दिमाग़ी नक्सल
कार्तिकेय या नक्सली या मुरुगन पहले कांवरिया थे, जिन्होंने उस इलाके की नदी के पानी के बर्तनों से शिव की पूजा की, जहाँ नक्सल घास उगती है. जिस नदी के किनारे नक्सल घास उगती है, वहाँ पूजा किए जाने वाले शिव को 'नक्सलेश्वर महादेव' कहा जाता है.
-देवदत्त पटनायक
दिमाग़ी नक्सल
कार्तिकेय या नक्सली या मुरुगन पहले कांवरिया थे, जिन्होंने उस इलाके की नदी के पानी के बर्तनों से शिव की पूजा की, जहाँ नक्सल घास उगती है. जिस नदी के किनारे नक्सल घास उगती है, वहाँ पूजा किए जाने वाले शिव को 'नक्सलेश्वर महादेव' कहा जाता है.
-देवदत्त पटनायक
छत्तीसगढ़ का किसान पोस्टरों और विज्ञापनों में मुस्कुरा रहा है, लेकिन हकीकत में खाद के लिए लाइन, संकट और कालाबाज़ारी झेल रहा है.
लगभग हर जिले की यही कहानी है.
यह खबर कृषि मंत्री रामविचार नेताम के गृह संभाग सरगुजा की है.
छत्तीसगढ़ का किसान पोस्टरों और विज्ञापनों में मुस्कुरा रहा है, लेकिन हकीकत में खाद के लिए लाइन, संकट और कालाबाज़ारी झेल रहा है.
लगभग हर जिले की यही कहानी है.
यह खबर कृषि मंत्री रामविचार नेताम के गृह संभाग सरगुजा की है.
पत्रकारों को 2-4 थप्पड़ लगे अगर तो ये आग बबूला हो गई,
लेकिन छात्रों के लाठीचार्ज में हाथ पैर टूट गये, सिर फूट गये, पेलेट गन के छर्रे खाए लेकिन तब तो गुस्सा नही आया इन्हें !
फिर कोई गोदी पत्रकार बोलते तो बुरा मान जाती है ये !
पत्रकार पुष्यमित्र का चित्रा त्रिपाठी को संदेश 👇
माफ कीजिएगा, आप पत्रकार नहीं हैं। आप एंकर हैं।
अमूमन मैं इस तरह की टिप्पणी से बचता हूं। मगर अभी एक अपवाद स्थिति है और खुद मैं इस परिस्थिति में हूं कि यह लिख सकता हूं। और लिखना जरूरी भी है।
तो आप खुद को पत्रकार मत कहिए। आप एंकर हैं। हालांकि आप कभी-कभार फील्ड में दिख जाती हैं।
सच तो यह है कि अपने पूरे करियर में आप न अच्छी पत्रकार बन सकीं, न अच्छी एंकर।
क्योंकि एंकर के रूप में आपका काम अपने पैनल की बात को आगे बढ़ाना था, अपनी राय और एजेंडा थोपना नहीं।
उसी तरह पत्रकार के रूप में आपका काम फील्ड से तथ्य बटोर कर ज्यों का त्यों दिखाना था, अपने हिसाब के तथ्य को दिखाना नहीं।
मगर आपकी ट्रेनिंग ही उस माहौल में हुई कि आपने एंकर और पत्रकार का एक ही मतलब समझा। एजेंडा सेटिंग। तथ्यों के साथ अपने हिसाब से खिलवाड़।
और माफ कीजिए, आपने हमेशा सरकार के पक्ष में एजेंडा सेट किया और देश और समाज में नफरत को बढ़ावा दिया।
आपके इसी अपराध की सजा कल पटना में आपके रिपोर्टर ने भुगता, माइक पकड़ने वाला हर पत्रकार आज भुगत रहा है। आपको इसके लिए शर्मिदा होना चाहिए था। आपके अंदर गिल्ट होना चाहिए था।
मगर वह नहीं है, यह अफसोस की बात है। और सबसे बुरा यह है कि आप पत्रकार शब्द के पीछे अपने अक्षम्य अपराध को छिपाने की बेशर्मी भरी कोशिश भी कर रही हैं। यह सबसे बड़ा अपराध है। क्योंकि आप पेशे की नैतिकता को भी दांव पर चढ़ा रही हैं, अपने एजेंडा सेटिंग के लिए।
हां, यह सिर्फ आपके बारे में नहीं है। आपके जैसे दर्जनों एंकरों के लिए है, जिन्होंने पिछले 12 साल में पत्रकारिता के नाम पर सिर्फ सरकार का भोंपू बनने का काम किया है और पत्रकारिता के पवित्र पेशे को तबाह किया है।
और हां, जनता को फर्क करना सीखना चाहिए कि पत्रकार कौन है और एजेंडबाज कौन हैं।
दूसरी बात, एजेंडा चलाने वाले सिर्फ सरकारी पत्रकार नहीं हैं, वे भी हैं जो इस सरकार को उखाड़ फेंकने वाली ताकत के एजेंडे पर चलने हुए अपने स्टूडियो से रोज अलग तरह का एजेंडा चलाते हैं। क्योंकि वे भी स्टूडियो को ही ताकतवर बना रहे हैं।
