#GodKabir_Prakat_Diwas
वेद कहते हैं, परमात्मा सशरीर आता है!
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 के अनुसार परमात्मा सशरीर पृथ्वी पर आता है, वही साक्षात् रूप कबीर साहेब का है, जिनका जन्म नहीं हुआ बल्कि सशरीर प्राकट्य हुआ। इसी ऐतिहासिक सत्य के उपलक्ष्य में संत
Sant Rampal Ji Maharaj
#GodKabir_Prakat_Diwas
600 साल पुराना रहस्य, आज भी काशी की धरती गवाह है!
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398)
Sant Rampal Ji Maharaj
#GodKabir_Prakat_Diwas
जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं।
Sant Rampal Ji Maharaj
#GodKabir_Prakat_Diwas
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु
Sant Rampal Ji Maharaj
#GodKabir_Prakat_Diwas
"कबीर साहेब प्रकट दिवस" वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया।
Sant Rampal Ji Maharaj
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट हुए।
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
Supreme God Kabir
manifested physically as an infant on a louts at Lahartara pond from Satlok during Brahm Muhurat on Jyeshtha Purnima Vikram Samvat 1455 (1398 AD).
Remembering this sacred occasion,
1Day Left Kabir Prakat Diwas
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया। " जीव उदारन तुम को तारन, सीधा जग में आया।।
1Day Left Kabir Prakat Diwas
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
600 साल पुराना रहस्य आज भी काशी की धरती गवाह है!
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। Kabir Prakat Diwas
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
संत गरीब दास जी ने अपनी कमर वाणी में स्पष्ट किया है कि,
जिसके जन्मदाता कोई माता पिता नहीं हैं और जिसके जन्म का कोई प्रमाण नहीं है।वह केवल पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब है।
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#sprituality
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
"कबीर साहेब प्रकट दिवस" वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया।
जीव उदारन तुम को तारन,
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर साहेब के न कोई माता-पिता है,न उनका जन्म-मृत्यु का कोई बंधन है। वे सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा है, जो हर युग मे जीवो के उद्धार हेतु सशरीर धरती पर प्रकट होते है।
ना मेरा जन्म, ना गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया। काशी नगर जल कमल पर डेरा तहाँ जुलाहे ने पाया।।
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
💯💯💯💯
अजन्मा परमेश्वर,जन्म-मृत्यु से परे कबीर साहेब
कबीर साहेब के न कोई माता-पिता हैं, न उनका जन्म-मृत्यु का कोई बंधन है। वे अविनाशी और सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा हैं, जो हर युग में जीवों के उद्धार हेतु सशरीर धरती पर प्रकट होते है
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
जिनका जन्म नहीं, सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसी सत्य के प्रमाण स्वरूप 629वां कबीर साहेब प्रकट दिवस, संत रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में 27, 28 व 29 जून को मनाया जा रहा है।
#GodMorningSunday
🙏🙏✍️🤔🤷♂️
जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं।
#सत_भक्ति_संदेश
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान
1Day Left Kabir Prakat Diwas
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब
1Day Left Kabir Prakat Diwas
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
600 साल पुराना रहस्य, आज भी काशी की धरती गवाह है!
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455
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