpayments now handling most transactions, @TamalBandyo makes the case for extending the holiday to all Saturdays.
https://t.co/SaLAEiD3q6
प्रिय @aiboc_in –
आज बैंकिंग सेवा आम नागरिक के लिए केवल एक कार्यालयीन सुविधा नहीं, बल्कि अति आवश्यक सेवा बन चुकी है। देश की आर्थिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा बैंकिंग व्यवस्था पर निर्भर करता है। ऐसे में बैंक शाखाओं को सप्ताह में केवल पांच दिन तक सीमित रखना आज की जरूरतों के अनुरूप कितना उचित है, इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
भारतीय रिजर्व बैंक, वित्तीय सेवा विभाग, भारतीय जीवन बीमा निगम, केंद्रीय सतर्कता आयोग, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, बंबई स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण, नाबार्ड, मंत्रालयों और राज्य सरकारों जैसी अनेक महत्वपूर्ण संस्थाएं पांच-दिवसीय कार्यप्रणाली में काम करती हैं। लेकिन बैंकिंग व्यवस्था की प्रकृति इन संस्थाओं से अलग है। बैंक सीधे करोड़ों ग्राहकों, व्यापारियों, किसानों, कर्मचारियों, पेंशनरों और छोटे-बड़े व्यवसायों से जुड़ा हुआ है।
इसलिए बैंक शाखाओं को सातों दिन खुला रखना आम जनता के हित में अधिक उपयोगी व्यवस्था हो सकती है।
आज किसी व्यक्ति को रविवार को अचानक बैंक से संबंधित आवश्यक कार्य पड़ सकता है। किसी व्यापारी को भुगतान करना हो सकता है, किसी परिवार को तत्काल वित्तीय लेन-देन की जरूरत हो सकती है या किसी व्यवसाय का महत्वपूर्ण भुगतान सप्ताहांत में अटक सकता है। डिजिटल बैंकिंग और तत्काल भुगतान व्यवस्था ने बहुत-सी सेवाओं को चौबीसों घंटे उपलब्ध कराया है, लेकिन हर बैंकिंग आवश्यकता डिजिटल माध्यम से पूरी नहीं होती।
इसलिए बैंक शाखाओं की उपलब्धता भी सप्ताह के सातों दिन होनी चाहिए। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि बैंक कर्मचारियों से बिना अवकाश लगातार सातों दिन काम कराया जाए।
आपके हड़ताल का मुख्य बिंदु यह होना चाहिए कि बैंक सातों दिन खुलें और कर्मचारी भी सप्ताह में दो दिन अवकाश पाएं और ये दोनों व्यवस्थाएं एक साथ संभव भी हैं।
इसके लिए कर्मचारियों की बारी-बारी से ड्यूटी लगाई जा सकती है। कुछ कर्मचारी शनिवार-रविवार को ड्यूटी करें और उन्हें सप्ताह के अन्य दिनों में अवकाश दिया जाए। अगले सप्ताह दूसरे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा सकती है। इस तरह बैंक सातों दिन खुले रहेंगे, लेकिन किसी कर्मचारी पर लगातार सातों दिन काम करने का बोझ नहीं पड़ेगा।
आपके संगठन द्वारा हमेशा सवाल किया जाता है कि बैंक कर्मचारियों पर काम का दबाव अधिक है तो उसका समाधान क्या है?
