इन लोगों कि मानसिकता को समझा जा सकता है, क्या भगवान के रूप में किसी नेता को फेम करना क्या सही है? लेकिन जब मूर्खता का स्वीकार मुर्ख लोग करें तब इस तरह का अपभ्रंश देखा जाता है।
@IAmNehaBhart इन लोगों कि मानसिकता को समझा जा सकता है, क्या भगवान के रूप में किसी नेता को फेम करना क्या सही है? लेकिन जब मूर्खता का स्वीकार मुर्ख लोग करें तब इस तरह का अपभ्रंश देखा जाता है।
@indians90717@SushantBSinha राष्ट्रवाद कि परिभाषा नई बनाई गई है, 2014 से पहले चाटुकारिता शब्द का प्रयोग सिमित था लेकिन उनके आने के बाद बढ़ा है, अगर गरिमा शब्द का ही ख्याल किया होता तो भोंकने कि आवश्यकता नहीं होती.
@SushantBSinha क्या हर रोज आपको आसानी से नींद आ जाती है? अगर हा है तो कही न कही मदि��ापान का सहारा जरूर लेना पड़ता होगा क्यूंकि बिना उसके संभव नहीं है, क्या आपके बच्चे और आश्रित आपको सवाल नहीं करते? जितने गिरे हो वहां से उठ के खड़े होना आसान नहीं है, चाटुकारिता कि मिशाल कायम किये हो
@SushantBSinha तुम्हारी बातों से पता चलता है कि आग बहुत तेज लगी है जहाँ भी लगी हो लेकिन तीव्रता का अंदाज लगाया जा सकता है, क्या अपने आप को डिफेंड करने का यही एक तरीका बचा है? आप लोग अगर राष्ट्रवाद को अपना कर्त्तव्य बनाया होता तो आज ईस तरह किसी के प्रति जहर फैलाने के लिए मैदान में नहीं आना पड़ता
@SushantBSinha आप एक जिम्मेदार पत्रकार होने के साथ साथ अच्छे व्यक्ति भी है और लोकतंत्र का चौथा पिलर हो , क्या किसी पार्टी के प्रति इतना लगाव रखना क्या आपके कार्य को कलंकित नहीं करेगा क्या ? मीडिया कि भाषा ईस तरह नहीं हो सकती, लोकतंत्र का भद्दा मज़ाक नहीं होना चाहिए.
जिसने अकेले ही रोक दिया एक हाथ से जुल्म का सफ़र
नादान हैं जो सोचते हैं होगा ‘उस’ पर धमकियों का असर
रिया के साथ पूरा देश है।
शुक्रिया रिया!
#Shukriya_Riya#RiyaAhir#MumbaiPtotest#NEET
@HardikPatel_ ભાઈ તમે આરામ કરો તમારી સમઝ થી પરે છે, અધિકાર, આંદોલન, વિપક્ષ,પક્ષ આ બધું તમારા મોડે સારુ નહિ લાગતું.. ખુદ પોતાના સમાજ નાં અગ્રણી ઓ ને ગેર માર્ગે દો���વાનું કામ કર્યું હતું, લોકતંત્ર ની જીત થઈ છે અને આ આંદોલન ભા��ત નાં સંવિધાન નું પરિણામ છે બાકી નિરલજ્જતા, નિરાંકુશતા શિખર પર છે.
@INCIndia धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवाओं की जीत है, भारत के GEN Z की जीत है।
ये जीत उन करोड़ों युवाओं की है, जिन्होंने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आवाज बुलंद की।
युवाओं के सत्य के सामने नरेंद्र मोदी का घमंड टूटा है, उनके झूठ की हार हुई है।