दिक्कत यह है कि आज की पत्रकारिता में स्टूडियो तानाशाह हो गया है और पत्रकार निरीह। जबकि स्थिति उलट होनी चाहिए थी। स्टूडियो को विनम्र होना चाहिए था। क्योंकि वे तमाम सच्ची सूचनाओं के लिए ग्राउंड रिपोर्टरों पर निर्भर हैं।
सच पत्रकारों के पास है, एंकरों के पास नहीं। मगर एंकरों के पास ताकत का नशा है।
इस वक्त की सबसे बड़ी दिक्कत ही यही है कि स्टूडियो और एंकर ताकतवर हो गए हैं। जिस रोज ये विनम्र होंगे, पत्रकारों की मेहनत और वस्तुनिष्ठ सूचनाओं के आधार पर अपनी बात रखना सीखेंगे। तभी पत्रकारिता बचेगी।
@pushymitr@chitraaum
@ashokgehlot51 गहलोत जी विपक्ष में बैठकर सलाह देना आसान है लेकिन जनता आपके 5 साल के वादे और अधूरे काम भी नहीं भूली है
भाजपा सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है राजनीति नहीं समाधान ही जनता की प्राथमिकता है
‘हवा में उड़ते हुए’ सड़क परिवहन मंत्री का इंटरव्यू
सवाल : आपने जो आम दिए हैं वे खट्टा है।
जवाब : आप इमली की बात मत कीजिए।
इथेनॉल के मुद्दे पर नितिन गडकरी के इस इंटरव्यू का एक पंक्ति में सा सार यही है।
पूरा इंटरव्यू सुन लीजिए। अगर आप अपना माथा नहीं पकड़ लेंगे तो फिर कहिएगा!
मेघा ने माइलेज के मुद्दे पर पहले सवाल से ही घेरा। अपनी गाड़ी की माइलेज का भी उदाहरण दिया। पर गडकर ने कहा, माइलेज मापने की मशीन घर में नहीं होती, डीलर से जांच कराइए! दिक़्क़त हो तो कंज़्यूमर कोर्ट जाइए!
मतलब कुछ भी!
माइलेज बताने का मीटर घर में नहीं होता पर हर गाड़ी में तो होता ही है। इसको नकार दिया गडकरी ने!
कार कंपनियों के लिए ये बहुत ही आपत्तिजनक बात है कि दशकों से हर कार के साथ बनाए गए उनके माइल-मीटर पर गडकरी ने सवाल उठा दिया है!
पर शायद कार कंपनियाँ गडकरी की इस बात के ख़िलाफ़ फिर भी ना बोलें! संभवतः कोई डर या दबाव होगा! नहीं तो कार कंपनियों को सामने आकर स्वीकारने चाहिए कि कार में फिट माइल-मीटर धोखा है!
बात इतनी भर नहीं है।
क़रीब आधे घंटे के इस इंटरव्यू में गडकरी ने किसी सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया है। गोल गोल घुमाया है। ज़्यादा कुरेदने पर अपरोक्ष रूप से FIR और परोक्ष रूप से Defamation केस तक की धमकी दी है!
सवाल पूछा जा रहा है E10 वाली गाड़ियों में E20 डाले जाने की और जवाब दे रहे हैं 100% इथेनॉल या पेट्रोल से चलने वाले फ़्लेक्सी फ़्यूल इंजन की!
इथेनॉल के बाद भी पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं हुआ?
जवाब : आयं बाएँ साएं
जब एक सवाल का जवाब न सूझा तो पेट्रोलियम मिनिस्ट्री पर बात टाल दी!
इस पूरे इंटरव्यू पर एर रिसर्च पेपर लिखा जा सकता है। रिसर्च पेपर इस बात पर कि जब तर्क और तथ्य न पेश कर पा रहे हों तो अपनी ज़िद को सही साबित करने के लिए इंटरव्यू नहीं देना चाहिए।
बहुत लंबा लिखा जा सकता है। लेकिन निचोड़ ये कि अगर प्रधानमंत्री @narendramodi अपने मंत्री @nitin_gadkari की इन तमाम बातों को सुनने के बाद भी इन पर समुचित ‘नीतिगत’ कार्रवाई नहीं करते हैं तो फिर समझ लीजिए कि ईश्वर नहीं, अब इथेनॉल ही सबका मालिक है 🙏
और अंत में @MeghaSPrasad के लिए एक शब्द
Superb 🙌
Video Credit @ABPNews YT
राजस्थान के जयपुर में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ बदसलूकी का मामला सामने आया है। यहाँ कुछ लोगों ने अचानक उन पर हमला कर दिया, उन्हें थप्पड़ मारा और उनके साथ जमकर धक्का-मुक्की की।
#JaipurNews#RajasthanNews#AbhijeetDipke#CockroachJantaParty
राजस्थान के जयपुर में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ बदसलूकी का मामला सामने आया है। यहाँ कुछ लोगों ने अचानक उन पर हमला कर दिया, उन्हें थप्पड़ मारा और उनके साथ जमकर धक्का-मुक्की की।
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