गुजरात से पाकिस्तान व्यापार हो सकता है,पंजाब से क्यो नहीं,??
अटारी बॉर्डर से यदि व्यापार शुरू होता है तो पंजाब के किसानों को भी राहत मिलेगी और व्यापारी को भी 👇👇👇
दो हज़ार अठारह-उन्नीस के आंकड़े CRRID की रिपोर्ट से साफ़ हैं. भारत की तरफ़ से सबसे बड़ा निर्यात कपास का धागा था, जिसकी हिस्सेदारी अट्ठासी दशमलव आठ प्रतिशत थी. उसके बाद प्लास्टिक का कच्चा माल यानी एच डी पी ई, और गाड़ी-सिलाई मशीन के पुर्ज़े. पंजाब की छोटी यूनिटों ने उस वक़्त पाँच सौ से हज़ार से ज़्यादा स्ट्रॉ रीपर भी भेजे थे.
पाकिस्तान से आने में सूखे मेवे यानी खजूर सबसे ऊपर थे, उनतालीस प्रतिशत. फिर सीमेंट उन्नीस प्रतिशत, जिप्सम साढ़े सात, एल्युमिनियम अयस्क साढ़े छह. रोज़ाना अस्सी से ज़्यादा ट्रक सिर्फ़ जिप्सम ले जाते थे, करीब तीन हज़ार टन रोज़. सेंधा नमक, जड़ी-बूटियाँ, संतरा और आम भी आते थे.
एक ख़ास बात, ये रूट अफ़गानिस्तान के लिए भी ट्रांज़िट बन गया था. सूखे मेवे, प्याज़, लहसुन वहाँ से आते थे. यानी अटारी सिर्फ़ भारत-पाकिस्तान का रास्ता नहीं, बल्कि मध्य एशिया तक का दरवाज़ा था. पंजाब की छोटी यूनिटों ने पाँच सौ से हज़ार से ज़्यादा स्ट्रॉ रीपर भी निर्यात किए थे. आयात की तरफ़ सूखे मेवे यानी खजूर सबसे ऊपर थे, करीब उनतालीस प्रतिशत, फिर सीमेंट उन्नीस प्रतिशत, जिप्सम, सेंधा नमक, एल्युमिनियम अयस्क और कांच. यानी अमृतसर का मैजिठ मंडी खजूर के भाव पर सबसे ज़्यादा निर्भर था — बंद होने के बाद दाम डेढ़ गुना से दोगुना हो गए थे. #Punjab #Congress #Sachinpilot
An interesting historical observation on the phenotypic similarities between the Kamboj population of Greater Punjab and the Kafirs of ancient Nuristan
The author describes similarities in physical features, including
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