आपकी बात सही हैं लेकिन इसका समाधान बैंक बंद करना नहीं, बल्कि काम का बोझ कम करना और पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति करना होना चाहिए।
जहां ग्राहकों की संख्या और काम अधिक है, वहां पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति होनी चाहिए। अनावश्यक कागजी कार्रवाई कम की जानी चाहिए। एक ही जानकारी को अलग-अलग जगह बार-बार दर्ज करने की व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए। तकनीक, स्वचालन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल कर्मचारियों का काम आसान करने के लिए किया जाना चाहिए।
ग्राहक पहचान संबंधी कार्य, नियमों के अनुपालन, लेखा-परीक्षण, दस्तावेजीकरण, साइबर धोखाधड़ी की निगरानी और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए भी पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि ग्राहक सेवा करने वाले कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
साथ ही प्रत्येक शाखा में वास्तविक काम के आधार पर कर्मचारियों की संख्या निर्धारित होनी चाहिए। जिस शाखा में अधिक ग्राहक और अधिक लेन-देन हैं, वहां उसी अनुपात में अधिक कर्मचारी होने चाहिए।
इसलिए पांच दिन का कर्मचारी कार्य-सप्ताह और सातों दिन बैंकिंग सेवा ये दोनों को एक साथ लागू किया जा सकता है।
अगर आम जनता को सातों दिन बैंकिंग सुविधा मिले और कर्मचारियों को बारी-बारी से साप्ताहिक अवकाश मिले तो यह व्यवस्था ग्राहक और कर्मचारी दोनों के हितों के बीच संतुलन बना सकती है।
इसी दृष्टिकोण से आज से प्रस्तावित तीन दिवसीय बैंक हड़ताल को स्थगित करने का निर्णय स्वागत योग्य है। हड़ताल के कारण करोड़ों ग्राहकों, व्यापारियों और आर्थिक गतिविधियों को होने वाली परेशानी से बचना महत्वपूर्ण है। कर्मचारियों की समस्याओं और उनकी जायज मांगों पर बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना अधिक उपयोगी रास्ता है।
अब आवश्यकता है कि बैंक प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत केवल पांच-दिवसीय सप्ताह तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसी आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था पर चर्चा हो जिसमें बैंक सातों दिन जनता के लिए उपलब्ध रहें और कर्मचारियों को भी उचित कार्य-समय, पर्याप्त कर्मचारी तथा साप्ताहिक अवकाश मिले।
क्योंकि बैंकिंग व्यवस्था का उद्देश्य केवल कर्मचारियों की सुविधा या केवल ग्राहकों की सुविधा नहीं हो सकता।
@RBI@AIBEAofficial
SHAME ON UFBU!
After asking bankers to prepare for a historic 3-day strike, UFBU has deferred the strike at the eleventh hour.
Thousands stood ready. Bankers sacrificed their Sunday. The movement was mobilised.
And now—THIS.
UFBU, YOU MADE THIS SUNDAY A BLACK SUNDAY FOR BANKERS.
#BlackSunday #UFBU #BankStrike #5DaysBanking #5DayBanking
VIDEO | Delhi: Working President of All India Bank Officers' Confederation (AIBOC), Shiv Shankar Singh reacts on the bank strike and says, "Our continuous demand has been for a 5-day work week in banking. The 12th Bipartite Settlement, which was signed on March 8, 2024, along with nine joint notes, was executed between the IBA (on behalf of the government) and UFBU. The provision for 5-day banking was part of that agreement. It has been over two and a half years now, yet it has not been implemented, even though it should have been put into effect immediately. We are against the government, we are government employees. All 12 Public Sector Banks (PSBs) are Government of India undertakings, and we are its employees. We implement every single initiative of the government, but unfortunately, the government needs to reflect on this as well..."
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
Those who are obsessed with putting negative comments about Bank's employees,,,,I assure you, you actually know nothing about banking system.
5 days banking is a very genuine demand. It should be implemented without thinking twice.
