इन यूनिवर्सिटी से डिग्री लेकर काफी लोग 2018 रीट में चयनित होकर नौकरी कर रहे हैं..
क्योंकि इस भर्ती में 30% अंक स्नातक के अंक जोड़े गए थे..
सरकार से निवेदन है इनकी जांच जरूरी है।।
@RajCMO
ट्रंप के खिलाफ पूरे अमेरिका में No Kings के नाम पर मेगा विरोध प्रदर्शन!!
अमेरिका में कुछ महीने पहले भी ऐसा ही विरोध प्रदर्शन हुआ था, और फिर से वैसा ही माहौल दिखाई दे रहा है। पूरे अमेरिका में 3000 से ज्यादा रैलियों का आयोजन किया गया, जिनमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया।
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल जी एक जांच ये भी करवा दो बहुत गड़बड़ियां मिलेगी।।
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में ��्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्व���निक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्ट��� नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
समस्या की जड़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इसस��� 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पा�� जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
निष्कर्ष
मुख्य���ंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
समस्या की जड़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली ड��ग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर ���ी यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड���ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
REET 2016/2018 में रीट के अंक और डिग्री के अंक का अनुपात 70/30 रखने प�� बहुत सारे फर्जी लोगों ने इन फर्जी यूनिवर्सिटी से डिग्रियां ली थी जो आज भी नौकरी कर रहे हैं।। सरकार को इन सब की डिग्रियां जांच करनी चाहिए तथा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दे कि इनकी डिग्रियां सार्वजनिक करनी चाहिए तथा जिससे युवा इनकी डिग्री देख सके।।
@BhajanlalBjp
@RPS_DharmaGila
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
समस्या की जड़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और ��ास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, वि���ेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए ���न पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे। फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
@madandilawar
REET 2016/2018 में रीट के अंक और डिग्री के अंक का अनुपात 70/30 रखने पर बहुत सारे फर्जी लोगों ने इन फर्जी यूनिवर्सिटी से डिग्रियां ली थी जो आज भी नौकरी कर रहे हैं।। सरकार को इन सब की डिग्रियां जांच करनी चाहिए , इनकी डिग्रियां सार्वजनिक करनी चाहिए
राजस्थान हाई कोर्ट चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा मे लाखो बेरोजगार स्टूडेंट आवेदन करने से वंचित रह गए आवेदन करने की ��ंतिम दिनांक से 5 दिन पहले वेबसाइट हेंग होने के कारण मेहनती स्टूडेंट्स आवेदन नही कर पाए...सभी स्टूडेंट की मांग है की आवेदन के पोर्टल को रिओपन किया जाए।🙏🏻🙏🏻
सिस्टम या तकनीकि की समस्या का समाना बेरोजगार स्टूडेंट क्यो करे...आखिरकार बेरोजगार स्टूडेंट की कौन सुनेगा 😢
क्या आपने राजस्थान हाई कोर्ट चतुर्थ श्रेणी मे आवेदन किया था या वंचित रह गए। 💔
धन्यवाद 🙏🏻🔥