'अधूरी चीज़ों का देवता' को कथेतर गद्य के लिए प्रतिष्ठित 'वागीश्वरी पुरस्कार' दिया गया है। इसके लिए निर्णायक मंडल, मित्रों और पाठकों का आभारी हूँ। इस किताब का नया संस्करण जल्द ही आएगा।
@GeetChaturvedi की अनूठी गद्य-पुस्तक “अधूरी चीज़ों का देवता” का पुरस्कृत होना हमारे लिए हर्ष और संतोष का विषय है। इसे पाठकों ने अपार स्नेह दिया है। अब तक इसके दो संस्करण हो चुके हैं। तीसरे परिवर्धित संस्करण की प्रेस-कॉपी इन दिनों तैयार की जा रही है। हम सबको बधाई।
‘मुझे यक़ीन था कि एक दिन माँ नहीं रहेंगी.’ यह पंक्ति धक से धड़कन रोक सी देती है. इस किताब में ऐसा बहुत दफ़ा होता है. लेकिन बहुत दफ़ा आनंद आता जाता है. अपने परिवार और परिजनों के साथ-साथ व्योमेश कई सारे रिश्तों के बारे में भी बताते हैं तथा पुस्तक के शीर्षक को व्यापक बनाते जाते हैं. पैरेंट्स यानी माता-पिता से विस्तार होते हुए वे अपने को बड़े अभिभावक शामियाने यानी गार्जियनता में पैबस्त करते हैं, जहाँ बच्चे भी ख़ूब शरीक़ हैं.
अद्भुत गद्य है व्योमेश का, यह तो वे सब जानते हैं, जिनने उन्हें सुना या पढ़ा है, पर यह किताब उस ख़ासियत से भी परे जाती है. पढ़ा जाए और रिश्तों और अपनेपन की उस ताप का अहसास किया जाए, जिसे बयान करने में शब्द भी अक्सर थथम जाते हैं. खाँटी बनारसी हैं, तो बनारस भी भरपूर है.
किताब यहाँ से हासिल करें- https://t.co/4npGYdEzhO
'माँ कहती थी :
जो दर्पण टूट जाए
उसमें छवि नहीं देखा करते
उसने यह नहीं बताया था
कि दूसरा दर्पण
होता नहीं है'
~ पंकज चतुर्वेदी
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{'आकाश में अर्द्धचन्द्र', रुख़ पब्लिकेशन्स @Rukhpub, नयी दिल्ली, 2022}
•जब भी अनुचित कुछ•
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"जब भी अनुचित कुछ
कह जाता हूँ
पछताता हूँ
पाता हूँ :
दुर्लभ है
हृदय की निर्मलता"
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('आकाश में अर्द्धचन्द्र', संग्रह 2022,से)
#पंकज_चतुर्वेदी@PANKAJ_C1
{Art Courtesy : @smritiii_01}
@Rukhpub
‘उम्मीद प्रेम का अन्न है’ प्रेम और मृत्यु के इर्द-गिर्द लिखी गई कविताओं की किताब है। कुल 44 कविताओं के साथ गद्य का एक टुकड़ा भी है, जिसे कविता के फ़ुटनोट के तौर पर भी पढ़ा जा सकता है।
@Rukhpub
https://t.co/Z84wKbh7ag
'आकाश में अर्द्धचन्द्र' से एक कविता 'अब हर चीज़' का संवेदनशील और सुन्दर पाठ किया है सोमेश त्रिपाठी 'निर्झर' ने। साभार प्रस्तुत :
@jianuragji@khwabidapanchhi@Rukhpub
सुरमई सरगम :
मैं काफी दिनों से रो नहीं पा रही हूँ, लेकिन “बिल्लियाँ” पढ़ते पढ़ते मैं रोने लगी और वो बड़ी राहत की बात लग रही है मुझे, ऐसा नहीं है कि मैं उस परेशानी से आज़ाद हो गयी हूँ फिर भी बहुत सांस लेने जैसा महसूस हुआ उस दिन रो कर।
@GeetChaturvedi@Rukhpub
"आंसू जो
छलक गया
आंख से...
सबूत है कि
बर्तन भर गया
दुःख का...!"
~पंकज चतुर्वेदी
("आकाश में अर्द्धचन्द्र ":संग्रह:
जहां भावनाओं की नदी,घुटन का
सैलाब,अनुराग की शीतल बयार,
मानवीय मूल्यों का क्षरण,सियासत
के दावपेंच से उभरी जनसंत्रास की
मुखर पीड़ा,निराशाओं के मध्य
आशाओं का सेतु है।)
'यही'
मैं उसके दरवाज़े पर
दस्तक देता
या वह मेरे
प्राणों के लिए
यही सबसे काम्य था
मगर यही
सबसे मुश्किल था
दुनिया में..
(#आकाश_में_अर्द्धचन्द्र:काव्य संग्रह:
"तेजी से बदलते समाज,मूल्य,राग,विराग
सियासत,संत्रास को ध्वनित करती कविताएं")
~पंकज चतुर्वेदी✍️
{Art Courtesy:Pankaj Dixit}
'माँ बच्चे के दोष
देखती भी है तो
उसे अपनी ही
विफलता मानती है
अगर वह भी उसे
क़ुसूरवार ठहराती
तो दुनिया में मनुष्य की
कोई शरण न होती'
~ पंकज चतुर्वेदी
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{'आकाश में अर्द्धचन्द्र', @Rukhpub से}
[Art Courtesy : सिरिस सिरिस]
.@ShuklaVyomesh एक ऐसे कवि जो कभी डाकू बनना चाहते थे... की @Rukhpub से प्रकाशित 'आग और पानी' किताब बनारस को उसके सबसे गाढ़े और मनोहर रंगों में पहचानती है.. इस पुस्तक पर लेखक से वरिष्ठ पत्रकार @jai_shiven की बतकही.
https://t.co/RP3pnnydvF
कल रात दफ़्तर से वापस लौटा तो किताबों का एक जोड़ा मेरा इंतज़ार कर रहा था।
कोई हाथ में कलम पकड़कर किताब के शीर्षक वाले पन्ने पर आपका नाम लिखे और अपनी किताबें आत्मीयता के साथ दुनिया के सबसे पुराने शहर बनारस से सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजे…
तो उसे ग्रहण करना एक सुख है..
धीमी आँच पर पका हुआ ये सुख….पहुँचा है, अंदर जाएगा, खून बढ़ाएगा… @VyomeshShukla भाई के हस्ताक्षर के साथ
१) आग और पानी
२) तुम हो कि मुक़द्दमा लिखा देती हो
…मेरी मेज़ पर हैं
यहाँ तस्वीरों में की-बोर्ड की संगत में ये किताबें थोड़ी अचकचाई हुई हैं, हालाँकि वहीं कंट्रोल कमांड ऑप्शन जैसे बटन बनारसी हवा खाकर मस्त हैं।
आग और पानी से गुज़रना.. बनारस के अद्भुत विस्तार से गुज़रना होगा.. ऐसी उम्मीद में #पढ़ाकूतितली 🦋
एक बात और
मित्र @jianuragji … रुख़ पब्लिकेशन्स को धीरे धीरे सींचकर सार्थक कार्य कर रहे हैं, उन्हें बहुत शुभकामनाएँ
#SidTreeReadings 🔍