#banking#bank
बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कारण पूछने पर यही लगा कि जिस बैंक की नौकरी को अच्छी नौकरी में गिना जाता था, उसकी हालत बदतर हो गई है। टारगेट के नाम पर कर्मचारी देर शाम तक रोके जाते हैं, छुट्टी नहीं दी जाती है,
तनाव रोज़ का हिस्सा है। काम करने की जगह भी अच्छी नहीं है। ऐसा लगता है कि बैंकर को सज़ा दी जा रही है कि उन्होंने बैंक की नौकरी क्यों की। लोगों ने बताया कि अत्यधिक तनाव के कारण बीमारियाँ होने लगी हैं।
एक बैंकर ने यह भी बताया-
सुबह 8:00 बजे घर से निकलने वाला बैंकर रात को 8:00 या 9:00 बजे के बाद ही घर लौट पाता है, क्योंकि एनपीए (NPA - गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) को रोकने का भारी दबाव होता है। हर खाते की मंथली ईएमआई (EMI) होती है, और यदि वह 90 दिनों तक जमा न हो, तो खाता एनपीए हो जाता है। ऐसे में रीजनल ऑफिस से ब्रांच हेड पर दबाव आता है कि यह खाता आज किसी भी हाल में एनपीए नहीं होना चाहिए। पहले केवल महीने की आखिरी तारीख को एनपीए रोकने का दबाव होता था, लेकिन अब हर सिंगल डे (प्रतिदिन) यह प्रेशर रहता है।
रात के 9:00 बज रहे होते हैं और रीजनल ऑफिस से फोन आता है कि "किसी भी तरह इस खाते को बचाइए।" थक-हारकर जब ब्रांच हेड को लगता है कि उसे अब घर जाना चाहिए, तो वह अपनी जेब से 2,000, 4,000 या 10,000 रुपये तक की ईएमआई खुद भर देता है। बाद में ग्राहक वह पैसा लौटाता नहीं है, जिससे बैंक मैनेजर के अपने पैसे डूब जाते हैं।
बैंक में दिनभर कई तरह के मानसिक तनाव झेलने पड़ते हैं। आपको रिकवरी के लिए फील्ड में निकलना होता है। वहाँ कोई ग्राहक आपको ब्लैकमेल करता है कि "मेरे घर मत आओ, नहीं तो मैं पैसा जमा नहीं करूँगा, सिर्फ़ फोन पर बात करो।" फोन पर बात करने के दौरान ग्राहक कभी-कभी अभद्र और गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग करते हैं। उस तनाव में यदि मैनेजर के मुँह से गलती से भी कोई गलत बात निकल गई, तो ग्राहक उसकी कॉल रिकॉर्डिंग करके ब्लैकमेल करने लगता है।
कृपया बैंकर की बात सुनें । कोई रास्ता निकालें।
6 Crore Legal Cases are pending in Indian Courts, still Supreme Court & High Courts work in 5 Days Work week. But Govt never asked them to Work 6 Days week due to Critical & Essential Services!
Hypocrisy!!!
मेरा एक दोस्त बैंक में मैनेजर है।
एक दिन मैंने हंसते हुए कहा कि
यार, तुम्हारी तो बढ़िया नौकरी है… AC में बैठो, 5 बजे बैंक बंद और फिर घर!
वो भी मुस्कुराया, फिर बोला ...
भाई , बैंक 5 बजे बंद होता है… हम नहीं।
उसकी बात सुनकर मैं सच में चुप हो गया।
उसने बताया कि ग्राहक चले जाने के बाद कैश मिलाना, दिनभर के लेन-देन का हिसाब , रिपोर्टिंग, डॉक्यूमेंटेशन, सिस्टम क्लोजिंग और अगले दिन की तैयारी बाकी रहती है।
स्टाफ कम हो और काम ज्यादा हो , तो कई कर्मचारी शाम 8–9 बजे तक बैंक में रहते हैं।
हम अक्सर बैंक कर्मचारी को सिर्फ काउंटर के पीछे देखते हैं।
यह नहीं देखते कि उसके घर में भी कोई उसका इंतजार कर रहा है।
और यही बात सिर्फ SBI की नहीं पूरे बैंकिंग सेक्टर की है।
बैंक कर्मचारियों को काम से बचना नहीं है।
बस पर्याप्त स्टाफ, उचित काम के घंटे, व्यावहारिक टारगेट, छुट्टी और थोड़ा-सा अपना जीवन चाहिए।
हम बैंक कर्मचारियों की इन जायज़ मांगों के साथ हैं।
क्योंकि ग्राहक के पैसे की तरह,
कर्मचारी का समय और जिंदगी भी कीमती है। 🙏
How many Govt Departments have 5 days working , except the banks?
Well to begin with RBI doesn't work on a Saturday. Even on 2nd and 4th.
#amitkilhor#kilhor#bankstrike#5dayweek